सीबीआई को CJI की सलाह-राजनीतिक कार्यपालक बदलेंगे, लेकिन आप स्थायी हैं

नई दिल्ली, 01 अप्रैल: देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब देश में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने सीबीआई की विश्वसनियता को लेकर बड़ी बात कही है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने आज कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो के "कार्यों और निष्क्रियता" की वजह से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

CJI nv Ramanas advice to CBI Political executives will change, but you are permanent

केंद्रीय एजेंसी के एक समारोह में बोलते हुए उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि "सामाजिक वैधता और सार्वजनिक विश्वास को पुनः प्राप्त करना" समय की आवश्यकता है और इसके लिए पहला कदम "राजनीतिक और और एक्जिक्यूटिव के साथ गठजोड़ तोड़ना है। एनवी रमना ने कहा कि निराशा के समय लोग पुलिस के पास जाने से कतराते हैं। सीबीआई आदि एजेंसियों को एक छत के नीचे लाने के लिए एक छत्र स्वायत्त संस्थान की आवश्यकता है। संगठन के लिए एक स्वायत्त व्यक्ति की अध्यक्षता करना अनिवार्य है।

'डेमोक्रेसी: रोल एंड रिस्पॉन्सिबिलिटीज ऑफ इन्वेस्टिगेटिव एजेंसीज' पर स्पीच देते हुए एनवी रमना ने बताया कि भारत में पुलिस व्यवस्था ब्रिटिश काल से कैसे विकसित हुई और वक्त बीतने के साथ, सीबीआई गहरी सार्वजनिक जांच के दायरे में आ गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, पुलिस की ज्यादतियों, निष्पक्षता की कमी और राजनीतिक वर्ग के साथ घनिष्ठ संबंध की वजह से इसकी इमेज धूमिल हुई है।

सीजेआई ने कहा कि, ... अक्सर पुलिस अधिकारी यह कहते हुए हमसे संपर्क करते हैं कि उन्हें सत्ता में बदलाव के साथ परेशान किया जा रहा है... समय के साथ राजनीतिक कार्यपालक बदल जाएंगे। आप स्थायी हैं। इस संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि पुलिस के विपरीत, जांच एजेंसियों को संवैधानिक समर्थन नहीं होने का नुकसान होता है। पुलिस प्रणाली को इसकी वैधता संविधान से मिलती है।

उन्होंने आगे कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैनपॉवर की कमी, निम्नतम स्तर पर अमानवीय स्थिति, आधुनिक उपकरणों की कमी, साक्ष्य प्राप्त करने के संदिग्ध तरीके, रूलबुक का पालन करने में फेल अधिकारी और अधिकारियों की जवाबदेही की कमी...ये ऐसे मुद्दे हैं जो पुलिस व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों के बार-बार स्थानांतरण की भी जिक्र कर इसे एक बड़ी समस्या बताया।

सीबीआई और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले न्यायमूर्ति रमना ने मजाक में कहा था कि जब सीबीआई निदेशक उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने आए, तो "मैंने उनसे कहा कि मुझे भारत में पुलिस के कामकाज के बारे में कुछ आलोचनात्मक टिप्पणी करनी होगी"। उम्मीद है कि उन्होंने मुझे आमंत्रित करके परेशानी मोल नहीं ली हो।

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