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Civil Service Day: भारत में कितने IAS-IPS हैं, अंग्रेजों के जमाने में कैसे होती थी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा?

Civil Service Day: भारत में आज 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस मनाया जा रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अफसरों के सम्‍मान में भारत में साल 2006 से नेशनल सिविल सर्विस डे की शुरुआत हुई थी।

भारत में आईएएस-आईपीएस कितने हैं? अंग्रेजों के जमाने में यूपीएससी की परीक्षा कैसे होती थी? साल 1947 में UPSC का पेपर कैसा आया था? देश की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्‍ना राजम मल्‍होत्रा कौन थीं? आइए जानते हैं इन सारे सवालों के जवाब।

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भारत में कुल 5542 IAS व 4469 IPS अफसर

देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है। सरकारी नीतियां बनाने और उन्‍हें लागू करने से लेकर कानून व्‍यवस्‍था बनाए रखने की जिम्‍मेदारी Indian Administrative Service (IAS) and Indian Police Service (IPS) के ही कंधों पर रहती है। भारत में आईएएस व आईपीएस कुल संख्‍या 10 हजार 11 है। इनमें 5542 IAS और 4469 IPS अधिकारी हैं।

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UPSC में सफलता का प्रतिशत कितना?

दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक संघ लोक सेवा आयोग की आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में सफलता का प्रतिशत सिर्फ 0.1 प्रतिशत है। हर साल लाखों अभ्‍यर्थी यूपीएससी में भाग्‍य आजमाते हैं। यूपीएससी 2024 में 13 लाख अभ्‍यर्थियों ने सिविल सेवा परीक्षा में हिस्‍सा लिया था। इनमें से 1078 का अंतिम रूप से चयन हुआ था।

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भारत की पहली महिला आईएएस कौन थीं?

इंडिया की पहली महिला आईएएस अधिकारी का नाम अन्‍ना राजम मल्‍होत्रा थीं। इन्‍होंने कहा था 'सिविल सेवक का कर्तव्‍य है कमजोरों की आवाज को बुलंद करना।' भारत की सिविल सेवा में 20-25 प्रतिशत महिलाएं हैं, मगर साल 2024 में 54 महिलाओं को आईपीएस सर्विस कैडर मिला। इनकी कुल में 28 प्रतिशत हिस्‍सेदारी थी, जो रिकॉर्ड स्‍तर है।

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यूपीएससी सीएसई प्रश्‍न पत्र 1947

सोशल मीडिया पर साल 1947 की यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा का प्रश्‍न पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें BBC, DSO, FRS, KC, PC, KG, OM, PM, RIN शब्‍दों की फुल फॉर्म और द डाइनेस्‍ट्स टेस्‍टामेंट ऑफ ब्‍यूटी, द वे ऑफ ऑल फ्लेश गुड अर्थ यूटोपिया आदि पुस्‍तकों के लेखकों के नाम पूछे गए थे।
वहीं, यूपीएससी 1947 में अधिकांश सवाल ब्रिटेन की सरकार और इंटरनेशनल अफेयर्स से जुड़े हुए थे। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर IASfraternity नाम की आईडी से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-1947 और इसके मॉडल उत्तर कुंजी शेयर की गई है।

UPSC का इतिहास: 1926 में हुई थी नींव, पहले भारतीय चेयरमैन बने थे एच.के. कृपलानी

भारत में प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा का संचालन करने वाली संस्था यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की स्थापना आज से लगभग एक सदी पहले अंग्रेजों में 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी के जमाने में हुई थी?

