शहीद कैप्टेन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र सम्मान, सियाचिन ग्लेशियर में जवानों को बचाने में गई थी जान
Republic Day 2024: उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले अमर शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह को आज, गणतंत्र दिवस के मौके पर मरणोपरांत 'कीर्ति चक्र' से सम्मानित किया गया। कीर्ति चक्र भारत का शांति के समय दिया जाने वाल द्वितीय सर्वोच्च वीरता का पदक है।
यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। 'कीर्ति चक्र' मरणोपरांत कैप्टन अंशुमान के परिवार को दिया गया। कैप्टन अंशुमान सिंह देवरिया जिले के प्रथम शहीद है जिन्हें यह वीरता पुरस्कार मिला है।

दूसरों को बचाने में खुद आग में झुलसे
आर्मी मेडिकल कोर, 26वीं बटालियन पंजाब रेजिमेंट के डॉक्टर कैप्टन अंशुमान सिंह, सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में तैनात थे। 19 जुलाई, 2023 को अचनाक वहां आग लग गई। इस आग में उन्होंने एक बंकर को जलता देखा तो लोगों को बचाने में जुट गए। उन्होंने 4-5 व्यक्तियों को बचाने में मदद की।
घायलों को जरुरी चिकित्सा सहायता देने के लिए वो क्रिटिकल एड बॉक्स लाने के लिए चिकित्सा जांच कक्ष के अंदर गए, जहां आग लगी हुई थी। तेज हवाओं के बीच भारी आग के कारण वह रूम से बाहर नहीं निकल सके। आग में बुरी तरह झुलसे कैप्टेन सिंह को हेलिकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
यह भी देखें: Gallantry Awards: राष्ट्रपति मुर्मू ने 80 वीरता पुरस्कारों को दी मंजूरी, जानें किसे और कौनसा मिलेगा सम्मान?
मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित
आग और तेज हवाओं के बीच कैप्टन सिंह ने कर्तव्य पथ पर सर्वोच्च बलिदान दिया। कैप्टन सिंह एक अनुभवी सूबेदार के बेटे और एएफएमसी के पूर्व छात्र थे। कैप्टन अंशुमान सिंह की शादी मात्र कुछ माह पहले ही हुई थी। इस दुर्घटना से परिवार पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा था।
मरणोपरांत कैप्टन अंशुमान सिंह को उनकी वीरता और शहादत के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। कैप्टन सिंह उन 80 सशस्त्र बल कर्मियों में से एक थे जिन्हें 75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वीरता पदक से सम्मानित किया गया।
यह भी देखें: 2030 तक फ्रांस में 30 हजार भारतीय छात्र... फ्रांसीसी राष्ट्रपति का ऐलान, कनाडा को औकात दिखाने वाला प्लान जानिए
कीर्ति चक्र
कीर्ति चक्र, अशोक चक्र के बाद शांतिकाल के वीरता पुरस्कारों में दूसरे स्थान पर है और युद्ध के मैदान से दूर वीरता, साहसी कार्रवाई या आत्म-बलिदान की मान्यता में दिया जाता है। यह मरणोपरांत पुरस्कारों सहित नागरिकों के साथ-साथ सैन्य कर्मियों को भी प्रदान किया जा सकता है।
यह भी देखें: Republic Day 2024: कब फहराया जाएगा राष्ट्रीय ध्वज, परेड का समय, कौन होंगे चीफ गेस्ट, जानें हर जानकारी
-
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच लगातार गिर रहे सोने के भाव, अब 10 ग्राम की इतनी रह गई है कीमत, नए रेट -
Aaj Ka Chandi ka Bhav: अमेरिका-ईरान जंग के बीच चांदी धड़ाम! ₹38,000 सस्ती, आपके शहर का लेटेस्ट Silver Rate -
शुरू होने से पहले ही बंद होगा IPL? कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, BCCI की उड़ गई नींद -
'वो मर्द शादीशुदा था, मैं उसके प्यार में पागल थी', फिर मिला ऐसा दर्द, 83 की उम्र में कुंवारी हैं ये एक्ट्रेस -
UGC के नए नियमों पर आज फैसले की घड़ी! केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी सफाई -
PNG Connection: गैस संकट के बीच सबसे बड़ी गुड न्यूज! सिर्फ 24 घंटे में खत्म होगी किल्लत, सरकार ने उठाया ये कदम -
Kangana Ranaut: 'कंगना-चखना सब चटनी है', मंडी सांसद पर भड़के ये दिग्गज नेता, कहा-'पर्सनल कमेंट पड़ेगा भारी' -
Iran US War: 'खुद भी डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे', ट्रंप पर भड़के बक्शी, कहा- Trump ने जनता से झूठ बोला -
LPG Update: कितने दिन का बचा है गैस सिलेंडर का स्टॉक? LPG और PNG कनेक्शन पर अब आया मोदी सरकार का बड़ा बयान -
Gujarat UCC: मुस्लिम महिलाओं को हलाला से आजादी, दूसरी शादी पर 7 साल जेल! लिव-इन तक पर सख्त नियम, 5 बड़े फैसले -
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट -
Mamta Kulkarni: क्या साध्वी बनने का नाटक कर रही थीं ममता कुलकर्णी? अब गोवा में कर रहीं ऐसा काम, लोग हुए हैरान












Click it and Unblock the Notifications