क्या गिरने वाली है विजय की सरकार? CM बनने के दो महीने बाद ही आखिर ऐसा क्या हुआ? इस प्रोजेक्ट पर मचा विवाद!
तमिलनाडु की राजनीति में इस समय जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार बने अभी सिर्फ दो महीने ही हुए हैं कि उसे गिराने की एक बहुत बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे खेल को 'प्रोजेक्ट मेघालय' नाम दिया गया है।
दावा किया जा रहा है कि सरकार को पलटने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की प्लानिंग चल रही थी। चेन्नई पुलिस को इस मामले में कुछ बड़े सुराग हाथ लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के 15 विधायकों को तोड़ा जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि ये पूरा विवाद क्या है।

क्या है यह 'प्रोजेक्ट मेघालय'?
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के उथंगरई सीट से विधायक एन. इलैयाराजा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। विधायक इलैयाराजा का आरोप है कि मुख्य आरोपी थिरुनावुक्कारासु और उसके साथियों ने उनसे संपर्क किया था। इन लोगों ने उन्हें विधानसभा के अंदर अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर वोट करने के बदले 35 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत देने का ऑफर दिया था।
इलैयाराजा ने जब यह पैसा लेने से साफ मना कर दिया, तो उन्हें और उनके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
पुलिस की शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि इस पूरी प्लानिंग के तहत TVK के करीब 15 विधायकों को मोटी रकम का लालच देकर तोड़ने की तैयारी थी ताकि बहुमत के आंकड़े को बिगाड़कर सीएम विजय की सरकार को गिराया जा सके। इसी सीक्रेट मिशन को कोडनेम 'प्रोजेक्ट मेघालय' दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले में पत्रकार और यूट्यूबर का क्या रोल है?
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की जांच अब मीडिया तक भी पहुंच गई है। चेन्नई पुलिस ने एक क्षेत्रीय न्यूज चैनल 'पुथिया थलैमुरई' के सीनियर टीवी पत्रकार विजयन को हिरासत में लेकर 15 और 16 जुलाई को लंबी पूछताछ की है। पुलिस ने पत्रकार विजयन का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा गया है।
इस पूरी साजिश का मुख्य चेहरा थिरुनावुक्कारासु नाम का एक यूट्यूबर है, जो 'IPDS' नाम से एक ओपिनियन पोलिंग ग्रुप चलाता है। पुलिस को तकनीकी जांच में पता चला है कि पत्रकार विजयन और इस मुख्य आरोपी थिरुनावुक्कारासु के बीच लगातार बातचीत हो रही थी। दोनों के बीच मैसेज का लेन-देन भी हुआ था। पुलिस अब यह कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि क्या पत्रकार भी इस सरकार गिराने वाली साजिश का हिस्सा था या उसका रोल सिर्फ खबरें जुटाने तक था।
विपक्ष भड़का और प्रेस क्लब ने उठाए सवाल
पत्रकार विजयन से देर रात तक हुई पूछताछ और उनका फोन जब्त किए जाने के बाद राज्य में एक नया विवाद शुरू हो गया है। चेन्नई प्रेस क्लब ने पुलिस की इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया है। प्रेस क्लब का कहना है कि पुलिस ने बिना सही कानूनी प्रक्रिया का पालन किए पत्रकार का फोन छीना और देर रात तक उन्हें थाने में बैठाकर रखा, जो सीधे तौर पर प्रेस की आजादी को दबाने की कोशिश है।
दूसरी तरफ विपक्ष में बैठी डीएमके (DMK) भी इस मुद्दे पर हमलावर हो गई है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट लिखकर टीवीके सरकार की पुलिस पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जांच के नाम पर पत्रकार को मनमाने ढंग से हिरासत में लेना बेहद निंदनीय है। कनिमोझी ने मांग की है कि सरकार राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों को डराना बंद करे।
DMK नेताओं तक पहुंचे जांच के तार
चेन्नई पुलिस की जांच की आंच अब डीएमके (DMK) के बड़े नेताओं तक भी पहुंचती दिख रही है। पुलिस ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक को भी पूछताछ के लिए समन जारी किया है। हालांकि, डीएमके ने इन तमाम आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है।
डीएमके का कहना है कि मुख्यमंत्री विजय की सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने और राजनीतिक फायदा लेने के लिए विपक्ष पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है और वे इसका कानूनी रूप से करारा जवाब देंगे। बहरहाल इस पूरे मामले ने तमिलनाडु की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां आने वाले दिन सीएम विजय की सरकार के लिए काफी चुनौती भरा होने वाला है।














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