यहां आफत बना मॉनसून, मौत के मुंह में फंसे 427 लोगों को बचाया गया

मॉनसूनी बारिश ने मचाई भारी तबाही, मौत के मुंह में फंसे 427 लोगों को बचाया गया

नई दिल्ली। एक हफ्ते की देरी से उत्तर पूर्वी राज्यों में पहुंचे मॉनसून ने अब तबाही मचानी शुरू कर दी है। उत्तरी पूर्वी राज्य सिक्किम में हो रही भारी मॉनसूनी बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। बारिश के कारण पर्यटकों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। गुरुवार को भारी बारिश और बादल फटने के कारण उत्तरी सिक्किम में जगह-जगह फंसे 427 पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण ये पयर्टक पिछले चार दिनों से फंसे हुए थे। इन सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के बाद गंगटोक लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई है।

गोरखा रेजिमेंट और आईटीबीपी के जवान बने फरिश्ते

गोरखा रेजिमेंट और आईटीबीपी के जवान बने फरिश्ते

पर्यटकों को सुरक्षित निकाले जाने के बाद उत्तरी सिक्किम के कलेक्टर राज यादव ने बताया, 'बारिश और बादल फटने के कारण पिछले चार दिनों से ये पर्यटकर अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए थे। फंसे हुए पर्यटकों को निकालने के लिए भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट और आईटीबीपी ने प्रशासन की मदद की। प्रशासन ने इन 427 पर्यटकों को गंगटोक ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की है। पर्यटकों के लिए सरकारी और सेना के वाहनों के अलावा प्राइवेट टैक्सियां भी लगाई गई हैं। इन सभी पर्यटकों को पहले चुंगथांग ले जाया जाएगा और उसके बाद गंगटोक। प्रशासन ने इन पर्यटकों के लिए नाश्ते और मेडिकल सुविधा की भी व्यवस्था की है। इसके अलावा ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन की तरफ से सभी पर्यटकों के लिए लाछेन में मुफ्त रहने तथा खाने का इंतजाम किया गया है।'

बादल फटने से फंसे पर्यटक

बादल फटने से फंसे पर्यटक

आपको बता दें कि बीते सोमवार को सिक्किम में मॉनसून के दस्तक देने के बाद से ही लगातार भारी बारिश हो रही है। सोमवार को लाछेन और उत्तरी सिक्किम के जेमा-3 इलाके में बादल फटने से पर्यटकों की 60 गाड़ियां फंस गई थी, जिन्हें भारी मशक्कत के बाद निकाला गया। गौरतलब है कि बीते रविवार-सोमवार को मॉनसून उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम से होते हुए पूर्वोत्तर राज्यों यानी असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा तक पहुंच गया। इसके बाद से ही यहां लगातार बारिश हो रही है। हालांकि मॉनसून से पहले पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में बारिश की कमी देखने को मिल रही थी, लेकिन अब मॉनसून ने यहां बारिश की झड़ी लगा दी है। मौसम विभाग ने यहां आसमानी बिजली और ओले गिरने की भी आशंका जताई है।

उत्तर भारत में मॉनसून का इंतजार

उत्तर भारत में मॉनसून का इंतजार

इस साल मॉनसून दक्षिण भारत में लेट पहुंचने के बाद बाकी हिस्सों में भी काफी लेट चल रहा है। गर्मी के साथ-साथ भूजल स्तर गिरने से पानी का संकट झेल रहे कई राज्य मॉनसून के इंतजार में बैठे हैं। आमतौर पर मॉनसून इन दिनों देश के दो-तिहाई हिस्से में सक्रिय जाता है लेकिन इस बार मानसून अभी तक केवल 15 से 20 फीसदी हिस्सों में ही प्रभावी हो पाया है। अरब सागर में उठने वाले चक्रवात 'वायु' ने मॉनसून की गति का काफी हद तक प्रभावित किया है। 'वायु' के कारण मॉनसूनी बादल बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं। पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार है जब मॉनसून इतनी मंद गति से आगे बढ़ रहा है। मॉनसून की इस धीमी चाल ने आम लोगों के साथ-साथ सरकार की चिंता को भी बढ़ा दिया है।

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