'पद्मभूषण देने के कुछ दिन बाद ऐसे अपमानित करना सही नहीं', बंगला खाली करवाए जाने पर बोले चिराग
नई दिल्ली, 5 अप्रैल: पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को आवंटित बंगाल पिछले हफ्ते उनके परिवार से खाली करवा लिया गया। इस पर अब उनके बेटे और सांसद चिराग पासवान ने दुख जाहिर किया है। साथ ही कहा कि जिस तरह से उनके परिवार को बाहर निकाल दिया गया और अपमानित किया गया, उससे ऐसा महसूस हो रहा कि उनके साथ धोखा हुआ है।
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एनडीटीवी से बात करते हुए चिराग ने कहा कि वो 12, जनपथ बंगला खाली करने के लिए तैयार थे, क्योंकि रामविलास पासवान के निधन के बाद उनका परिवार उसका हकदार नहीं था। जो कुछ भी सरकार से संबंधित होता है, वो स्थायी नहीं हो सकता और हम उस पर दावा करने के बारे में कभी नहीं सोचेंगे। उनको लंबे वक्त तक उस घर में रहने का मौका मिला, इस वजह से वो खुद को भाग्यशाली समझते हैं। वो घर व्यावहारिक रूप से सामाजिक न्याय आंदोलन का जन्मस्थान था।
चिराग ने आगे कहा कि मुझे घर खोने का बुरा नहीं लग रहा है। वो किसी ना किसी दिन जाना ही ना, उनको सिर्फ उस बात पर आपत्ति है, जिस तरह से ये किया गया। उन्होंने कहा कि घर खाली करने की समय सीमा 20 मार्च थी, इस वजह से वो एक दिन पहले ही जाने को तैयार थे, लेकिन उनको आश्वासन देकर रोका गया। जब उनसे घर खाली करवाया गया तो सामान को सड़क किनारे रख दिया गया, जिसमें उनके पिता की तस्वीरें थीं।
एलजेपी सांसद ने कहा कि मेरे पिता की तस्वीरें बंगले से निकालकर फेंक दी गईं। इस साल आपने जिस व्यक्ति को पद्मभूषण दिया, उसके साथ ऐसा अपमान किया जा रहा है। वहीं जब चिराग से पूछा गया कि क्या वो अभी भी पीएम मोदी का श्रीराम और खुद को हनुमान की तरह देखते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि मैं पिछले डेढ़ साल से अपने रास्ते पर हूं। ऐसे गठबंधन का कोई मतलब नहीं है जहां आपसी सम्मान ना हो।












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