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क्‍या लद्दाख के देपसांग में 18 किमी तक अंदर घुस गई चीनी सेना, जानिए क्‍या है सच

नई दिल्‍ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव की स्थिति को टालने के लिए अब तक चार दौर की कोर कमांडर वार्ता हो चुकी है। आखिरी बार 14 जुलाई को दोनों देशों के कमांडर मीटिंग पर मिले थे। भारत की तरफ से लद्दाख में उन तमाम जगहों का जिक्र किया गया जहां पर पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवान मौजूद हैं। इन सबके बीच अभी तक देपसांग के बारे में भारत की तरफ से कोई भी जिक्र चीन से नहीं किया गया है। इंग्लिश अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस की तरफ से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देपसांग जो भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत ही महत्‍वपूर्ण है, वहां पर भारतीय जवानों को पेट्रोलिंग नहीं करने दी जा रही है।

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    India China Tension: Ladakh के Depsang में 18 किमी घुसी चीनी सेना, क्‍या है सच? | वनइंडिया हिंदी
    DSDBO रोड तक आ जाएगा चीन!

    DSDBO रोड तक आ जाएगा चीन!

    अखबार के मुताबिक इस हिस्‍से का जिक्र न होने से सुरक्षा एजेंसियां परेशान हैं। उनका मानना है कि अगर भारत की तरफ से चुप्‍पी साधी रखी गई तो फिर इस इलाके में चीन की तरफ से एलएसी की नई स्थिति तैयार कर दी जाएगी। यहां पर चीन ने अपनी सीमा को 18 किलोमीटर तक पश्चिम में कर दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत को फिर से दौलत बेग ओल्‍डी (डीबीओ) एयरफील्‍ड के करीब दाखिल होने की मंजूरी नहीं मिल पाएगी। इसके अलावा चीन,दारबुक-श्‍योक-डीबीओ (डीएसडीबीओ) सड़क के एकदम करीब तक आ जाएगा। पूर्व नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा ने अखबार को बताया है कि अगर ऐसा हुआ है तो फिर न सिर्फ दौलत बेग ओल्‍डी बल्कि काराकोरम रेंज तक भारत के लिए पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। उनके मुताबिक एलएसी को आगे करके चीन मानता है कि वह पश्चिमी हाइवे पर सुरक्षा बढ़ा लेगासस साथ ही शिनजियांग और तिब्‍बत भी आपस में जुड़ जाएंगे।

    साल 2013 में भी यहीं हुआ था विवाद

    साल 2013 में भी यहीं हुआ था विवाद

    देपसांग वही जगह है जहां पर साल 2013 में चीनी सेना ने अपने टेंट लगा लिए थे। तीन हफ्ते बाद इलाके की यथा स्थिति बरकरार की जा सकी थी। वहीं एक सीनियर आर्मी ऑफिसर ने बताया है कि देपसांग पर अभी तक जिक्र नहीं हुआ है क्‍योंकि यहां अभी तक टकराव की स्थिति नहीं है। ऐसी संभावना है कि देपसांग पर चर्चा चीन के साथ एलएसी की दूसरी जगहों से डिएस्‍कलेशन पूरा होने के बाद हो। सुरक्षा एजेंसियां यह भी मान रहे हैं कि भारत चाहता है कि चीन पहले पैगोंग इलाके से निकले। देपसांग और पैंगोंग दोनों ही जगहों पर भारत और चीन की सेनाएं अपना-अपना दावा करती हैं। जब से चीन के साथ टकराव शुरू हुआ है तब से ही चीनी सेना ने एलएसी के इन दोनों इलाकों पर भारतीय सेना को गश्‍त करने से रोका है।

    पेट्रोलिंग से रोक रहे चीनी जवान

    पेट्रोलिंग से रोक रहे चीनी जवान

    बॉटलनेक या वाई जंक्‍शन जहां पर चीनी जवान, इंडियन आर्मी के जवानों को पेट्रोलिंग से रोक रही हैं, वह जगह डीबीओ एयरफील्‍ड से 30 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। साथ ही डीएसडीबीओ रोड से इसका फासला सात किलोमीटर से भी कम है। दूसरी तरफ भारत की एजेंसियों की तरफ से शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि लद्दाख में डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद भी पीएलए के सैनिक अहम रणनीतिक जगहों पर अड़े हैं। चीनी सैनिक हॉट स्प्रिंग्‍स, पैंगोंग त्‍सो और देपसांग में मौजूद हैं। आपको बता दें कि 14 जुलाई को भारत और चीन के बीच चौथी कोर कमांडर वार्ता हुई थी जिसके बाद सेना की तरफ से कहा गया था कि डिसइंगेजमेंट एक जटिल प्रक्रिया है।

    लगातार हो रहा है वैरीफिकेशन

    लगातार हो रहा है वैरीफिकेशन

    एलएसी पर कई जगहों से चीनी जवानों की संख्‍या में कमी आई है। सूत्रों के मुताबिक चीन की तरफ से हो रहे दावे, हकीकत से एकदम अलग हैं। पेट्रोलिंग प्‍वाइंट (पीपी) 15 जो हॉट स्प्रिंग्‍स के करीब है, यहां पर वैरीफिकेशन में चीनी टेंट्स और कुछ ढांचों के होने की बात सामने आई है। ये चीनी निर्माण एलएसी के करीब दो किलोमीटर अंदर हैं। अखबार ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है, 'चीनी जवानों ने पीपी-15 से चले जाने पर सहमति जताई थी लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वह एलएसी के दो किलोमीटर अंदर मौजूद हैं।' इसी तरह के हालात देपसांग और पैंगोंग त्‍सो में भी हैं। देपसांग में 'बॉटलनेक' के करीब घुसपैठ हुई थी और यह जगह भारत की सीमा के अंदर है।

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