यह भी पढ़ें- Civil Services Day: राजस्‍थान के ये 5 बेटे IAS-IPS बनकर दूसरे राज्‍यों में बन गए सेवा की मिसाल

ब्रिटिश शासन से पहले, ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने व्यापारिक हितों के लिए 1757 में कोवेनेंटेड सिविल सर्विस (CCS) नामक सेवा शुरू की थी। इसके तहत कंपनी अपने प्रशासनिक कामकाज के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करती थी।

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1857 की क्रांति के बाद देश की बागडोर ब्रिटिश सरकार के हाथों में आ गई और इसके साथ ही CCS का नाम बदलकर इंपीरियल सिविल सर्विस (ICS) कर दिया गया। भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत 1 अक्टूबर 1926 को औपचारिक रूप से UPSC की स्थापना की गई। उस समय इसके पहले चेयरमैन सर रॉस बार्कर थे।

देश को आज़ादी मिलने के बाद, 1 अप्रैल 1947 को एचके कृपलानी UPSC के पहले भारतीय चेयरमैन बने। तब से लेकर अब तक UPSC देश की सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक बन चुकी है।

21 अप्रैल 1947 को प्रोबेशनरी IAS बैच से सरदार पटेल ने क्‍या कहा?

10 अक्‍टूबर 1949 को संविधान सभा में भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्‍लभभाई पटेल ने ऑल इंडिया सर्विस (आईएएस व आईपीएस) को 'स्‍टील फ्रेम ऑफ इंडिया' कहा था। इससे पहले 21 अप्रैल 1947 को प्रोबेशनरी अफसरों के पहले बैच को संबोधित करते हुए सरदार पटेल ने सीख दी थी कि 'अगर आप इस डर से सही राय नहीं देते कि मंत्री नाराज हो जाएंगे, तो यहां से चले जाइए। प्रशासन को भ्रष्‍टाचार मुक्‍त बनाएं, सांप्रदायिक विवादों से बचें।'

ब्रिटिश शासन में कैसे होती थी UPSC की परीक्षा?

आज UPSC की सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रिटिश शासन के दौर में इसकी प्रक्रिया कैसी थी?

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1860 के दशक में खुला था दरवाज़ा

ब्रिटिश सरकार ने साल 1862 में पहली बार भारतीयों के लिए Imperial Civil Services (ICS) की परीक्षा के दरवाजे खोले। लेकिन यह परीक्षा भारत में नहीं, लंदन में होती थी। परीक्षा की कठिनाई का स्तर इतना ऊंचा रखा गया था कि अंग्रेजों को ही पास करने में आसानी हो और भारतीयों की भागीदारी सीमित रहे।

पहले भारतीय ICS अफसर: सत्येंद्रनाथ टैगोर

सत्येंद्रनाथ टैगोर, जो नोबेल विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे, ICS परीक्षा पास करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 1862 में अकेले लंदन जाकर 1863 में परीक्षा पास की और 1864 में भारत लौटकर बंबई में अपनी पहली नियुक्ति पाई।

कैसा था चयन और ट्रेनिंग का प्रोसेस?

परीक्षा के लिए केवल लंदन में परीक्षा केंद्र था। सिलेबस में ग्रीक, लैटिन, यूरोपीय इतिहास और साहित्य जैसी चीज़ें शामिल थीं, जो भारतीय छात्रों के लिए नई और कठिन थीं। परीक्षा में चयन के बाद अफसरों को ब्रिटिश सोच और प्रशासनिक प्रणाली में कठोर ट्रेनिंग दी जाती थी।

पहले IAS का ICS अधिकारी कहते थे

उन्हें IAS नहीं, बल्कि ICS (Imperial Civil Service) अधिकारी कहा जाता था। आज के IAS और IPS का रूप ICS से ही निकला है। आजादी के बाद 1950 में संविधान लागू होने पर ICS का नाम बदलकर IAS (Indian Administrative Service) कर दिया गया और पहली UPSC परीक्षा का आयोजन हुआ।

1950 की पहली UPSC परीक्षा

एन. कृष्णन भारत के पहले IAS बने। अन्ना राजम मल्होत्रा पहली महिला IAS अधिकारी बनीं। अच्युतानंद दास अनुसूचित जाति से पहले IAS अधिकारी थे। नैमपुई जैम चोंगा अनुसूचित जनजाति से पहले IAS बने (1954 में)।

यह भी पढ़ें- Civil Services Day: कौन थे देश के पहले IAS सत्‍येंद्रनाथ टैगोर, अंग्रेजों का गुरुर तोड़ पास की CSE

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