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असम के मवेशियों में इस अजीबोगरीब बीमारी से मचा हड़कंप, जानिए इंसानों को है कितना खतरा

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस संकट के बीच अब जानवरों में भी एक अजीबोगरीब बीमारी से लोगों में भय का माहौल है। हाल ही में अफ्रीकी स्वाइन फीवर से संक्रमित 17,000 सुअरों के मारे जाने के बाद अब असम के पालतू जानवरों में त्वचा त्वचा में गांठ की बीमारी लुम्पी त्वचा रोग (एलएसडी) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य सरकार ने एलएसडी को लेकर एक एडवाइजरी भी जारी की है। इसके लक्षण में गांठें, सूजन, गर्भपात, बांझपन, मुंह में घाव और मवेशियों की मौत भी शामिल है।

मवेशियों को हो रही ये बीमारी

मवेशियों को हो रही ये बीमारी

गौरतलब है कि देश-दुनिया में फैले कोरोना वायरस से अब तक 2.40 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। विश्व इस अदृश्य महामारी से लड़ने का प्रयास कर रहा है लेकिन इस बीच जानवरों में भी फैल रही एक बीमारी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बीते दिनों मेघालय के चार जिलों के 12 गांवों में अफ्रीकी स्वाइन बुखार- एएसएफ फैलने के बाद उन सभी जिलों में जिनमें- पश्चिम जयंतिया हिल्स, वेस्ट खासी हिल्स, ईस्ट खासी हिल्स और री-भोई जिले हैं, सरकार ने उन सभी गांवों को कन्‍टेनमेंट जोन घोषि‍त किया है, जहां सूअर पाले जाते हैं।

लुम्पी त्वचा रोग को लेकर एडवाइजरी जारी

लुम्पी त्वचा रोग को लेकर एडवाइजरी जारी

वहीं, अब पालतू मवेशियों में भी त्वचा में गांठ की बीमारी (एलएसडी) के मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। असम के करोड़ों मवेशी लुम्पी त्वचा रोग (LSD) से संक्रमित हो गए हैं। विदेशी बीमारी के प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने पशु चिकित्सकों, पशुचिकित्सा संस्थानों और पशुपालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी जिला प्राधिकारियों को एक एडवाइजरी जारी की है।

इन जिलों में देखा गया संक्रमण

इन जिलों में देखा गया संक्रमण

एडवाइजरी में सभी संस्थानों को इन मामलों को प्राथमिकता देते हुए जांच करने और लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एलएसडी के मामले सबसे पहले जून के आखिरी हिस्से में दर्ज किए गए थे। अब तक, चार जिले जैसे कछार, करीमगंज, और बराक घाटी में हैलाकांडी और ब्रह्मपुत्र घाटी में कामरूप प्रभावित हैं।

ये हैं इस बीमारी के लक्षण

ये हैं इस बीमारी के लक्षण

एलएसडी एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक्स जैसे आर्थ्रोपोड वैक्टर द्वारा फैलती है। हालांकि यह बीमारी यह मवेशियों से इंसानों में नहीं फैल सकती। इस बीमारी में मवेशियों के पूरे शरीर में त्वचा पर कठोर, गोल त्वचीय नोड्यूल (व्यास में दो-पांच सेमी) की गांठे बन जाती हैं। इसके बाद दो-तीन दिनों तक हल्के बुखार भी रहने की संभावना है। फर्म, गोल, उठे हुए, और त्वचा, चमड़े के नीचे के ऊतक और कभी-कभी, मांसपेशियों पर ये नोड्यूल देखे जा सकते हैं।

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