PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर उठे सवाल, वित्त मंत्रालय ने दी सफाई
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के उस अंश पर स्पष्टीकरण जारी किया है जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या का जिक्र किया था। दरअसल, स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से भाषण देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि नोटबंदी की वजह से इस साल 1 अप्रैल से 5 अगस्त के बीच 56 लाख नए लोगों ने कर जमा किए हैं जबकि पिछले साल यह आकंडा महज 22 लाख था।

पीएम मोदी के इस भाषण पर सरकार की ही अलग-अलग रिपोर्टों का हवाला देते हुए लोगों ने सवाल खड़े किए। इन रिपोर्टों में करदाताओं की अलग अलग संख्या का जिक्र किया गया था। जैसे 12 अगस्त को जारी आर्थिक सर्वे वाल्यूम 2 में कहा गया था कि 5.4 लाख नए करदाता जुडे़ हैं। जबकि 17 मई को वित्त मंत्रालय के जारी आकंडे में कहा गया था कि आयकर विभाग की कड़ी कार्रवाईयों के चलते नोटबंदी के बाद 91 लाख नए करदाता बने हैं। वहीं 1 अगस्त को राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने कहा था कि नोटबंदी के बाद 33 लाख नए करदाता जुडे़ हैं।
इन सभी रिपोर्टों का हवाला देते हुए लोग सरकार से सवाल पूछ रहे थे कि आखिर इन आकंड़ों की क्या सच्चाई है? हर विभाग अलग अलग आकंडें क्यों जारी कर रहा है? वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि यह सभी आकंडे सही है। वित्त मंत्रालय ने अलग-अलग आंकडे पेश किए जाने के लिए ये वजहें गिनाई-
- मंत्रालय ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में 1 अप्रैल से 5 अगस्त तक फाइल किए गए आयकर रिटर्न का जिक्र किया था। आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 अगस्त 2017 से 5 अगस्त 2017 तक 2.79 करोड़ लोगों ने आय़कर रिटर्न फाइल किया जबकि इसकी तुलना में 1 अप्रैल 2016 से 5 अगस्त 2016 तक 2.23 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न फाइल किया था। इस प्रकार इस अवधि तक इस साल 56 लाख नए लोग करदाता बने हैं।
- आर्थिक सर्वे के आकंडे पर मंत्रालय ने कहा कि इस सर्वे में आयकरक रिटर्न की जगह दूसरे आंकड़ों को आधार बनाया गया है जिसके बारे में सर्वे में विस्तृत जानकारी दी गई है। यह आकंडा 9 नवंबर से 31 मार्च 2016-17 और इसके मुकाबले पिछले दो साल के नए करदातों के ग्रोथ रेट पर आधारित है।
-वित्त मंत्रालय द्वारा जारी 91 लाख के आकंडे पर मंत्रालय ने कहा कि यह आकंडा 2016-17 के पूरे वित्त वर्ष में दाखिल रिटर्न पर आधारित है जिसकी पीएम मोदी के भाषण में जिक्र किए आकंडों से कोई संबंध नहीं हैं।












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