बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, माओवादी लिंक मामले में DU के पूर्व प्रोफेसर GN साईबाबा को किया बरी
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा और 5 अन्य को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को माओवादी लिंक के एक कथित मामले में बरी कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने उनकी उस अपील को भी स्वीकार कर लिया है, जिसमें एक ट्राइबल अदालत की तरफ से उन्हें दोषी ठहराया गया था और उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी।

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इसके अलावा न्यायमूर्ति रोहित देव और न्यायमूर्ति अनिल पानसरे की पीठ ने मामले में पांच अन्य दोषियों की अपील को भी स्वीकार कर लिया और उन्हें भी बरी कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने दोषियों को तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।
आपको बता दें कि साईबाबा फिलहाल नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें मई 2014 में माओवादियों के साथ कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पहले व्हीलचेयर से चलने वाले प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में प्रोफेसर थे। वह वहां पर अंग्रेजी पढ़ाते थे।
साईबाबा को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र हेमंत मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद अरेस्ट किया गया था। हेमंत ने जांच एजेंसियों को पूछताछ में बताया था कि वह छत्तीसगढ़ के अबुजमाड के जंगलों के माओवादियों और एक प्रोफेसर बीच कूरियर का काम कर रहे थे।
वहीं, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिला पुलिस ने साईबाबा पर प्रतिबंधित संगठन के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में काम करने का आरोप लगाया था। साथ ही पुलिस ने दावा किया था कि प्रोफेसर की तरफ से एक संगठन भी चलाया जाता है। यह संगठन सीपीआई-माओवादी के लिए एक मोर्चे के रूप में काम करता है। हालांकि, मुंबई पुलिस के इस आरोप को साईबाबा ने इनकार कर दिया था।
इसके अलावा साईबाबा पर यह भी आरोप लगा था कि उन्होंने 2012 में आंध्र प्रदेश और ओडिशा में प्रतिबंधित एक माओवादी संगठन के सम्मेलन में भी भाग लिया था। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद पर एक भाषण भी दिया था। साथ ही साईबाबा पर श्रीलंका, नेपाल सहित अन्य देशों के माओवादियों से भी संबंध का आरोप लगा था।
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