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सीमेंट कंपनियां–आदित्य बिड़ला की अल्ट्राटेक व डालमिया भारत–कार्टेल बनाने के आरोप में CCI की जांच के दायरे में

देश की प्रतिस्पर्धा व्यवस्था को धता बताकर दाम बढ़ाने और टेंडर में मिलीभगत करने वाली सीमेंट कंपनियों की अब खैर नहीं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने एक बार फिर बाज़ार में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए देश की कुछ नामी सीमेंट कंपनियों पर जांच की आंच तेज कर दी है।

इस बार निशाने पर हैं आदित्‍य ब‍िरला की अल्ट्राटेक सीमेंट, जो हाल ही में इंडिया सीमेंट्स का प्रमोटर बना है। डालमिया भारत सीमेंट और श्री दिग्विजय सीमेंट। इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से भी व्यक्तिगत आय और वित्तीय दस्तावेजों की मांग की गई है।

Cement Cartelisation in India

यह कार्रवाई ONGC की शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें आरोप था कि कुछ कंपनियों ने एक बिचौलिए के ज़रिए टेंडरों में अनुचित सांठगांठ की।

क्या मांगा गया है कंपनियों से?

  • अल्ट्राटेक और इंडिया सीमेंट्स को 2015-2019 के वित्तीय दस्तावेज देने होंगे।
  • डॉल्मिया भारत और श्री दिग्विजय सीमेंट से 2011-2019 तक के ऑडिटेड अकाउंट मांगे गए हैं।
  • अधिकारियों को आयकर रिटर्न समेत पांच साल की वित्तीय जानकारी देनी होगी।
  • कथित अनुचित बिक्री से हुई आय का भी पूरा ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है।
  • यदि तय समय में पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई, तो प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 45 के तहत कड़ी सज़ा का प्रावधान है।
    CCI Crackdown on Cement Cartelisation

इससे पहले भी कई बार कसा गया है शिकंजा

CCI इससे पहले भी बड़े उद्योग समूहों पर कार्रवाई कर चुकी है:

2012 और 2016 में सीमेंट कंपनियों पर ₹6,300 करोड़ से ज़्यादा का जुर्माना लगाया गया था। इन पर कीमत तय करने और उत्पादन घटाने की साज़िश का आरोप साबित हुआ था।
2022 में गूगल पर ₹1,337 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के ज़रिए बाज़ार में दबदबा बनाकर उपभोक्ताओं को विकल्प से वंचित करने का मामला था।
रेलवे की टेंडरिंग प्रक्रिया में बोली मिलाने वाले गिरोह पर भी कार्रवाई की गई थी।

CCI Crackdown on Cement Cartelisation

क्यों जरूरी है ऐसी कार्रवाई?

भारत जैसे विशाल और विविध देश में अगर प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष न हो तो नुक़सान सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि आम जनता का भी होता है। मनमाने दाम उपभोक्ताओं की जेब पर भार डालते हैं। कई कंपनियों और स्टार्टअप को अवसर नहीं मिल पाता। बाजार में निवेशकों का भरोसा डगमगाता है।

CCI Crackdown on Cement Cartelisation

CCI की इस ताजा कार्रवाई से स्पष्ट है कि भारत अब ऐसे कारोबारी माहौल की ओर बढ़ रहा है, जहां गठजोड़, सांठगांठ और दबदबा अब ज्यादा दिन नहीं चल पाएंगे। पारदर्शिता और जवाबदेही से ही देश की अर्थव्यवस्था स्थायी विकास की ओर बढ़ेगी।

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