आतंकवाद और एनएसजी के मुद्दे पर चीन का दोहरा रवैया आया सामने
नई दिल्ली। चीन ने एक बार फिर आतंकवाद पर अपना दोहरा रवैया सामने लाकर रख दिया है। अगले हफ्ते से गोवा में आंठवें ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे। उनके आने से पहले ही चीन ने इस तरफ इशारा कर दिया है कि वह न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री के लिए तो विरोध करेगा। वहीं चीन एक बार फिर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर इंटरनेशनल बैन में अड़ंगा डालने को तैयार है।

राजनीतिक लाभ न लें देश
आतंकवाद को लेकर चीन का दोहरा रवैया उसके विदेशी मंत्री के नए बयान से सामने आ गया है। चीन के विदेश मंत्री ली बाओडोंग ने कहा है कि आतंकवाद से लड़ाई के मुद्दे पर किसी को भी राजनीतिक लाभ लेने का कोई हक नहीं है।
बाओडोंग ने चीन की उस नीति का भी समर्थन कर दिया जिसमें चीन ने यूनाइटेड नेशंस में अजहर पर लगे बैन से जुड़ी भारत की एक याचिका को ब्लॉक कर दिया था।
गोवा आएंगे जिनपिंग, होगी मोदी से मुलाकात
ब्रिक्स सम्मेलन में जब राष्ट्रपति जिनपिंग आएंगे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे मुलाकात करेंगे। ब्रिक्स में भारत के अलावा रूस, ब्राजील, चीन और साउथ अफ्रीका शिरकत करेंगे।
भारत ने जनवरी में हुए पठानकोट आतंकी हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद को दोषी ठहराया है। इसके अलावा उरी में आर्मी बेस पर हुए आतंकी हमले के भारत ने जैश और इसके कमांडर मसूद अजहर को दोषी बताया है।
पाक का समर्थन करता चीन
अजहर पर बैन की दो कोशिशों को चीन की वजह से झटका लगा है। भारत जैश-ए-मोहम्मद को यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में अल कायदा या आईएसआईए की तर्ज पर ही ब्लैक लिस्ट करने की अपील कर चुका है।
चीन ने जून में एक ऐसे छोटे से ग्रुप की अगुवाई की थी जिसने भारत की एनएसजी सदस्यता का विरोध किया था। चीन के दोनों ही कदम पाकिस्तान को समर्थन देते हुए नजर आते हैं।
भारत करेगा चीन से अनुरोध
पिछले हफ्ते ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा था कि भारत चीन ने उसके रुख पर दोबारा विचार करने को कहेगा जो पाकिस्तान को फायदा पहुंचाते नजर आ रहे हैं।












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