हाथरस पीड़िता के भाई की मांग, रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो जांच, डीएम हों सस्पेंड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हाथरस (Hathras) में 19 वर्षीय दलित युवती के साथ हुई वीभत्स घटना के बाद योगी सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं लेकिन पीड़ित परिवार इससे संतुष्ट नहीं नजर आ रहा है। पीड़ित परिवार मामले की जांच रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के जज से कराए जाने की मांग कर रहा है।

हाथरस डीएम के निलंबन की मांग
पीड़िता के भाई ने समाचार एजेंसी ANI को दिए बयान में कहा है कि "उनकी मांग है कि घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से कराई जानी चाहिए।" वहीं मामले में सवालों के घेरे में रहे हाथरस डीएम को भी सस्पेंड किए जाने की मांग की है। पीड़िता के भाई ने कहा कि हमने कभी भी सीबीआई जांच की मांग नहीं की। एसआईटी पहले ही मामले की जांच कर रही है।
बता दें कि हाथरस डीएम की भूमिका को लेकर विपक्षी दल भी सवाल उठा चुके हैं। प्रियंका गांधी ने हाथरस डीएम को सस्पेंड न किए जाने को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला था। प्रियंका ने डीएम की बर्खास्तगी की मांग करते हुए कहा था कि हाथरस के डीएम को कौन बचा रहा है?

आईपीएस एसोसिएशन ने उठाए थे कार्रवाई पर सवाल
इसके पहले योगी सरकार ने एसपी, डीएसपी समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया था जिसकी आईपीएस एसोसिएशन ने भी निंदा की थी। एसोसिएशन ने कहा था कि सिर्फ पुलिस पर कार्रवाई की गई है जबकि जिले में कानून व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन भी जिम्मेदार होता है।
वहीं समाजवादी पार्टी ने भी सीबीआई जांच की जगह रिटायर्ड जज से जांच कराने की मांग की थी। परिजनों से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा था कि परिवार को सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं है। हमारी मांग है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए।
रविवार को मामले की जांच कर रही एसआईटी पीड़िता के गांव पहुंची थी जहां उसने परिवार के लोगों के बयान दर्ज किए।
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बीजेपी आईटी सेल कह रहा, ये रप नहीं
इस बीच भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल ये हाथरस कांड में बलात्कार के आरोपों को खारिज करने की कोशिश की है। बीजेपी आईटी सेल के आईटी सेल के प्रमुख ने शुक्रवार को दो वीडियो अपने ट्विटर पर पोस्ट किए गए थे जिसमें उन्होंने ये दावा किया था कि पीड़िता के साथ बलात्कार नहीं हुआ था। फिलहाल अमित मालवीय के दावों का इंडिया टूडे ने अपनी रिपोर्ट में खंडन किया है। इंडिया टूडे ने अपने खंडन में पीड़िता के तीन वीडियो के आधार पर ये दावा किया है।
पहला वीडियो को अमित मालवीय ने पोस्ट करते हुए लिखा था कि "ये पीड़िता का एएमयू के बाहर एक रिपोर्टर से बातचीत है जिसमें उसने दावा किया कि उसकी गला घोंटने की कोशिश की गई। किसी भी तरह से ये कम जघन्य अपराध नहीं है मामले को तूल देने के लिए इसकी जगह एक दूसरे अपराध का रंग देना गलत है।"
इंडिया टूडे ने अमित मालवीय के दावे के को गलत बताते हुए कहा है कि ये वीडियो हाथरस के चंदपा थाने के बाहर का है। अमित मालवीय द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो अभी तक पीड़िता का सबसे पहला रिकॉर्डेड बयान है। इस वीडियो में पीड़िता कह रही है "गला दबा दिया" इस पर रिपोर्टर सवाल करता है कि क्यों गला दबा दिया तो पीड़िता कहती है.. "जबर्दस्ती न करने दे रही तासु..." (जबर्दस्ती नहीं करने दे रही इसलिए)

दूसरे और तीसरे वीडियो में भी जबर्दस्ती की बात
इंडिया टुडे के मुताबिक पीड़िता का दूसरा वीडियो बागला सरकारी अस्पताल हाथरस का है। इसी वीडियो में पीड़िता ने आरोपियों की पहचान की है। घटना और इसकी वजह के बारे में पूछे जाने पर पीड़िता बताती है कि हम घास लेने गए थे, अंदर ले गए मुझे, मेरा गला दबा दिया, मेरे साथ जबर्दस्ती करी.. "
तीसरा वीडियो जो कई न्यूज चैनलों पर भी चलाया गया था इसमें पीड़िता ने दो आरोपियों रवि और संदीप का नाम लिया है। ये वीडियो 22 सितम्बर का है जिसे जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ में रिकॉर्ड किया गया था। पीड़िता ने ये भी कहा था कि उसके साथ पहले भी ऐसा करने की कोशिश की गई थी लेकिन तब वह किसी तरह भाग निकली थी।
वहीं ये पूछे जाने पर कि क्या उस पर इसे रेप कहने के लिए कोई दबाव है पीड़िता ने इससे इनकार किया था।












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