Spy balloon: संदिग्ध 'चीनी' जासूसी गुब्बारा दिखे तो क्या कार्रवाई हो ? सुरक्षा बल कर रहे हैं ये तैयारी
भविष्य में संदिग्ध गुब्बारा नजर आने पर क्या ऐक्शन हो, इसको लेकर रक्षा बलों के लोगों के बीच चर्चा चल रही है। विचार इस विषय को लेकर हो रहा है कि इसके लिए क्या हथियार और प्लेटफॉर्म इस्तेमाल हो।

भारत भी अब आसमान में संदिग्ध जासूसी चीज नजर आने पर उसे मार गिराने की योजना बना रहा है। रक्षा बलों के लोग इसके लिए एक प्रेजेंटेशन तैयार कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति उपस्थित होने पर क्या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर अपनाई जाए। हाल में अमेरिका ने संदिग्ध चीनी गुब्बारों को मार गिराने का दावा किया था, जो बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद का भी मसला बना था। भारत के साथ करीब साल भर पहले अंडमान में ऐसी स्थिति आई थी, लेकिन तब उसे छोड़ दिया गया था। लेकिन, आगे से इसको लेकर सख्त रूख अपनाने की तैयारी चल रही है।

रक्षा बल संदिग्ध गुब्बारों पर ऐक्शन को लेकर कर रहे हैं चर्चा
अमेरिका की ओर से संदिग्ध चीनी जासूसी गुब्बारों को मार गिराए जाने के बाद भारतीय रक्षा बलों में भी इसकी तैयारी शुरू हो गई है। भविष्य में अगर ऐसी स्थिति भारतीय वायु क्षेत्र में पैदा होती है तो क्या कार्रवाई की जाए, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर को लेकर बातचीत चल रही है। दरअसल, करीब साल भर पहले अंडमान के आसमान में भारतीय रक्षा बलों ने उसी तरह का संदिग्ध गुब्बारा देखा था, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। करीब तीन-चार दिनों तक भारतीय वायु क्षेत्र में नजर आने के बाद वह ओझल हो गया था।

भविष्य में संदिग्ध गुब्बारों को मार गिराने पर विचार
रक्षा अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया है, 'रक्षा बलों के बीच इस मसले पर बातचीत लगातार चल रही है और अधिक जानकारियां उभर कर सामने आ रही हैं। अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि हो सकता है कि इन गुब्बारों का परिचालन तंत्र होता है और इसे उसके स्वामी के हित वाले क्षेत्र में स्थिर रखा जा सकता है।' उन्होंने कहा कि चर्चा इस बात पर हो रही है कि भविष्य में ऐसे गुब्बारों से कैसे निपटा जाए और अगर जरूरत पड़ी तो इसपर निशाना साधने के लिए किस तरह के हथियार या प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक सेना जवाबी कार्रवाई की पूरी ठोस योजना बना रही है और अंतिम मंजूरी के लिए सरकार के सामने इसका प्रेजेंटेशन देगी।

अंतरराष्ट्रीय कानून का भी अध्ययन
अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने ऐसी संदिग्ध चीजों का पता लगाने के लिए मौजूदा रडार नेटवर्क के इस्तेमाल करने पर भी बातचीत शुरू कर दी है। यही नहीं इसके लिए वे 60,000 से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने वाले ऐसे फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है, उसका भी अध्ययन कर रहे हैं। इससे लगता है कि अब इन मामलों को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।

अंडमान के आसमान में दिखा था संदिग्ध गुब्बारा
जब अमेरिका ने अपने वायु क्षेत्र में मौजूद संदिग्ध गुब्बारों को मार गिराया था तो रक्षा अधिकारियों ने कहा था, 'काफी दिनों पहले हमने अंडमान के ऊपर गुब्बारेनुमा- सफेद चीज देखी थी और ग्राउंड पर मौजूद हमारे लोगों ने उसकी हाई रेजॉलूशन तस्वीरें ली थीं।' हालांकि, उस गुब्बारेनुमा चीज का मकसद क्या था या वह कहां से आया था, यह साफ नहीं था। उन्होंने कहा था कि यह साफ नहीं था कि वह म्यांमार से आया था या चीन से लेकिन तीन से चार दिनों बाद वहां से हट गया था।
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'चीनी' जासूसी गुब्बारों की अब खैर नहीं
उन्होंने तब कहा था कि यह मौसम विज्ञान से संबंधित गुब्बारा भी हो सकता है, क्योंकि कई बार हवा की वजह से ऐसे गुब्बारे पाकिस्तान की ओर से भारतीय क्षेत्र में आ जाते हैं। रक्षा अधिकारी ने अब कहा है कि 'अधिकारियों का कहना है कि अगर एक ऐसी चीज अंडमान या किसी दूसरे क्षेत्र में फिर नजर आती है, उसका सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाएगा और अगर पाया कि जासूसी चीज है तो उसे गिराया जा सकता है।'(तस्वीरें- प्रतीकात्मक और फाइल)












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