2030 तक फ्रांस में 30 हजार भारतीय छात्र... फ्रांसीसी राष्ट्रपति का ऐलान, कनाडा को औकात दिखाने वाला प्लान जानिए
India-France News: रिपब्लिक डे के मौके पर भारत में चीफ गेस्ट बनकर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारतीय छात्रों के लिए बहुत बड़ी घोषणा की है और फ्रांसीसी राष्ट्रपति की घोषणा से संकेत मिलता है, कि कैसे भारत, कनाडा जैसे खालिस्तानी आतंकियों के समर्थक देशों की तरफ से मुंह मोड़ने की कोशिश कर रहा है।
भारत में 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर चीफ गेस्ट बनकर भारत आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएनल मैक्रों ने फ्रांस जाने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए शुक्रवार को एक "महत्वाकांक्षी" योजना का अनावरण किया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति के ऐलान का मतलब
फ्रांस के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, कि "2030 में फ्रांस में 30,000 भारतीय छात्र। यह एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, लेकिन मैं इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।"
भारतीय छात्रों को लेकर योजना कैसे तैयार की जाएगी, इस पर विस्तार से बताते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा है, कि जो छात्र फ्रेंच नहीं बोलते, उन्हें वहां के विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए माहौल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कक्षाएं स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा, कि "हम फ्रेंच सीखने के लिए नए केंद्रों के साथ एलायंस फ्रैंचाइज़ का नेटवर्क विकसित कर रहे हैं।"
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने लिखा है, कि "हम अंतरराष्ट्रीय कक्षाएं बना रहे हैं जो उन छात्रों को हमारे विश्वविद्यालयों में शामिल होने की अनुमति देगी, जो फ्रेंच नहीं बोलते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, कि "अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है, कि हम फ्रांस में पढ़ने वाले किसी भी पूर्व भारतीय छात्र के लिए वीजा प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाएंगे।"
मैक्रों की भारत यात्रा भारत-फ्रांस संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला वर्ष है और फ्रांसीसी राष्ट्रपति की ये यात्रा उस वक्त हो रही है, जब दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी की 25 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। पिछले साल भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी फ्रांस के बैस्टिल डे परेड में हिस्सा लेने के लिए पेरिस गये थे।
भारत-फ्रांस हैं रणनीतिक साझेदार
भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, जो भारत ने किसी पश्चिमी देश के साथ पहली बार हस्ताक्षरित की है, उसने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों में काफी प्रगति देखी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "साझेदारी रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता की साझा भावना, एक बहु-ध्रुवीय दुनिया की खोज और लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन के लिए एक प्राकृतिक आकर्षण से ताकत, विश्वास और स्थिरता हासिल करती है।"
आपको बता दें, भारत और फ्रांस सिविल न्यूक्लियर, स्पेस के प्रमुख भागीदार होने के साथ साथ अब इंडो-पैसिफिक में भी महत्वपूर्ण भागीदार बन चुके हैं।
भारत और फ्रांस के बीच व्यापक रोडमैप, जिसे पिछले साल जुलाई में बैस्टिल दिवस के सम्मानित अतिथि के रूप में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान अपनाया गया था, उसको तीन स्तंभों के तहत वर्गीकृत किया गया था , और ये तीनों स्तंभ सुरक्षा और संप्रभुता के लिए साझेदारी, प्लानेट के लिए साझेदारी और लोगों के लिए साझेदारी हैं।
कनाडा से मुंह मोड़ रहा भारत!
खालिस्तान विवाद के बीच कनाडा से भारत का अब दिल टूटने लगा है। कनाडा ने पिछले साल के अंत में भारतीय छात्रों को पढ़ाई परमिट जारी करने में भारी गिरावट का रिपोर्ट किया है। माना जा रहा है, कि छात्रों के एप्लीकेशन में आई इस गिरावट की वजह, भारत सरकार की तरफ से कनाडाई राजनयिकों को भारत से निकालना और कनाडा में एक सिख अलगाववादी आतंकवादी की हत्या से संबंधित राजनयिक विवाद है।
इसी महीने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए गये एक इंटरव्यू में कनाडाई आव्रजन मंत्री मार्क मिलर ने अनुमान लगाया है, कि निकट भविष्य में भारतीय छात्रों को अध्ययन परमिट जारी करने की संभावना कम है। विशेष रूप से, जून में कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के उस बयान के बाद, दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया है, जिसमें ब्रिटिश कोलंबिया में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकारी एजेंटों को जोड़ने वाले सबूतों का दावा किया गया था।
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के वर्षों में भारतीयों ने कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा समूह बनाया है, 2022 में पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा 41%, यानि 225,835 परमिट भारतीय छात्रों के लिए कनाडा ने जारी किए गये थे।
कनाडा के लिए अंतर्राष्ट्रीय छात्र हमेशा से दुधारू गाय रहे हैं और कनाडा सरकार को हर साल 22 अरब कनाडाई डॉलर (16.4 अरब अमेरिकी डॉलर) विदेशी छात्रों से मिलते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा भारतीय छात्रों का होता है।
लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारतीय छात्रों की संख्या घटने से कनाडा के राजस्व में हर साल कम से कम 10 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान होगा।
आपको बता दें, कि कनाडा अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य रहा है, क्योंकि पढ़ाई खत्म करने के बाद वर्क परमिट प्राप्त करना कनाडा में काफी आसान रहा है। लेकिन, अब भारत सरकार अलग अलग देशों के साथ संबंधों को विस्तार दे रही है और भारतीय छात्रों के लिए अलग अलग देशों के दरवाजे खोल रही है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जर्मनी और स्पेन जैसे देश शामिल हैं।












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