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Bommala Koluvu Navratri में विशेष त्योहार, अनोखे डॉल फेस्टिवल को अगली पीढ़ी तक ले जाने की पहल

बोम्माला कोलुवु व्यवस्थित करने के लिए धैर्य और रंगों की भावना की जरूरत होती है। इस डॉल फेस्टिवल को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कवायद जारी है। Bommala Koluvu Navratri doll festival in andhra pradesh
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Bommala Koluvu Navratri में आंध्र प्रदेश का बहुत लोकप्रिय त्योहार है। नवरात्रि उत्सव के दौरान विभिन्न प्रकार की गुड़ियों और मूर्तियों के माध्यम से संस्कृतियों को प्रदर्शित करने और पौराणिक कहानियों को चित्रित करने का पारंपरिक तरीका Bommala Koluvu नाम से जाना जाता है। लुप्त होती परंपरा वर्तमान पीढ़ी के साथ अपने खोए हुए गौरव को पुनः प्राप्त कर रही है। 'बोम्माला कोलुवु' को पुनर्जीवित करने और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए आंध्र प्रदेश के लोग कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

Bommala Koluvu Navratri

कब होता है Bommala Koluvu

'बोम्माला कोलुवु' बाएं से दाहिनी दिशा की ओर क्षैतिज आकार में मूर्तियों और गुड़ियों को सजाने की एक व्यवस्था है। चरणों की संख्या अक्सर 1 चरण से लेकर 15 या अधिक भी होती है। भारत के दक्षिणी राज्यों में दशहरा महोत्सव या संक्रांति के दौरान 'बोम्माला कोलुवु' का व्यापक प्रदर्शन किया जाता है।

कहानियों की भरमार, अब खिलौनों का अंबार

84 वर्षीय लक्ष्मी देवी 'बोम्माला कोलुवु' को अगली पीढ़ी तक ले जाने के बारे में कहती हैं कि आजकल बच्चों के पास खेलने के लिए ढेरों खिलौने होते हैं, लेकिन उनके बचपन में खेलने के लिए बहुत सी गुड़िया या खिलौने नहीं होते थे। ऐसे में बहुत कम संसाधनों के बावजूद निश्चित रूप से महान कहानी जरूर होती थी। साल में एक या दो बार भाई-बहन, चचेरे भाई और दोस्तों के साथ मिलकर गुड़ियों का प्रदर्शन करना और कहानियों को एक-दूसरे के साथ शेयर करना हमेशा आनंद देता था।

अगली पीढ़ियों तक जाए डॉल फेस्टिवल

लक्ष्मी बताती हैं कि जब वे 5 साल की थीं, उनके दादाजी ने लकड़ी का किचन सेट गिफ्ट किया था। हालाँकि बाद में लक्ष्मी के किचन सेट में से कई चीजें खो गईं, लेकिन उन्होंने पोती को वही किचन सेट गिफ्ट किया। पोती अमेरिका में रहती है। बकौल लक्ष्मी, आज उनकी पोती किचन सेट को अपने कोलुवु में प्रदर्शित करती है। लक्ष्मी बताती हैं कि इस तरह की प्रथाओं की शुरुआती बिंदु यही है। 84 वर्षीय लक्ष्मी देवी के अनुसार, "संपत्ति और धन की तुलना में अगली पीढ़ियों तक मूल्यों और कहानियों को पहुंचाया जाना चाहिए। ऐसा करना अधिक महत्वपूर्ण है।"

आधुनिक कलाकारों की मूर्तियों का संग्रह

बोम्माला कोलुवु की परंपरा बनी रहे, इसके लिए विशाखापत्तनम की निवासी सिरीशा द्वारपुडी ने पारंपरिक तरीके को थोड़ा आधुनिक बनाने की पहल की है। उन्होंने बच्चों का अधिक ध्यान आकर्षित करने के लिए मार्वल और डीसी फनको जैसे पॉप कलाकारों की मूर्तियों का संग्रह तैयार किया है। उन्होंने बताया, बोम्माला कोलुवु की स्थापना बचपन का सपना था, लेकिन उन्हें अपना खुद का कोलुवु बनाने का मौका केवल शादी के बाद ही मिला। उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि बच्चों को कहानियाँ सुनाने के सबसे आसान तरीकों में से एक बोम्माला कोलुवु है। मैं हर साल एक अलग पौराणिक कहानी चुनती हूं। बोम्माला कोलुवु बच्चों को व्यस्त रखता है और उन्हें बहुत सारे सवाल करने का मौका देता है। ऐसा करने पर वे कहानियों को बेहतर ढंग से समझते हैं।

गुड़िया और लघुचित्र खरीदना

नर्मदा ने बताया, बोम्माला कोलुवु व्यवस्थित करने के लिए धैर्य और रंगों की भावना की जरूरत होती है। यह परिवार और दोस्तों को एक साथ आने और गुणवत्तापूर्ण समय बिताने में मदद करता है। यही समय की मांग भी है। एक उत्साही यात्री सुभाश्री स्थानीय प्रतिभाओं को मुखर बनाने में विश्वास करती है। वे अक्सर स्थानीय बाजारों से गुड़िया और लघुचित्र खरीदती हैं। वह जहां यात्रा करती हैं, ये चीजें स्थान विशेष की महानता और इतिहास का प्रतीक होती हैं।

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English summary
Andhra’s doll festival ‘Bommala Koluvu’ regaining lost glory in Navratri.
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