CAB पर जेडीयू में घमासान, आरसीपी सिंह बोले- कौन हैं प्रशांत किशोर और उन्होंने पार्टी के लिए किया क्या है?
नई दिल्ली। नागरिकता कानून पर जनता दल (यूनाइटेड) के मोदी सरकार के पक्ष में वोट करने के बाद से पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर आलाकमान के इस फैसले से नाराज चल रहे हैं। जदयू के समर्थन करने पर प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा कि पार्टी के नागरिकता संशोधन विधेयक को समर्थन देने से निराश हुआ, ये बिल नागरिकता के अधिकार से धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। इसके बाद राज्यसभा में बिल के पारित होने के बाद उन्होंने पार्टी के मुखिया और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा था। वहीं, प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने उनपर बड़ा हमला बोला है।

पार्टी ने नागरिकता एक्ट पर अपनी लाइन तय कर ली है- JDU सांसद
जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि पार्टी ने नागरिकता एक्ट पर अपनी लाइन तय कर ली है। उन्होंने कहा, 'मैं किसी का नाम नहीं लूंगा लेकिन अगर किसी को कोई समस्या है तो वह स्वतंत्र है।' जदयू सांसद ने कहा, 'वह (प्रशांत किशोर) कौन है? जबसे वह पार्टी में आए थे, संगठन का कौन सा काम उन्होंने किया है और अब वह कहां काम कर रहे हैं? अगर उनको जेडी (यू) की नीति पसंद नहीं आ रही है तो उन्हें अपना रास्ता चुनना चाहिए।'

जो पार्टी छोड़ना चाहता है, आजाद है- आरसीपी सिंह
आरसीपी सिंह से पार्टी कार्यालय में मीडियाकर्मियों ने प्रशांत किशोर के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक्ट पर अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। वहीं, सांसद राजीव रंजन ने भी कहा कि अगर पार्टी प्रमुख ने फैसला लिया है तो कदम वापस खींचने का कोई सवाल ही नहीं है। बता दें कि नागरिकता कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है। लोकसभा और राज्यसभा में जदयू के बिल का समर्थन करने के बाद से ही प्रशांत किशोर लगातार आलाकमान पर निशाना साध रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने किया था पार्टी के फैसले का विरोध
नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी पर पार्टी के खिलाफ राय देते हुए प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा था, 'संसद में बहुमत साबित हो चुका है। न्यायपालिका से इतर देश की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी अब 16 गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों पर है। ये वे राज्य हैं, जिन्हें इन कानूनों को लागू करना है। नीतीश पर निशाना साधते हुए पीके ने लिखा, 'तीन मुख्यमंत्रियों (पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल) ने नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी का विरोध किया है। अब वक्त आ गया है कि बाकी मुख्यमंत्री इस पर अपना रुख साफ करें।'












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