फ्लैट देने में की देरी तो बिल्डर पर लगा हर्जाना, खरीदार को देने होंगे 1 लाख

मुंबई। एक बिल्डर को घर खरीदार को बार-बार टहलाना भारी पड़ गया। अब बिल्डर को खरीदार को देरी से घर देने के लिए एक लाख रुपये हर्जाना देना होगा। मामला महाराष्ट्र के थाने का है जहां उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट देने में देरी करने पर बिल्डर को खरीदार को एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया है। उपभोक्ता आयोग के पीठासीन अधिकारी एसजे पवार और सदस्य पूनम वी महर्षि ने टिटवाला के एक दंपती की मेसर्स विमल एंटरप्राइजेज के खिलाफ शिकायत पर ये आदेश दिया।

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शिकायत के अनुसान घाटकोपर के एक बिल्डर ने विनायक कृपा नाम से टिटवाला में एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट में शिकायतकर्ताओं ने 2011 में 13 लाख रुपये का एक फ्लैट बुक किया था। साथ ही 45,261 रुपये के दूसरे शुल्क अदा किए थे।

इसके साथ ही शिकायतकर्ताओं ने पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली थी और फ्लैट के लिए लोन भी लिया था। बिल्डर ने फ्लैट को दिसंबर 2013 में सौंपने का वादा किया था। सभी प्रक्रिया पूरी करने और पूरा भुगतान करने के बाद भी बिल्डर ने दिए गए समय पर फ्लैट नहीं सौंपे। बाद में जनवरी 2015 में बिना किसी लिखित पत्र के फ्लैट सौंपा गया।

शिकायतर्ताओं ने आयोग को बताया कि देरी से फ्लैट देने के बावजूद बिल्डर ने कोई क्षतिपूर्ति नहीं दी। यही नहीं उसने जो सुविधाएं देने का वादा किया था उसे भी नहीं दिया गया था।

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर ने जो सेवाएं दी हैं उनमें कमी है और बिल्डर ने व्यापार में अनुचित प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जिसके चले उसे शिकायतकर्ता को 1 लाख रुपये का हर्जाना देना होगा। इसके साथ ही बिल्डर को मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये भी देने को कहा है।

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