नागरिकता कानून: मंगलुरू में पुलिस ने अस्पताल पर चलाए आंसू गैस के गोले, सीसीटीवी फुटेज आई सामने
नई दिल्ली। नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गुरुवार को कर्नाटक के मंगलुरू में हिंसा हुई थी। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली चलाई थी, जिसमें दो की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। गोली से घायल हुए लोगों को मंगलुरू के हाईलैंड हॉस्प्टिल में लाया गया था। हाईलैंड अस्पताल की ओर से बताया गया है कि पुलिस ने आकर हॉस्पिटल पर भी आंसू गैस के गोले चलाए। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों को पकड़ने की बात कहकर पुलिस मरीजों के कमरों तक में घुस गई और स्टाफ के साथ बदतमीजी की गई। अस्पताल ने इसको लेकर सीसीटीवी की फुटेज भी जारी की है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, हाईलैंड हॉस्पिटल के सीनियर अधिकारी ने बताया, विरोध प्रदर्शन में घायल लोगों के लाए जाने के बाद एक छोटी सी भीड़ अस्पताल के पास जमा हो गई। एहतियात के तौर पर और स्थिति को देखते हुए हमने पुलिस को सतर्क किया और सुरक्षा मांगी। हमने पुलिस को सुरक्षा के लिए बुलाया लेकिन उन्होंने आते ही अस्पताल में तीन आंसू गैस के गोले दागे। वो लोग अस्पताल के कमरों में प्रदर्शनकारियों को खोजने की बात कह मरीजों और स्टाफ को डराना धमकाना शुरू कर दिया।
हाईलैंड अस्पताल में ये गुरुवार शाम करीब 6 बजे हुआ। अस्पताल ने सीसीटीवी फुटेज जारी की है लेकिन डॉक्टर अपना नाम बताकर बात करने से बच रहे हैं। मंगलुरू पुलिस ने बंडारू के पास प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं थीं। पुलिस की गोली से 9 लोग घायल हुए। जिसके बाद घायलों को यहां लाया गया। पुलिस की गोलियों से 49 साल के जलील और 23 साल के नौशीन की मौत हो गई थी।
बता दें कि नागरिकता संशोधन एक्ट, 2019 को हाल ही में सदन से मंजूरी मिली है। इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता का प्रस्ताव है। कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन इस बिल का विरोध कर रहे हैं। देशभर की बड़ी यूनिवर्सिटियों के छात्र भी इसके खिलाफ सड़कों पर हैं। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि धर्म के आधार पर कानून बनाना भारत के संविधान पर हमला है।












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