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बुकर प्राइज विनर बानू मुश्ताक को 'मैसुरु दशहरा न्योता' पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, समझें क्या है पूरा विवाद?

Bano Mushtaq Mysuru Dasara Row: कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों मैसूरु की मशहूर चामुंडी पहाड़ियों और माँ चामुंडेश्वरी मंदिर (Chamundi Hills & Chamundeshwari Temple) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार ने इंटरनेशनल बुकर प्राइज विजेता लेखिका बानू मुश्ताक (Banu Mushtaq) को 22 सितंबर को होने वाले मैसूरु दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया।

विपक्षी दलों ने इसका जोरदार विरोध किया और इसी दौरान उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (DK Shivakumar) का बयान सामने आया कि "चामुंडी पहाड़ी और माँ चामुंडेश्वरी केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं, बल्कि सबकी आस्था से जुड़ी हैं।" इस बयान ने पूरे राज्य में राजनीतिक घमासान मचा दिया है।

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DK Shivakumar ने अपने बयान में क्या कहा?

पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा-"माँ चामुंडेश्वरी कर्नाटक की अधिष्ठात्री देवी हैं। यहाँ हर धर्म और समुदाय के लोग आते हैं और देवी की आराधना करते हैं। कहीं भी यह नहीं लिखा है कि केवल हिंदू ही यहाँ आ सकते हैं। हम चर्च, जैन मंदिर, दरगाह और गुरुद्वारे जाते हैं, वैसे ही अन्य धर्मों के लोग भी माँ चामुंडी की पूजा कर सकते हैं। यह सब राजनीति है कि बानो मुश्ताक को न्योता क्यों दिया गया।"

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अयोध्या के राम मंदिर में भी केवल हिंदुओं को ही प्रवेश मिलता, तो फिर वहाँ ऐसा बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया? शिवकुमार ने कहा कि यह देश सेक्युलर है, संविधान सबको आस्था और विश्वास की आजादी देता है।

बानू मुश्ताक पर विवाद क्यों?

दरअसल, भाजपा नेताओं ने एक पुराने वीडियो के आधार पर बानू मुश्ताक को लेकर आपत्ति जताई। उस वीडियो में कथित तौर पर उन्होंने कन्नड़ भाषा की देवी भुवनेश्वरी की पूजा पर सवाल उठाया था। इसी को आधार बनाकर भाजपा ने कहा कि ऐसी सोच रखने वाली लेखिका को राज्य के सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन का उद्घाटन करने का अधिकार नहीं। मगर बानू मुश्ताक का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।

उन्होंने कहा-"मुझे यह निमंत्रण पाकर गर्व है। मैं माँ चामुंडेश्वरी को ताई (माता) मानने वालों की भावनाओं का आदर करती हूँ। दशहरा नाडा हब्बा (राज्य महोत्सव) है और मैं उसकी सांस्कृतिक भावना का गहरा सम्मान करती हूँ। यह अवसर मेरे लिए सौभाग्य है।"

बुकर प्राइज विनर लेखिका ने क्या कहा?

बानू मुश्ताक ने राजनीति पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि यह आमंत्रण मेरे लिए देवी चामुंडेश्वरी से किए गए एक संकल्प को पूरा करने का अवसर है। जब मेरा उपन्यास बुकर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट हुआ था, तब मेरी मित्र मीनाक्षी ने माँ से मन्नत मांगी थी। वह यात्रा तब पूरी नहीं हो सकी। अब सरकार ने मुझे यह अवसर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों की नकारात्मकता पर क्यों प्रतिक्रिया दूँ? जनता खुद ही उनका जवाब दे रही है। राज्य सबका है, मैं किसी जाति या धर्म से बंधी नहीं हूँ।

BJP Congress clash: भाजपा और विपक्ष का तीखा हमला

शिवकुमार के बयान के बाद भाजपा ने उन पर हमला बोल दिया। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने सवाल किया-"अगर यह हिंदुओं की संपत्ति नहीं है तो किसकी है? क्या टीपू सुल्तान ने यहाँ राज किया था, इसलिए अब आप इसे वक्फ संपत्ति घोषित करेंगे?"

मैसूरु शाही परिवार के वंशज और सांसद यदुवीर वाडियार ने भी शिवकुमार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, "माँ चामुंडेश्वरी हिंदू देवी हैं, जिनका उल्लेख मार्कंडेय पुराण के देवी माहात्म्य में है। मंदिर की परंपराएं और पूजा-पद्धति हिंदू शास्त्रों के अनुसार चलती हैं। हर धर्म के लोग यहाँ आते हैं, लेकिन देवी का स्वरूप हिंदू ही है। दशहरा भी मौलिक रूप से हिंदू पर्व है, इसकी तिथियां हिंदू पंचांग से तय होती हैं।"

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार शहरी नक्सलियों और मार्क्सवादियों के इशारे पर एक "सुनियोजित एजेंडे" के तहत हिंदू परंपराओं पर चोट कर रही है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, "सौ डी.के. शिवकुमार भी आ जाएं, चामुंडी पहाड़ियां हिंदू संपत्ति ही रहेंगी।"

कांग्रेस सरकार ने किया बचाव

कांग्रेस सरकार ने इस न्योते का मजबूती से बचाव किया। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने NDTV से कहा-"चामुंडी पहाड़ियां और दशहरा केवल हिंदुओं का नहीं है। यह सबका पर्व है। सभी धर्मों के लोग यहाँ आते हैं और देवी से प्रार्थना करते हैं।"

लोकनिर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली ने कहा कि यह "गर्व की बात है" कि एक कन्नड़ लेखिका को राज्य के सबसे बड़े उत्सव का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। मगर मैसूरु शाही परिवार के सांसद यदुवीर वाडियार ने स्पष्ट किया-"माँ चामुंडेश्वरी की धार्मिक पहचान हिंदू है। हर धर्म के लोग आ सकते हैं, लेकिन पूजा और परंपरा हिंदू शास्त्रों के अनुसार ही होगी। दशहरा मूल रूप से हिंदू परंपरा का पर्व है। इसकी तिथि किसी के मनमाफिक नहीं बदली जा सकती।"

चामुंडी पहाड़ियों और मैसूरु दशहरे को लेकर छिड़ा यह विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है। एक ओर कांग्रेस सरकार और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार इसे सबका पर्व बता रहे हैं, वहीं भाजपा और शाही परिवार इसे हिंदू परंपरा पर हमला मान रहे हैं। अब देखना होगा कि 22 सितंबर को जब बानो मुश्ताक दशहरा का उद्घाटन करेंगी, तब तक यह विवाद और कितना गहराता है या फिर राज्य सरकार इस पर कोई ठोस समाधान निकाल पाती है।

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