क्या राजस्थान में हैट्रिक लगाएगी बीजेपी?, महाराष्ट्र का भी आ सकता है अगला नंबर?

नई दिल्ली। कर्नाटक, मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में कांग्रेस की सियासी नैया भंवर में फंसती नजर आ रही है। प्रदेश के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और 30 विधायकों के समर्थन का दावा करके गहलोत सरकार को शक्ति प्रदर्शन की चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उनके पास नंबर है तो विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन करके दिखाएं।

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    बहुमत के लिए कांग्रेस के लिए कम से कम 101 विधायकों का समर्थन जरूरी

    बहुमत के लिए कांग्रेस के लिए कम से कम 101 विधायकों का समर्थन जरूरी

    200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बहुमत के लिए कांग्रेस को कम से कम 101 विधायकों का समर्थन जरूरी है, लेकिन अगर सचिन पायलट 30 विधायकों दावा कर रहे हैं तो राजस्थान विधानसभा 2018 में 99 सीटों पर अटकी राजस्थान का हाल कमोबेश मध्य प्रदेश जैसा ही रहा था, जो बहुमत से 2 कदम दूर रह गई थी और बसपा और निर्दलियों के समर्थन से सरकार बना पाई थी।

    मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों में कांग्रेस बहुमत से 2 सीट दूर रह गई थी

    मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों में कांग्रेस बहुमत से 2 सीट दूर रह गई थी

    वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ का विधानसभा चुनाव एक साथ हुआ था और छत्तीसगढ़ को छोड़कर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मध्य प्रदेश के बीच जबर्दस्त लड़ाई हुई थी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल गया था, लेकिन मध्य प्रदेश में वह बहुमत से महज 2 सीट दूर थी। कांग्रेस ने 230 विधानसभा सीट में से 114 सीट जीत सकी और बीजेपी 109 सीट जीतने में कामयाब रही।

    मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों चुनाव में युवा चेहरों को दरकिनार किया गया

    मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों चुनाव में युवा चेहरों को दरकिनार किया गया

    राजस्थान की तरह और मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस बहुमत से 2 सीट कम रह गई थी। मध्य प्रदेश और राजस्थान में एक और बड़ी समानता यह थी कि दोनों ही प्रदेशों में चुनाव युवा चेहरों पर लड़ा गया, लेकिन चुनाव बाद दोनों ही प्रदेशों से युवा चेहरों को किनारे लगा दिया। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत में जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी भूमिका थी, ठीक वैसी ही भूमिका राजस्थान में सचिन पायलट की थी।

    कांग्रेस आलाकमान को धारा विरूद्ध चलना मध्य प्रदेश में भारी पड़ा था

    कांग्रेस आलाकमान को धारा विरूद्ध चलना मध्य प्रदेश में भारी पड़ा था

    कांग्रेस की धारा विरूद्ध चलना जहां मध्य प्रदेश में भारी पड़ा और उसके हाथ से मध्य प्रदेश की सत्ता चली गई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थित 22 विधायकों के साथ कमलनाथ सरकार को अल्पमत में ला दिया और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और अब ऐसी ही चिंगारी राजस्थान में भी उठी है, जिसकी आग में अशोक गहलोत सरकार का जाना तय माना जा रहा है।

    MP में इस्तीफे तक कमलनाथ भी गाते रहे थे कि उनके पास बहुमत है

    MP में इस्तीफे तक कमलनाथ भी गाते रहे थे कि उनके पास बहुमत है

    राजस्थान के मुख्यमंत्री भले ही लाख दावा कर रहे हैं कि उनके पास 107-109 विधायकों का समर्थन हासिल है, लेकिन भूलना नहीं चाहिए कि कमलनाथ भी यही गाना तब तक गाते रहे थे जब तक उन्होंने हारकर इस्तीफा नहीं दे दिया। गहलोत भी जानते हैं कि बिना आग के धुंआ नहीं उठ रहा है और यह भी भली भांति समझ गए हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी अब उनके हाथ से सरक चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इसमें कितना समय लगता है

    एसओजी समन गहलोत की ताबूत की आखिरी कील साबित होने जा रही है

    एसओजी समन गहलोत की ताबूत की आखिरी कील साबित होने जा रही है

    2018 विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद के रूप में हुआ दोबारा चुनाव राजस्थान कांग्रेस के सचिन पायलट गुट को पसंद नहीं आया था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान के आगे उनकी एक नहीं चली, लेकिन विधायकों के खरीद-फरोख्त मामले में गहलोत (गृह मंत्रालय) द्वारा उन्हें बयान के लिए एसओजी द्वारा समन किया जाना, उनकी ताबूत की आखिरी कील साबित होने जा रही है।

