चीन को भरोसा भारत के रिचर्ड निक्सन साबित होंगे नरेंद्र मोदी

इसके साथ ही थिंक टैंक ने पूरी उम्मीद जताई है कि नरेंद्र मोदी भारत के अगले रिचर्ड निक्सन साबित होंगे जो चीन के व्यवसाय को और आगे बढ़ाएंगे। चीन के मुताबिक नरेंद्र मोदी के शासन संचालन का तरीका बिल्कुल चीन के जैसा ही है।
शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल प्रक्टिसेज में विशेषज्ञ और चीनी सरकार के साथ काम करने वाले ल्यू जोंगाई ने चीन की सरकार के न्यूज पेपर द ग्लोबल टाइम्स में छपे अपने लेख में नरेंद्र मोदी को भारत का अगला रिचर्ड निक्सन करार दिया है।
वर्ष 1972 में अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन एक हफ्ते की चीन यात्रा पर गए थे और उनकी यात्रा को चीन ने 'द वी दैड चेंज्ड द वर्ल्ड ' कहकर परिभाषित किया था। उनके उस समय के चीनी दौरे ने पूरे एशिया रीजन में एक अलग ही छाप छोड़ी थी और उसकी अहमियत आज तक कायम है। निक्सन के उस दौरे के बाद अमेरिका और चीन और करीब आ गए थे।
निरंकुश नेता नहीं बनेंगे नरेंद्र मोदी
ल्यू जोंगाई ने उन सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है जिसमें चीन के ही कुछ राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों ने नरेंद्र मोदी का एक निरंकुश प्रधानमंत्री के तौर पर संभावना जाहिर की थी।
जोंगाई ने कहा है कि राइट विंग भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी भारत के 'निक्सन' साबित होंगे जो आने वाले समय में चीन-भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। जोंगाई कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के शासन संचालन का तरीका बिल्कुल चीन की ही तरह है।
70 के दशक में अमेरिका और चीन के बीच जारी शीत युद्ध की स्थिति को खत्म करने की वजह से चीन में आज भी निक्सन का काफी सम्मान होता है। जोंगाई के मुताबिक बीजेपी के विपक्षी यह मानते हैं कि मोदी एक निरंकुश
नेता हैं। वहीं अगर पूरी दुनिया और पश्चिमी आलोचक नरेंद्र मोदी पर हमला करते हैं तो उसकी सिर्फ एक ही वजह है और वह है नरेंद्र मोदी के कामकाज का तरीका जो कि बिल्कुल चीन के ही जैसा है।
मोदी ध्यान रखें अपनी जरूरतों का
जोंगाई यह कहना नहीं भूलते कि मोदी को एक शांत और स्थायी पड़ोसी चाहिए जो कि घरेलू आर्थिक विकास को आगे बढ़ा सके और साथ ही उनके उस वादे को भी पूरा कर सके जिसमें उन्होंने भारत को आत्म-निर्भर और मजबूत बनाने की बात कही थी।
वहीं ग्लोबल टाइम्स के अपने आर्टिकल में जोंगाई ने यह भी कहा है पश्चिमी मीडिया चीन और भारत के बीच मतभेद पैदा कर रहा है। वह मोदी को ‘भारत का अबे' के रूप में चित्रित कर रहे हैं जिन्होंने चीन के खिलाफ सख्त रूख अपनाया था। शिन्जो एबे जापान के प्रधानमंत्री हैं और वर्तमान समय में चीन एबे को बिल्कुल भी पसंद नहीं करता है।
सीमा विवाद सुलझा सकेंगे मोदी
चीन ने 90 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश गुजरात में किया है। चीन की एक कंपनी के साथ गुजरात सरकार ने 400 करोड़ रुपए का एक एमओयू साइन किया है। इसके तहत कंपनी गुजरात में वड़ोदरा के पास एक हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर्स और रिएक्टर्स का प्लांट लगाएगी।
हालांकि चीन सरकार के ही एक और विशेषज्ञ हृयू शिशहेंग ने हाल ही में बयान दिया था कि मोदी सीमा विवाद में काफी आक्रामक रवैया चीन के खिलाफ अपना सकते हैं।
वह हो सकता है कि चीन के साथ बातचीत करने में दलाई लामा का प्रयोग करें। वहीं जोगांई का इस मुद्दे पर मानना है कि भारत-चीन सीमा विवाद दोनों देशों के संबंधों का सबसे बड़ा रोड़ा है।
भारत-चीन सीमा विवाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में पैदा हुआ था। मोदी और भाजपा पर इसका कोई ऎतिहासिक बोझ नहीं है, इसलिए इस पेंचीदा मुद्दे को सुलझाने में मदद मिल सकती है।
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