नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपोते ने PM मोदी को लिखा पत्र, 23 जनवरी से पहले जापान से 'अवशेष' लाने की अपील

महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में पीएम मोदी से उन्होंने जापान के रेंकोजी मंदिर से नेताजी के अवशेषों को भारत वापस लाने में तेजी लाने का आग्रह किया है। उन्हें उम्मीद है कि अगले साल 23 जनवरी को नेताजी की जयंती से पहले यह काम पूरा हो जाएगा।

चंद्र कुमार बोस ने कहा कि जापान में अभी भी अवशेषों का होना "बहुत बड़ा अपमान" है। चंद्र बोस ने पीएम मोदी से पहले भी इसी तरह के अनुरोध किए हैं,जिनमें से सबसे हालिया अनुरोध 17 अगस्त को किया गया था। उन्होंने दिल्ली में नेताजी के सम्मान में एक स्मारक बनाने की भी वकालत की।

Chandra Kumar Bose

पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा, "नेताजी स्वतंत्र भारत लौटना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके क्योंकि उन्होंने 18 अगस्त, 1945 को भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।" बता दें, जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने 1956 में आईएनए के अनुभवी जनरल शाह नवाज खान के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की।

इस समिति ने ताइवान में दुर्घटना और उसके कुछ घंटों बाद नेताजी की मृत्यु के ग्यारह प्रत्यक्ष गवाहों से विस्तृत विवरण एकत्र किए। इन गवाहों में साथी यात्री, जापानी सैन्यकर्मी और चिकित्सा कर्मचारी शामिल थे। हालांकि, 2005 में न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग द्वारा की गई जांच ने निष्कर्ष निकाला कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में नहीं हुई थी।

यह रिपोर्ट मौलिक त्रुटियों पर आधारित थी और भारत सरकार ने इसे खारिज कर दिया था। चंद्र बोस ने नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने के लिए मौजूदा सरकार की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के मुक्तिदाता के बारे में झूठी कहानियों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से अंतिम बयान आवश्यक है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 23 जनवरी तक नेताजी के अवशेषों को वापस लाना और दिल्ली में कर्तव्य पथ पर उनका स्मारक बनाना बहुत जरूरी है। उन्होंने अपने पत्र में दोहराया, "यह बहुत जरूरी है कि नेताजी के अवशेष वापस लाए जाएं।" पत्र में पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार के प्रयासों की भी सराहना की गई है।

इसमें नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने जैसे कदमों की भी प्रशंसा की गई है, जिससे 18 अगस्त, 1945 को उनकी मृत्यु के बारे में ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्पष्ट करने में मदद मिली है। चंद्र बोस ने जोर देकर कहा कि विभिन्न स्रोतों से इतनी सारी प्रत्यक्ष रिपोर्टें नेताजी की मौत के बारे में रिपोर्टों को विश्वसनीयता प्रदान करती हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+