    अब सचिन पायलट राजस्थान में आर पार की लड़ाई का मूड बना चुके हैं

    अब सचिन पायलट राजस्थान में आर पार की लड़ाई का मूड बना चुके हैं

    अशोक गहलोत के खिलाफ सचिन पायलट के बिगुल फूंकने की शुरूआत का परिणाम निकट है, क्योंकि यह तय है कि अब सचिन पायलट आर पार की लड़ाई का मूड बना चुके हैं। वो बीजेपी ज्वाइन करेंगे या नहीं, लेकिन कांग्रेस के साथ अब शायद ही उनका राब्ता रहने वाला है। एक बयान में पायलट ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि उन्होंने कांग्रेस के साथ समझौते की शर्त नहीं रखी है और किसी से उनकी बातचीत नहीं चल रही है।

    बीजेपी की सदस्यता सचिन पायलट के लिए टेड़ी खीर बनती दिख रही है

    बीजेपी की सदस्यता सचिन पायलट के लिए टेड़ी खीर बनती दिख रही है

    पायलट सुनिश्चित कर चुके है कि कांग्रेस के साथ उनकी राजनीति पारी का अंत अब हो गया है। संभव है कि जल्द सचिन पायलट एक क्षेत्रिय पार्टी के गठन की घोषणा भी कर दें, क्योंकि बीजेपी की सदस्यता उनके लिए अभी टेड़ी खीर बनती दिख रही है। कांग्रेस का डिप्टी सीएम पद छोड़कर बीजेपी का डिप्टी सीएम बनना शायद ही सचिन पायलट को गंवारा होगा।

    राजस्थान बीजेपी में CM पद के लिए वसुंधरा राजे पहले पावदान पर हैं

    राजस्थान बीजेपी में CM पद के लिए वसुंधरा राजे पहले पावदान पर हैं

    राजस्थान बीजेपी में मुख्यमंत्री पद के लिए वसुंधरा राजे पहले पायदान पर हैं। चूंकि पिछले चुनाव में बीजेपी की हार के पीछे महारानी के खिलाफ चलाया गया कैंपेन 'मोदी तुझसे वैर नहीं और वसुंधरा तेरी खैर नहीं' ने बड़ी भूमिका निभाई थी। राजस्थान बीजेपी में मुख्यमंत्री पद की रेस में वसुंधरा के बाद दूसरा नंबर गजेंद्र सिंह शेखावत का है। ऐसे में बीजेपी ज्वाइन करके भी सचिन पायलट को कुछ खास नहीं मिलने वाला है।

    सचिन पायलट को लेकर बीजेपी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं

    सचिन पायलट को लेकर बीजेपी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं

    हालांकि सचिन पायलट को लेकर बीजेपी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। बीजेपी आलाकमान राजस्थान में सियासी उठापटक को करीने से बैठकर देख रही है और अगर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के दावे के विपरीत कांग्रेसी सरकार अल्पमत का शिकार होती है, तो बीजेपी सचिन पायलट से संपर्क कर सकती है और उन्हें सीएम पद या सीएम से भी बड़ी जिम्मेदारी केंद्र या राज्य सरकार में देकर उन्हें अपने पाले में कर सकती है।

    वसुंधरा के खिलाफ है पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को पड़ा वोट

    वसुंधरा के खिलाफ है पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को पड़ा वोट

    यह भी संभव है कि बीजेपी सचिन पायलट को मुख्यमंत्री के दावेवारी में खड़ा कर सकती है और वसुंधरा राजे और गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रतिक्रिया का इंतजार करते हुए फैसले ले सकती है। वसुंधरा के खिलाफ राजस्थान विधानसभा चुनाव में पड़ा वोट एक बड़ा फैक्टर है, जिस पर बीजेपी वसुंधरा को साइडलाइन कर सकती है और यह विधानसभा चुनाव 2023 में निश्चित हो चुका है, जहां पार्टी शायद ही वसुंधरा को सीएम कैंडीडेट के तौर पर पेश करे।

    सचिन पायलट अगर गहलोत सरकार को निपटाने में सफल होते हैं तो

    सचिन पायलट अगर गहलोत सरकार को निपटाने में सफल होते हैं तो

    बीजेपी आलाकमान गजेंद्र सिंह शेखावत को भी अगले चुनाव में अपनी ताकत दिखाकर एलीवेशन पाने को कह सकती है। इस सब बातों का लब्बोलुआब यह है कि सचिन पायलट अगर राजस्थान की गहलोत सरकार को निपटाने में सफल होते हैं, तो बीजेपी उनका हाथ थामने के साथ उनका हाथ ऊपर उठाने में परहेज नहीं करेगी। सचिन पायलट भी संभवतः यही चाहते हैं, लेकिन राजस्थान बीजेपी के दो बड़े नेता उनके रास्ते के सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

