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मुंबई दंगे में एक मुस्लिम परिवार ने बचाई थी शेफ विकास खन्ना की जान, 26 साल से रखते हैं रोजा

सेलेब्रिटी शेफ विकास खन्ना आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। देश-दुनिया में उनकी लाखों चाहने वाले हैं। अमृतसर के सिख परिवार में जन्में विकास के लिए रमजान का ये पाक महीना काफी खास है। वो पिछले कई सालों से रमजान के महीने में एक दिन का रोजा रखते हैं।

Vikas Khanna

नई दिल्ली। सेलेब्रिटी शेफ विकास खन्ना आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। देश-दुनिया में उनकी लाखों चाहने वाले हैं। अमृतसर के सिख परिवार में जन्में विकास के लिए रमजान का ये पाक महीना काफी खास है। वो पिछले कई सालों से रमजान के महीने में एक दिन का रोजा रखते हैं। ये रोजा वो उस मुस्लिम परिवार को सम्मान देने के लिए करते हैं, जिसने मुश्किल हालातों में उनकी जान बचाई।

खन्ना को वापस मिला खोया हुआ परिवार

खन्ना को वापस मिला खोया हुआ परिवार

शेफ विकास खन्ना पिछले कई सालों से रमजान के महीने में एक दिन का रोजा रखते आ रहे हैं। ऐसा वो उस परिवार को सम्मान देने के लिए करते हैं, जिन्होंने 1992 में मुंबई में हुए दंगों में उनकी जान बचाई थी। विकास खन्ना ने उस परिवार से अपना संपर्क तो खो दिया था, लेकिन अपनी दुआओं में उन्हें हमेशा याद रखा। आज उस घटना के पूरे 26 साल बाद उन्हें अपना वो खोया हुआ परिवार वापस मिल गया है। विकास खन्ना ने इस बात की जानकारी खुद सोशल मीडिया के जरिये दी।

ट्विटर पर जाहिर की खुशी

ट्विटर पर जाहिर की खुशी

विकास खन्ना ने ट्विटर पर लिखा, 'ये मेरी जिंदगी के सबसे खुशी के दिनों में से एक है। अनुपम खेर जी ने पिछले साल मेरा इंटरव्यू लिया था, जिसमें मैंने उस मुस्लिम परिवार का जिक्र किया था जिसमें दंगों के दौरान मेरी जान बचाई।' खन्ना ने आगे लिखा, 'आज मुझे वो परिवार वापस मिल गया और मैं अपना रोजा उन्हीं के साथ खोलूंगा।'

मुंबई हमलों में इस परिवार ने बचाई थी शेफ की जान

मुंबई हमलों में इस परिवार ने बचाई थी शेफ की जान

विकास खन्ना ने तीन साल पहले इस घटना का जिक्र भी किया था। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा था, 'मैं 1992 में मुंबई के सीरॉक शेरटन में ट्रेनिंग ले रहा था जब शहर में दंगे भड़क उठे थे। हम कई दिनों तक होटल में बंद रहे। इकबाल खान और वसीम भाई और उनके परिवार ने मुझे पनाह दी और कई दिनों तक मेरी देखभाल की।' शेफ ने आगे लिखा कि तब से उन्हें सम्मान देने किए वो रोजा रख रहे हैं। 'मेरा उनसे संपर्क हमेशा के लिए टूट गया। इसलिए उसी साल से मैं रमजान के पाक महीने में उन्हें अपनी दुआओं में रखने के लिए एक दिन का रोजा रखता हूं।'

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