Bombay High Court का कस्टडी पर बड़ा फैसला, 'बच्चों के लिए नौकरानी रखने वाली मां...'
Bombay High Court: बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक विवाद पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। एक दंपती के बीच बच्चे की कस्टडी को लेकर चल रहे विवाद में पिता ने आरोप लगाया गया था कि मां ने बच्चों की परवरिश के लिए नौकरानी रखा है। पिता ने इस आधार पर बच्चे सौंपे जाने की मांग करते हुए कहा था कि यह दिखाता है कि मां बच्चों का ठीक तरीके से लालन-पालन नहीं कर पा रही है। हाई कोर्ट ने पिता के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय परिवारों में बच्चों के पालन में सहायता के लिए सहायिका रखना आम बात है। नौकरानी या सहायिका रखने का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता है कि मां अपनी संतान की ठीक से देखभाल नहीं कर रही है।
Bombay High Court ने कस्टडी विवाद पर दिया अहम फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह मामला जून 2023 में जन्मे एक शिशु की कस्टडी विवाद से जुड़ा है। बच्चे की मां ने अपने पति का घर छोड़ने के बाद फैमिली कोर्ट में गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट के तहत बच्चे की स्थायी कस्टडी की मांग की थी। साथ ही, मां ने बच्चे के लिए आंतरिक कस्टडी की भी मांग की थी। आंतरिक कस्टडी के तहत जब तक स्थायी आदेश पारित न हो, तब तक बच्चा मां या पिता में से जिसके पास रह रहा है उसके पास ही रहता है।

जस्टिस आरएम जोशी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अहम फैसला दिया है। बच्चे की कस्टडी मां को औरंगाबाद कोर्ट से मिली थी। इसे पिता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। पिता ने अपनी ओर से दिए दलील में कहा कि बच्चे की मां खुद पालन-पोषण नहीं कर रही है, बल्कि नौकरानी रखा है। मां का यह फैसला दिखाता है कि वह बच्चा पालने में अक्षम है। इस आधार पर कस्टडी पिता को दी जानी चाहिए।
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हाई कोर्ट ने खारिज की पिता की दलील
जस्टिस आरएम जोशी ने पिता की दलील खारिज करते हुए बच्चे की कस्टडी मां को ही सौंपी। जस्टिस जोशी ने अपने फैसले में कहा, 'बच्चे की देखभाल के लिए नौकरानी या सहायक रखना मां की अक्षमता नहीं दर्शाती है। भारतीय परिवारों में बच्चों को पालने के लिए सहयोग लेने की परंपरा है। इस आधार पर मां से कस्टडी नहीं ली जा सकती है।' कोर्ट ने इस दौरान पोस्टपार्टम डिप्रेशन का जिक्र करते हुए प्रसव के बाद मां का अवसाद में जाना सामान्य है। यह गंभीर मानसिक बीमारी नहीं है और इसे आधार बनाकर मां से बच्चे की कस्टडी नहीं छीनी जा सकती है।
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