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केंद्र सरकार की पहल ने उत्तराखंड में शिक्षा को दिया नया रंग, यूं उज्ज्वल हो रहा बच्चों का भविष्य

हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा कई कारणों से प्रसिद्ध है। यहां की राजधानी देहरादून को 'स्कूल कैपिटल ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है। केंद्र सरकार की पहल ने लगातार उत्तराखंड में शिक्षा को नया रंग दिया है। छात्रों के भविष्य को नए आयामों तक पहुंचाया है। यहां देश की कई नामी गिरामी हस्तियों ने शिक्षा हासिल की।

1984 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की बछेंद्री पाल, माउंट एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बनीं।उत्तराखंड राज्य का पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए भी मशहूर है। यहां के लोग ज्यादातर गढ़वाली और कुमाउनी भाषा बोलते हैं। इसके अलावा यहां हिंदी, पंजाबी और नेपाली भाषा भी बोली जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां कि दूसरी राज्य भाषा यानी औपचारिक भाषा संस्कृत है।

Central Government

पौड़ी गढ़वाल स्थित रघुनाथ कीर्ति कैंपस में संस्कृत भाषा में छात्र अध्ययन करते रहे हैं। इस परिसर की स्थापना 16 जून 2016 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक संसदीय अधिनियम के अंतर्गत देवप्रयाग में, दो महत्वपूर्ण नदियों, भागीरथी और अलकनंदा के संगम के पास की गई थी। यहां छात्रों को प्राक शास्त्री, आचार्य की पढ़ाई और पीएचडी के लिए तैयारी कराई जाती है। दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, कंप्यूटर, शारीरिक शिक्षा जैसे आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा इस परिसर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, वर्कशॉप और लेक्चर्स भी आयोजित किए जाते हैं। यहां आपको विदेशी विद्यार्थी भी अध्ययन करते नजर आएंगे।

PM SHRI स्कूल शुरू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य

हम जानते हैं कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बदलते जमाने के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए केंद्र सरकार की एनईपी 2020 पॉलिसी, भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस पहल के अंतर्गत, देश के चुने हुए मौजूदा 14500 स्कूलों को पीएम श्री स्कूल यानी स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया के मुताबिक, पुनर्विकसित करने की योजना है। जिससे आने वाली पीढ़ियां चीजों को आलोचनात्मक तरह से देख पाए, उनकी सोच बाधित न होकर खुली हो और वो समस्याओं का समाधान आसानी से कर पाएं। उन्हें कुछ नया सीखने या करने में डर न लगे बल्कि वो परिवर्तन के लिए हमेशा तैयार रहें।इन स्कूलों में नए तरह के लैब्स, पुस्तकालय और आर्ट रूम की सुविधा है। साथ ही इन स्कूलों को ग्रीन स्कूल के तर्ज पर विकसित किया गया है जहां बच्चों को जल संरक्षण, अपशिष्ट पुनर्चक्रण, ऊर्जा दक्षता की महत्वता को समझाते हुए उन्हें जैविक जीवन शैली को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। उत्तराखंड देश में पीएम श्री स्कूल शुरू करने वाला पहला राज्य है, जहां शुरुआत में 141 स्कूलों को स्थापित करने की योजना है।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय
उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और रूद्रप्रयाग जिलों के आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय स्थापित किए हैं। पढ़ाई-लिखाई के अलावा, ये स्कूल बच्चों के खाने-पीने, रहन-सहन, सेहत और विकास का पूरा ध्यान रखते हैं।

देश के संविधान के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार, हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। इसलिए देश के हर बच्चे को शिक्षित करने के लिए केंद्र सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है। शिक्षा वो साधन है, जो उज्जवल भविष्य की संरचना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चे हमारा भविष्य हैं और पढ़े लिखे बच्चों से ही देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

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