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चीन की मिसाइलों के सामने कम पड़ती दिख रही अमेरिका की भी ताकत, भारत की चिंता बढ़ी

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    नई दिल्ली। अमेरिकी के बाद सैन्य खर्च के मामले में चीन का दूसरा नंबर है। पिछले साल चीन ने अपने सैन्य खर्च में 8.1 प्रतिशत वृद्धि कर 228 बिलियन डॉलर हथियारों पर खर्च किया। साउथ चाइना सी विवाद या प्रशांत महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां, एशिया में बढ़ता अपना प्रभुत्व और अमेरिकी के साथ तनातनी को देखते हुए चीन लगातार अपनी सेना को मजबूत करने में लगा है। चीन ने तो अब जमीन के बाद आसमान में भी अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा दी है। आसमान में तीन दशक तक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का प्रभुत्व था और उस वक्त दुनिया का कोई भी मुल्क इनका सामना नहीं कर पाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और तेजी से बदल रहे हैं।

    चीन की मिसाइलों के सामने कम पड़ती दिख रही अमेरिका की ताकत

    ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट कहती है कि चीन ने पिछले कुछ सालों में अपने एयरोस्पेस इंडस्ट्री में जबरदस्त प्रोग्रेस किया है। खासकर एयरक्राफ्ट से एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम ने तो पूरे ग्लोबल आर्म्स ट्रेड और वेस्टर्न एयरफोर्स का तो पूरा खेल ही बदल डाला है। चीन की सैन्य ताकत अगर किसी को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है, तो वो भारत है। क्योंकि भारत मिलिट्री स्पेंडिंग और टेक्नोलॉजी के मामले में चीन के सामने कहीं नहीं टिकता।

    डिफेंस खर्च के मामले में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट की मानें तो 2017 में भारत ने डिफेंस के क्षेत्र में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि कर 63.9 बिलियन डॉलर खर्च किए। मिलिट्री स्पेंडिंग में भारत भले ही टॉप 5 देशों में शामिल हैं, लेकिन चीन से तुलना करना बिल्कुल जायज नहीं है। चीन आज अपनी मिलट्री पर भारत से 3.6 गुना ज्यादा खर्च कर रहा है।

    हालांकि, दुनिया में अमेरिकी वायुसेना का कोई जवाब नहीं है, जो सबसे मजबूती से आकाश में अपना राज होने का दावा करती है। लेकिन, इस बीच शी जिनपिंग ने अपने महत्वकांक्षी लक्ष्य रोबोटिक्स और एयरक्राफ्ट इंटेलिजेंस जैसे एडवांस इंडस्ट्री लेकर साउथ चाइना सी में अपने विस्तार को लगातार बढ़ाया है। चीन ने इस विवादित क्षेत्र में मार्च में अब तक की सबसे बड़ी मिलिट्री परेड को उतारकर पूरी दुनिया के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस दौरान साउथ चाइना सी के हाइनान प्रांत में 40 से अधिक जंगी जहाजों को देखा गया।

    चीन ने जब पहली बार PL-15 एयरक्राफ्ट को लॉन्च किया तब तत्कालीन यूएस एयरफोर्स कॉम्बेट कमांड चीफ हेर्बर्ट हॉक कार्लिस्ले ने कांग्रेस में चिंता व्यक्त की थी। चीन की यह मिसाइल हवा से हवा में अटैक करने वाली बहुत ही चुस्त और फुर्तीली है, जो 70 से 100 किमी तक दुश्मन के टारगेट को नेस्तनाबूद करने की ताकत रखती है। फिर चीन की एक और एयर-टू-एयर मिसाइल PL-XX, जो धीमी गति से चलने वाली एयरबोर्न चेतावनी और कंट्रोल सिस्टम है। चीन की नई बेस्ट PL-10 मिसाइल 'फायर एंड फोर्गेट', जो किसी भी हवा में आ रही किसी भी मिसाइल को खत्म कर देगी।

    अब भारत के लिए चिंता का विषय चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से ज्यादा बीजिंग से होकर पाकिस्तान तक हथियार पहुंचना है। चीन के नए एयरक्राफ्ट, एयर-टू-एयर, क्रूज, एंटी-शिप और रूस के S-400 एयर-डिफेंस सिस्टम (जिसे दुनिया का सबसे बेस्ट एयरक्राफ्ट माना जा रहा है) ने अमेरिका ने प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में बहुत अधिक जोखिम में काम करने की ताकत को बढ़ाई है।

    तेजी से हो रहा ये यह बदलाव ना सिर्फ अमेरिका को चिंता में डाल रहा है, बल्कि भारत ने भी बीजिंग की आपूर्ति पर पूरी तरह से नजर रख रहा है। चीन को रूस हथियार दे रहा है और पाकिस्तान चीन से हथियार ले रहा है। यह ट्रायंगल वेपन एक्सपोर्ट-इंपोर्ट सिस्टम एशिया में भारत को हैरान कर रहा है।

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    English summary
    Chinese Missiles Are Transforming the Balance of Power in the Skies

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