सुप्रीम कोर्ट को भी राफेल की कीमत नहीं बताएगी मोदी सरकार- सूत्र
नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर जिस तरह से विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू किया उसके बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह राफेल जेट्स की कीमत की बंद लिफाफे में कोर्ट को जानकारी दे। कोर्ट ने 10 दिन के भीतर सरकार से इस जानकारी को देने को कहा था। लेकिन सूत्रों की मानें तो सरकार कीमत की जानकारी देने की बजाए एक शपथपत्र दाखिल करेगी जिसमे वह कीमत की जानकारी देने में असमर्थता जाहिर कर सकती है। सरकार हथियारों की गोपनीयता का हवाला देते हुए इसकी कीमत कोर्ट से नहीं साझा करने का शपथ पत्र दे सकती है।

क्या कहा सीजेआई ने
सूत्रों की मानें तो संसद को पूरी तरह से हथियारों से लैस राफेल जेट की कीमत की जानकारी नहीं दी गई है। सरकार के महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कोर्ट भी कोर्ट में इसी बात को आगे बढ़ाया। जिसपर इस मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि केंद्र सरकार को बंद लिफाफे में जेट की कीमत बताने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि सरकार ने संसद में पहले ही इसकी जानकारी दे दी है। वहीं सूत्रों की मानें तो संसद के भीतर सरकार की ओर से जो कीमत साझा की गई है वह सिर्फ जेट की ना कि उसमे लगे हथियार की।

आरोप-प्रत्यारोप जारी
राफेल डील को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को निशाना बना रहा है कि और आरोप लगा रहा है कि यूपीए की तुलना में मौजूदा सरकार राफेल की कहीं अधिक कीमत अदा कर रही है। लेकिन सरकार विपक्ष के आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर रही है कि सिर्फ राफेल की कीमत यूपीए की तुलना में कम है, लेकिन उसमे लगे हथियार की वजह से इसकी कीमत में इजाफा हुआ है। इसके अलावा जिस तरह से राफेल डील को रिलायंस को दिया गया है उसको लेकर भी विपक्ष सरकार को घेर रहा है।

प्रक्रिया की जानकारी मांगी
गौर करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से ना सिर्फ राफेल की कीमत की जानकारी मांगी है बल्कि इस डील की पूरी प्रक्रिया की भी जानकारी मांगी है कि आखिर कैसे 36 राफेल फाइटर जेट की डील हुई है। सूत्र की मानें तो कोर्ट की तरफ से यह साफ किया गया है कि सरकार के द्वारा दी जाने वाली जानकारी सिर्फ जजों के पास रहेगी और इसे याचिकाकर्ताओं और मामले से जुड़े अन्य पक्षकारों के साथ साझा नहीं किया जाएगा। दरअसल सरकार का तर्क है कि राफेल से जुड़ी गोपनीय जानकारी और तकनीकी जानकारी लीक हो सकती है, यही वजह कि सरकार इसकी गोपनीयता पर अड़ी हुई है। यही नहीं जैसे ही जेट की कीमत की जानकारी लीक होगी, दुश्मन देश इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि इस जेट में कौन से हथियार लगे हैं और किस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

सीबीआई को अपना घर ठीक करने दें
राफेल मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट में जब याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए कहा तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, जांच एजेंसी के अपने 'घर की स्थिति' ठीक कर लेने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है। ये बात चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने सीनियर वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर कही।
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