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क्या चंद्रबाबू नायडू उपराष्ट्रपति चुनाव में कर सकते खेला? सुदर्शन रेड्डी के बयान से मची हलचल, क्या है माजरा

Chandrababu Naidu B. Sudershan Reddy: देश की राजनीति में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर हलचल तेज है। विपक्षी INDIA ब्लॉक की ओर से उम्मीदवार बनाए गए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी ने बड़ा बयान दिया है, जिससे सियासी जगत में हलचल मची है। बी सुदर्शन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को देश का "सबसे कद्दावर नेता" बताया और भरोसा जताया कि वे उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय हित में सही फैसला लेंगे।

नायडू पर विश्वास, लेकिन 'ट्विस्ट एंड टर्न्स' का जिक्र

हालांकि चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP पहले ही एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति चुनाव में समर्थन देने का ऐलान कर चुकी है, फिर भी सुदर्शन रेड्डी ने संकेत दिया कि नायडू राजनीति में अप्रत्याशित फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने पहले भी कई 'ट्विस्ट एंड टर्न्स'लिए हैं। रेड्डी के इस बयान से चर्चा होने लगी है कि क्या चंद्रबाबू नायडू उपराष्ट्रपति चुनाव में खेला कर सकते हैं।

Chandrababu Naidu B Sudershan Reddy

रेड्डी बोले- चंद्रबाबू नायडू जानते हैं देशहित में क्या करना है

इंडिया टुडे के मुताबिक सुदर्शन रेड्डी ने कहा,

''चंद्रबाबू नायडू एक दूरदर्शी और कद्दावर नेता हैं। वे जानते हैं कि देशहित में क्या करना है। उन्होंने पहले भी कई मौकों पर सही फैसले लिए हैं। भारतीय राजनीति के क्षितिज पर उन्होंने कई बार ट्विस्ट एंड टर्न्स दिए हैं।''

हालांकि शनिवार (23 अगस्त) को मीडिया से बात करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के प्रति अपनी पार्टी के समर्थन की पुष्टि की है। उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया है जिसमें उनकी पार्टी विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करेगी।

असल में सुदर्शन रेड्डी का तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से पुराना जुड़ाव रहा है। 1980 और 1990 के दशक में वकालत के दौरान वे चंद्रबाबू नायडू के काफी नजदीक माने जाते थे। उस दौर में नायडू टीडीपी सरकार में दूसरे सबसे बड़े नेता की भूमिका में थे। सुदर्शन रेड्डी ने न केवल कई विश्वविद्यालयों की ओर से कानूनी पैरवी की बल्कि टीडीपी सरकार से जुड़े विभागीय मामलों को भी संभाला। इसी वजह से उनका आंध्र प्रदेश की राजनीति से गहरा और पुराना रिश्ता रहा है।

सुदर्शन रेड्डी का दावा- कई राजनीतिक दल मुझसे बात कर रहे हैं

सुदर्शन रेड्डी ने यह भी खुलासा किया कि वे उन कई राजनीतिक दलों से संपर्क में हैं, जो न तो एनडीए में हैं और न ही INDIA ब्लॉक का हिस्सा। उनके मुताबिक, "कई दल सीधे मुझसे बात कर रहे हैं और अलग-अलग तरीके से समर्थन का आश्वासन दे रहे हैं। वजह साफ है-मैं किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा हूं।"

रेड्डी बोले- गठबंधन समीकरण बदले तो नतीजे भी बदल सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी ने आगे कहा कि विपक्ष का दावा बहुत मजबूत है क्योंकि INDIA ब्लॉक देश की लगभग 66-67% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा-"इसका मतलब यह है कि मैं देश की बहुसंख्यक जनता द्वारा प्रायोजित उम्मीदवार हूं।"

रेड्डी का मानना है कि भले ही संख्याबल के लिहाज से एनडीए आगे दिख रहा हो, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में अंतर बहुत पतला है और अगर गठबंधन समीकरण बदले तो नतीजे भी बदल सकते हैं।

"उपराष्ट्रपति का पद राजनीतिक नहीं, संवैधानिक है"

सुदर्शन रेड्डी ने साफ किया कि उन्होंने यह चुनाव राजनीति के लिए नहीं, बल्कि संविधान की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए चुना है। उन्होंने कहा, "मेरा सफर संविधान के साथ 1971 में शुरू हुआ, जब मैंने वकील बनने के बाद इसकी शपथ ली। फिर जज और मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी मैंने संविधान की रक्षा का संकल्प लिया। उपराष्ट्रपति का पद भी उसी यात्रा का हिस्सा है। यह राजनीतिक नहीं बल्कि उच्च संवैधानिक पद है।"

उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। जहां एनडीए अपने गठबंधन के बल पर आत्मविश्वास से भरा है, वहीं INDIA ब्लॉक का मानना है कि नायडू जैसे नेता और अन्य छोटे दल अगर अपना रुख बदलें तो खेल पलट सकता है।

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