कोर्ट ने निरस्त किया दंपति का विवाह, क्या होती है ‘रिलेटिव इंपोटेंसी’ जिसके कारण 17 दिनों में होना पड़ा अलग
बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने एक युवा दंपति की शादी को 'रिलेटिव इंपोटेंसी' के कारण रद्द कर दिया। शादी के 17 दिनों बाद पति की रिलेटिव इंपोटेंसी को आधार मानकर शादी को निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति विभा कांकणवाड़ी और न्यायमूर्ति एस जी चपलगांवकर की खंडपीठ ने 15 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुनाया। फैसले में यह भी कहा कि यह ऐसे युवाओं की मदद करने के लिए उपयुक्त मामला है जो एक-दूसरे के साथ मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक रूप से नहीं जुड़ पाते हैं।
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'रिलेटिव इंपोटेंसी' क्या है?
'रिलेटिव इंपोटेंसी' यानी ऐसी नपुंसकता जिसमें व्यक्ति किसी विशेष व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने में खुद को असमर्थ पाता है। जबकि वही व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने में सक्षम हो सकता है। यह स्थिति सामान्य नपुंसकता से काफी अलग होती है।
इस मामले में फरवरी 2024 में एक पारिवारिक अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद 27 वर्षीय व्यक्ति ने उच्च न्यायालय का रुख किया था। पारिवारिक अदालत ने व्यक्ति की 26 वर्षीय पत्नी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका स्वीकार करने के शुरुआती चरण में ही उसने विवाह निरस्त करने का अनुरोध किया था।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा,"रिलेटिव इंपोटेंसी' एक जानी-पहचानी स्थिति है और यह सामान्य नपुंसकता से अलग है। 'रिलेटिव इंपोटेंसी' की विभिन्न शारीरिक और मानसिक वजह हो सकती हैं।"
उच्च न्यायालय ने कहा, ''मौजूदा मामले में यह आसानी पता लगाया जा सकता है कि पति को अपनी पत्नी के प्रति 'रिलेटिव इंपोटेंसी' है। विवाह जारी न रह पाने की वजह प्रत्यक्ष तौर पर पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बना पाने में पति की अक्षमता है।"
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि यह एक ऐसे युवा दंपति से जुड़ा मामला है जिसे विवाह में हताशा की पीड़ा सहनी पड़ी है। अदालत ने कहा, "व्यक्ति ने संभवत: शुरुआत में संभोग न कर पाने के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदार ठहराया क्योंकि वह यह स्वीकार करने से हिचकिचा रहा था कि वह उसके साथ संभोग करने में असमर्थ है।"
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शादी के 17 दिन बाद अलग हुए दंपति
युवा दंपति का विवाह मार्च 2023 में हुआ था। शादी के 17 दिन बाद ही अलग हो गए थे। दंपति ने कहा था कि उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बने। महिला का दावा था कि उसके पति ने उसके साथ यौन संबंध बनाने से इनकार कर दिया। उसने कहा, "हम एक-दूसरे के साथ मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक रूप से नहीं जुड़ पाए।" वहीं, व्यक्ति ने दावा किया कि वह अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध नहीं बना पाया लेकिन वह सामान्य स्थिति में है। उसने कहा, "मैं ऐसा कोई धब्बा नहीं चाहता कि मैं नपुंसक हूं।"
इसके बाद पत्नी ने एक पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी दायर की थी। पारिवारिक अदालत ने इन दावों में पति और पत्नी ने मिलीभगत मानकर अर्जी खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और शादी को भी निरस्त कर दिया है।
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