पहली बार LaC पर बनेगी बॉर्डर इंटेलिजेंस पोस्ट, चीनी सेना की हर चालकी पर रहेगी पैनी नजर
Border Intelligence Posts: एक तरफ जहां पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर वायुसेना और थल सेना को मजबूत करने के लिए 150 से ज्यादा और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' खरीदने की तैयारी चल रही है। इसी कड़ी में अब मोदी सरकार खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए चीन सीमा (LAC) के पास खुफिया चौकियां स्थापित करेगी।
केंद्र ने पहली बार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पार अपने सैन्य और हथियारों के निर्माण सहित चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारत-चीन सीमा पर बॉर्डर इंटेलिजेंस पोस्ट (बीआईपी) को मंजूरी दी है।

चीन की चालाकी को रोकना मकसद
मामले के जानकारों ने बताया कि बीआईपी का मकसद अतिक्रमण और घुसपैठ के जरिए यथास्थिति को बदलने के प्रयास को रोकना भी है। बीआईपी में सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ मिलकर इस काम को अंजाम देंगे। इन्हें राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO), इंटेलिजेंस ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसी एंजेसिंयों से भी सहयोग मिलेगा।
नाम नहीं बताना की शर्त पर एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, "प्रत्येक बीआईपी, जिसे आईटीबीपी की सीमा चौकियों (बीओपी) के साथ बनाया जाएगा में विशिष्ट कर्तव्यों के साथ 4-5 खुफिया अधिकारी होंगे। वे किसी भी असामान्य गतिविधि के संबंध में सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे।"
मौजूदा वक्त में लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक भारत-चीन सीमा पर आईटीबीपी की 180 से अधिक बीओपी हैं। सरकार ने इस साल की शुरुआत में एलएसी पर 47 अतिरिक्त सीमा चौकियों और सीमा सुरक्षा बल के 12 स्टेजिंग शिविरों को भी मंजूरी दी थी, जिन्हें "हिमवीर" भी कहा जाता है। जिसके लिए 9,400 कर्मियों (या सात बटालियन) को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।
हालांकि शीर्ष अधिकारी ने बीआईपी की सटीक संख्या और केंद्र द्वारा इसके लिए अनुमोदित बजट का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सभी संवेदनशील बीओपी में ये विशेष रूप से प्रशिक्षित खुफिया अधिकारी होंगे, जिनके पास लेटेस्ट सर्विलांस टूल्स तक पहुंच होगी।
बता दें कि यह घटनाक्रम चीन द्वारा एलएसी पर अपनी ताकत दिखाने, नियमित घुसपैठ के प्रयासों के माध्यम से भारत को उकसाने और सीमा के दूसरी ओर हवाई क्षेत्रों और मिसाइल साइटों जैसे सैन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए दबाव डालने के मद्देनजर आया है।
याद हो कि जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से दोनों पक्ष एलएसी पर कई बिंदुओं पर आमने-सामने हैं। पिछले साल 9 दिसंबर को पीएलए सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश के यांगस्टे में भी घुसपैठ की थी, जिसके बाद झड़प हुई थी और दोनों पक्षों के सैनिक घायल हुए थे।












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