राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने की समान नागरिक संहिता की वकालत, कहा- इसे अनदेखा करना गलत
समान नागरिक संहिता पर राजनीति गरमाई हुई है, अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा का बयान सामने आया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा ने समान नागरिक संहिता (UCC) की वकालत की है। उन्होंने कहा कि ये किसी भी धर्म की प्रथा को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि ये महिलाओं के समान अधिकार को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि UCC को लागू करने के लिए सकारात्मक कदम उठाना सरकार का कर्तव्य है।
जस्टिस मिश्रा के मुताबिक यूसीसी को लागू करने का समय आ गया है। इसे संविधान में निर्धारित किया गया है, ऐसे में इसको पूरी तरह से अनदेखा नहीं किया जा सकता। महिलाओं को भेदभाव से बचाने के लिए अधिनियम का क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई तरह की धार्मिक प्रथाओं के नाम पर महिलाओं के साथ भेदभाव हो रहा, जिसको खत्म करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा पुरुषवाद को भी खत्म किया जाएगा। उन्होंने समान नागरिक संहिता के आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि यूसीसी का विरोध करने वाले लोगों के पास कोई तर्क नहीं है, जब भी कोई अच्छी चीज आती है, तो उसका विरोध होता है।
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि संविधान में यूसीसी लागू करने का निर्देश हमेशा से था, सरकार को सिर्फ समय चुनना था। मौजूदा वक्त में महिलाएं अधिकारों के लिए लड़ रही हैं, उन्हें समानता चाहिए। समान आचार संहिता महिलाओं को सम्मान प्रदान करेगा क्योंकि उनको लंबे समय से समानता से वंचित रखा गया।
बीजेपी सांसद ने पेश किया बिल
बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने 9 नवंबर को राज्यसभा में समान नागरिक संहिता पर निजी सदस्य बिल पेश किया। जिसका कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और डीएमके समेत तमाम विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। अगर ये कानून लागू होता है तो सभी नागरिकों पर ये समान रूप से लागू होगा। इससे किसी धर्म, जाति, लंग को रियायत नहीं मिलेगी। विपक्ष का आरोप है कि एक धर्म को निशान साधने के लिए सरकार ये कानून ला रही।












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