Civil Services Day: राजस्थान के ये 5 बेटे IAS-IPS बनकर दूसरे राज्यों में बन गए सेवा की मिसाल
हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु कैडर के आईपीएस ओमप्रकाश मीणा, सुनील पालीवाल, गुजरात कैडर के आईपीएस सागर बाघमार, पश्चिम बंगाल के आईपीएस मनोज वर्मा व कर्नाटक कैडर के आईएएस मनोज जैन के बारे में।

राजस्थान की धरती ने भारतीय प्रशासनिक सेवा व भारतीय पुलिस सेवा में कई बेहतरीन अफसर दिए हैं।
पांच आईएएस-आईपीएस तो ऐसे हैं, जो राजस्थान में जन्मे और यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करके दूसरे राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। ये अफसर न केवल भाषा और संस्कृति में घुलमिल गए बल्कि सेवा की मिसाल भी बन गए।

आईपीएस सागर बाघमार, गुजरात कैडर
बाड़मेर जिले के बालोतरा निवासी सागर बाघमार गुजरात पुलिस के काबिल IPS में से एक हैं। गुजरात के जैतपुर में कुख्यात डोंगा गैंग का सफाया किया। संगठित अपराध एवं आतंकवाद निरोधक कानून के तहत पहली बड़ी कार्रवाई कर कुख्यात निखिल डोंगा गैंग के सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचाया।

आईएएस मनोज जैन, कर्नाटक कैडर
जयपुर जिले के रहने वाले मनोज जैन कर्नाटक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, हज एवं वक्फ बोर्ड के सचिव पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ये कनार्टक में जिला कलेक्टर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इनकी कन्नड़ भाषा पर भी जबरदस्त पकड़ है। यादगीर उपायुक्त के रूप में 55 एकड़ झील के साथ 5 एकड़ उद्यान का विकास किया।

आईएएस सुनील पालीवाल, तमिलनाडु कैडर
जोधपुर जिले में गांव होपरड़ी के रहने वाले सुनील पालीवाल चेन्नई में कामराज पोर्ट ट्रस्ट और चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन सह प्रबंधक निदेशक हैं। पहली पोस्टिंग कडलूर एसडीएम के पद पर हुई थी। सुनामी के दौरान लोगों की जिंदगी वापस पटरी पर लाने में सुनील पालीवाल की खास भूमिका रही।

आईपीएस ओमप्रकाश मीणा, तमिलनाडु कैडर
अलवर जिले के गांव बाबेली के रहने वाले ओमप्रकाश मीणा तमिलनाडु स्पेशल बटालियन दिल्ली के कमांडेंट हैं। इन्होंने तमिल भाषा सीखने में महज चार माह का वक्त लिया। वर्तमान में तिहाड़ जेल समेत दिल्ली की अन्य जेलों की सुरक्षा का जिम्मा इन्हीं के पास है। आईपीएस से पहले ये राजस्थान में आरएएस अफसर भी रहे।

आईपीएस मनोज वर्मा, पश्चिम बंगाल कैडर
राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले मनोज वर्मा ने जंगलमहल से नक्सलवाद का खात्मा किया। 12 साल पहले पश्चिम बंगाल के जंगलमहल, पश्चिम मिदनापुर, बांकुड़ा और पुरुलिया जिले में माओवादियों का सफाया करने की जिम्मेदारी इन्हीं को सौंपी गई थी। इन्होंने विशेष अभियान चलाकर सेवा की मिसाल पेश की। एनकाउंटर में माओवादी नेता किशनजी को ढेर किया।












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