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Chunavi Kissa: जब वाजपेयी की जीती हुई बाजी हार में बदली, नेहरू की एक रणनीति ने पलटा था चुनावी पासा

Lok Sabha Election Chunavi Kissa: देश में जारी गर्मी के बीच लोकसभा चुनाव 2024 से भी सियासी पारा हाई है। ऐसे में राजनीतिक दल अपने-अपने प्रचार में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ रहे हैं। एक्ट्रेस कंगना रनौत, हेमा मालिनी सहित कई फिल्मी स्टार चुनावी मैदान में हैं तो कई सितारे प्रत्याशियों के समर्थन में रैली और रोड शो भी करते नजर आ रहे हैं, लेकिन एक वाक्या ऐसा भी जहां एक फिल्मी सितारे ने हारी हुई बाजी को जीत में बदल दी थी।

जी हां, चुनावी किस्से में आज बात उसी घटना की होगी, जहां अटल बिहारी वाजपेयी की जीती हुई बाजी को एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता ने हार में तब्दील कर दिया था। चुनाव के बीच बदले मिजाज की यह घटना 1962 लोकसभा चुनाव की है, जहां टक्कर जनसंघ प्रत्याशी अटल बिहारी वाजपेयी और कांग्रेस नेता सुभद्रा जोशी के बीच थी।

Chunavi Kissa Balraj Sahni

कहा जाता है कि 1962 का यह वही चुनाव था, जब प्रचार में फिल्मी सितारों की एंट्री हुई थी, और उसके पीछे के रणनीतिकार थे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, जिन्होंने खुद कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार ना करके एक फिल्मी सितारे को चुना।

दरअसल, यूपी की बलरामपुर लोकसभा सीट से 1957 में जीत कर संसद पहुंचे अटल बिहार वाजपेयी की टक्कर 1962 में इसी सीट पर कांग्रेस नेता सुभद्रा जोशी से थी। दो बार की सांसद सुभद्रा जोशी का नाम सुनकर खुद अटल बिहारी भी चौंक गए थे।

अटल बिहार के खिलाफ प्रचार नहीं करना चाहते थे नेहरू

बताया जाता है कि उस वक्त सुभद्रा चाहतीं थीं कि नेहरू जी उनकी सीट पर आकर उनके लिए प्रचार करें, लेकिन नेहरू अटल बिहारी के खिलाफ प्रचार नहीं करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने उस वक्त के सबसे लोकप्रिय चेहरों की तलाश करते हुए फिल्म अभिनेता बलराज साहनी को कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार के लिए चुना।

हालांकि अटल जी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। और इसके पीछे की वजह यह थी कि अटल जी का मानना था कि बलरामपुर की जनता सुभद्रा जोशी को इतना नहीं जानती थी और अटल जी एक बार जीते हुए कैंडिडेट थे। ऐसे में वो अपने चुनाव प्रचार में जुट गए।

फिर नेहरू ने अपनाई ये रणनीति

इधर, बलराज साहनी अपनी फिल्म 'दो बीघा जमीन' से पूरे देश में प्रसिद्ध और चेहते बन चुके थे। उन्होंने उस फिल्म में 'शंभू' का किरदार निभाया, जिसने गरीबी से लड़ाई लड़ी। वहीं पंडित नेहरू ने भी अंदाजा लगाया कि लोग नेता से ज्यादा लोग अभिनेता को पसंद करते हैं। ऐसे में उन्होंने बलराज साहनी से बात की और उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के लिए बलरामपुर में प्रचार करने के लिए कहा।

कांग्रेस प्रत्याशी की सभाओं में उमड़ी भीड़

वहीं जब लोगों को पता लगा कि बलरामपुर में सुभद्रा जोशी के समर्थन में बलराम साहनी आ रहे हैं तो लोगों की रैलियों में भीड़ जुटने लगी। बताया जाता है कि बलराज साहनी बलरामपुर में शायर बेकल शाही के घर पर ठहरे थे और वही से सुभद्रा जोशी सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने प्रचार की स्क्रिप्ट तैयार की।

चुनाव प्रचार के दौरान आलम यह था कि लोग बलराज साहनी की एक झलक देखने के लिए घरों की छतों और खिड़कियों पर खड़े दिखाई दिए। बलरामपुर की गलियों और चौबारे भीड़ उमड़ी से पट गए। बलराज साहनी ने उस दिन शाम तक जनसभा की और कांग्रेस के लिए वोट मांगे।

एक्टर ने बदल दी पूरी चुनावी हवा!

चुनाव के दौरान हुआ यूं कि एक्टर ने पूरा जनता का मिजाज बदल दिया और सुभद्रा जोशी के पक्ष में ऐसा माहौल बना कि अटल बिहारी वाजपेयी अपनी जीती हुई सीट हार गए। सुभद्रा जोशी ने अटल जी को सिर्फ 2052 वोट से हराया और उनकी जीती सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। हालांकि बाद में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जिद के बाद अटल बिहारी को राज्यसभा से संसद भेजा गया।

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