    सचिन पायलट खुलकर बीजेपी के साथ जुड़ने की बात कह नहीं पा रहे हैं

    सचिन पायलट खुलकर बीजेपी के साथ जुड़ने की बात कह नहीं पा रहे हैं

    यही कारण है कि एक तरफ जहां सचिन पायलट कांग्रेस के साथ अलग होने का मन बना चुके है, लेकिन खुलकर बीजेपी के साथ जुड़ने की बात कह नहीं पा रहे हैं। एसओजी के नोटिस के बहाने राजस्थान का सियासी पारा बढ़ाने वाले सचिन पायलट अशोक गहलोत सरकार को अस्थिर तो कर चुके हैं, जिसकी बानगी कांग्रेस आलाकमान की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशों में स्पष्ट झलक रहा है।

    सचिन पायलट का दावा सच्चा है, तो गहलोत सरकार का गिरना तय है

    सचिन पायलट का दावा सच्चा है, तो गहलोत सरकार का गिरना तय है

    अगर सचिन पायलट 30 विधायकों के समर्थन के दावा सच्चा है, तो गहलोत सरकार का गिरना तय है, क्योंकि मौजूदा समय में 106-109 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही सरकार 30 विधायकों के अलग होते ही 76 से 79 पर सिमट सकती है और ऐसे में गहलोत को इस्तीफा देना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो राजस्थान में बीजेपी हैट्रिक लगाएगी।

    कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटा चुकी है बीजेपी

    कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटा चुकी है बीजेपी

    बीजेपी इससे पहले कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कांग्रेस और कांग्रेस नित सरकार को सत्ता से हटाकर सत्ता पर काबिज हुई है। कर्नाटक में बीजेपी बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में सरकार में काबिज होने में सफल रही है और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बनने में सफल हुए हैं, जो तत्कालीन कांग्रेस युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थित विधायकों के इस्तीफा देने के बाद गिर गई थी।

    बीजेपी राजस्थान में अगर हैट्रिक लगाने में कामयाब होती है तो...

    बीजेपी राजस्थान में अगर हैट्रिक लगाने में कामयाब होती है तो...

    वैसे, बीजेपी राजस्थान में अगर हैट्रिक लगाने में कामयाब होती है, तो कोरोनावायरस नियंत्रण में बुरी तरह फ्लॉप रही महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार का भी नंबर लगना तय कहा जा सकता है, क्योंकि जिस दशा और दिशा में उद्धव सरकार चल रही है, उसका आज नहीं तो कल गिरना तय माना जा रहा है और अगले कुछ महीनों में वहां भी राजनीतिक उठापटक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

    फिलहाल, कल का दिन राजस्थान सरकार के लिए महत्वपूर्ण दिन है

    फिलहाल, कल का दिन राजस्थान सरकार के लिए महत्वपूर्ण दिन है

    फिलहाल, कल का दिन राजस्थान सरकार के लिए महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि अपने समर्थित विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए सचिन पायलट संभव है कि अपने पत्ते खोलें। एक के बाद एक युवा नेताओं के कांग्रेस छोड़ने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल का हालिया ट्वीट भी इसकी पुष्टि करता है कि कांग्रेस परिवार और कैडर में फंस गई है। उन्होंने कहा, अपनी पार्टी को लेकर चिंतित हूँ. क्या हम तब जागेंगे जब हमारे अस्तबल से घोड़े निकाल लिए जाएंगे।

    भाजपा को इसलिए खटक रही राजस्थान की कांग्रेस सरकार

    भाजपा को इसलिए खटक रही राजस्थान की कांग्रेस सरकार

    प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुरू से ही भाजपा नेतृत्व की आंखों में किरकिरी बने हुए हैं। राजनीतिक दांव-पेच के माहिर खिलाड़ी गहलोत आसानी से भाजपा के काबू में नहीं आते हैं। ऐसे में भाजपा ने कमजोर कड़ी पायलट से संपर्क साध उन्हें आगे किया है। कांग्रेस पार्टी का सारा दारोमदार गहलोत की फंडिंग पर निर्भर है। ऐसे में यदि गहलोत सरकार गिरती है तो उसका सीधा प्रभाव कांग्रेस पर पड़ेगा।

    बीजेपी आलाकमान 'इंतजार करो और देखो' की मुद्रा में है

    बीजेपी आलाकमान 'इंतजार करो और देखो' की मुद्रा में है

    राजस्थान में कांग्रेस सरकार के ऊपर छाए संकट के बादलों पर बीजेपी 'इंतजार करो और देखो' की मुद्रा में है। कोई भी निर्णय लेने से पहले बीजेपी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच शक्ति प्रदर्शन और उसके नतीजे को देखना चाहती है और अगर सचिन पायलट कामयाब होते हैं तो बीजेपी सचिन पायलट को एलीवेशन देने से नहीं कतराएगी। यही वजह है कि वसुंधरा राजे भी साइलेंट मोड में हैं।

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