'तो तबाह हो जाएंगे 'विक्रम' और 'प्रज्ञान' : अब चंद्रयान-3 को किससे है खतरा? इसरो चीफ ने बताया
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ ने बताया है कि अभी चांद पर चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर दोनों अपना काम बखूबी कर रहे हैं और उनकी गतिविधियां आगे भी जारी रहेंगी। लेकिन, उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि इनके सामने अभी गंभीर चुनौतियां बरकरार हैं, जिनका उन्हें सामना करना पड़ सकता है।
इसरो चीफ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया है कि 'लैंडर और रोवर पूरी तरह से ठीक हैं और सबकुछ ठीक से चल रहा है। आगे भी गतिविधियां जारी रहेंगी।' लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने उन चुनौतियों के बारे में बताया है जो लैंडर और रोवर को पूरी तरह तबाह भी कर सकते हैं।

'कहीं से भी टकरा सकते हैं पिण्ड'
एस सोमनाथ ने कहा है, 'चंद्रमा पर वायुमंडल की गैर-मौजूदगी की वजह से पिण्ड कहीं से भी टकरा सकते हैं। इसके साथ ही थर्मल इश्यू और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट की समस्या है।' इस वजह से उन्होंने आगे जिस तरह की चुनौतियों के बारे में बताया है, वह बहुत ही खतरनाक है।
चांद पर चंद्रयान-3 का दुश्मन कौन?
इसरो प्रमुख ने कहा, 'अगर कोई क्षुद्रग्रह या अन्य पिण्ड बहुत ही ज्यादा वेग से टकराता है, तो लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) दोनों तबाह हो जाएंगे। आप चंद्रमा की सतह को देख सकते हैं। यह अंतरिक्ष के पिण्डों के टकराने वाले निशानों से भरे पड़े हैं। पृथ्वी पर भी हर घंटे लाखों अंतरिक्ष पिण्ड आते हैं, लेकिन हमें नहीं पता चलता, क्योंकि हमारा वायुमंडल उन सबको जला देता है।'
'चांद पर चहलकदमी कर रहा है रोवर'
इससे पहले इसरो ने जानकारी दी थी कि प्रज्ञान रोवर लैंडर विक्रम से रैंप के माध्यम से सतह पर उतरकर 'चांद पर चहलकदमी कर रहा है।' इसरो चीफ ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया था, 'प्रज्ञान रोवर में दो उपकरण हैं, दोनों चांद की मौलिक संरचना के साथ-साथ साथ इसकी रासायनिक संरचनाओं की जानकारी जुटाने के लिए हैं। यह चंद्रमा की सतह पर चक्कर भी लगाएगा। हम एक रोबोटिक पाथ प्लानिंग एक्सरसाइज भी करेंगे, जो भविष्य में गहरे अंतरिक्ष में खोज अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।'
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बुधवार को भारत दुनिया का पहला देश बना, जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना लैंडर उतारा। इसके बारे में सोमनाथ ने बताया था, 'यह सिर्फ इसरो के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। प्रत्येक भारतीय की तरह हमें भी इस बात पर गर्व है कि इस बार हमारी लैंडिंग सफल रही। इतने वर्षों से जो कड़ी मेहनत की जा रही थी,उसका परिणाम आया है। हम और ज्यादा चुनौतीपूर्ण कार्यों का इंतजार कर रहे हैं।'
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