BMC: 7 पेंगुइन पर 15.26 करोड़ रुपये का खर्चा, शिवसेना शासन में क्यों मचा है सियासी घमासान ?
मुंबई, 10 सितंबर: 7 पेंगुइन की देखरेख के नाम पर 15 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्चे का अनुमान मुंबई की सियासी पार्टियों को हजम नहीं हो रहा है। दरअसल, यह टेंडर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना शासित बीएमसी की ओर से जारी किया गया है। जबकि, बीएमसी का दावा है कि इसके चलते उसकी कमाई कई गुनी बढ़ गई है तो उसके खाने-पीने पर खर्च होने वाली रकम को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। दिलचस्प बात ये है कि शिवसेना शासित बीएमसी पर सवाल राज्य में उसकी सहयोगी कांग्रेस ही बढ़-चढ़कर लगा रही है और यह मुद्दा इसलिए अहम हो गया है क्योंकि अगले साल ही चुनाव होना है।

सोने का अंडा देने वाला टेंडर ?
बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने भायखला जू में मौजूद 7 पेंगुइन पक्षियों की देखरेख के लिए 15.26 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। यह टेंडर दूसरे राजनीतिक दलों के गले के नीचे नहीं उतर पा रहा है। बीएमसी में कांग्रेस के नेता रवि राजा ने शिवसेना शासन के इस रवैए पर सवाल उठाकर इस टेंडर प्रक्रिया को संदिग्ध बता दिया है। उन्होंने कहा है, "पेंगुइन जो है वह कॉन्ट्रैक्टर के लिए एक ऐसी मुर्गी बन गई है जो सोने का अंडा देगी। कॉन्ट्रैक्टर को किस तरीके से फायदा हो, ऐसा यहां पर दिखता है। इसलिए इस प्रस्ताव का हम विरोध कर रहे हैं। मुंबई के टैक्सपेयर का पैसा ऐसे खर्च करना मुझे सही लगता नहीं है।"

पेंगुइन के चलते कमाई बढ़ी है- बीएमसी
यूं तो महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली जो महा विकास अघाड़ी सरकार चल रही है, उसमें कांग्रेस भी सहयोगी है। लेकिन, बीएमसी पर शिवसेना का अकेला कब्जा है और यहां पर फैसले लेने के लिए वह प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सहयोगियों कांग्रेस या एनसीपी पर निर्भर नहीं है। बीएमसी की मेयर किशोरी पेंडेकर का दावा है कि पेंगुइन के चलते वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान की जो आमदनी बढ़ी है, उसके मुकाबले यह टेंडर कुछ भी नहीं है। पेंडेकर ने ठेके के लिए निर्धारित रकम का बचाव करते हुए कहा है, "पेंगुइन एक आकर्षण बन गया है मुंबई का ..पूरे महाराष्ट्र का और लोग जो उसे देखने आते हैं उससे रेवेन्यू भी बढ़ गया है। ये जो खर्चा है वह तीन साल का है।"

2017 से मुंबई जू में हैं पेंगुइन
बृहन्मुंबई महानगरपालिका का दावा है कि पेंगुइन के आने के चलते बीते चार वर्षों में उसकी कमाई करीब 584 % बढ़ गई है। क्योंकि, भायखला चिड़ियाघर का जो राजस्व साल 2017 में 2.1 करोड़ रुपये था, वह आज 12.26 करोड़ हो चुका है। पेंगुइन के आने के बाद 2018 में उसकी देखरेख का ठेका 11.5 करोड़ रुपये में दिया गया था, जिसमें उसके खाने की चीजों की कीमतों के इजाफे के नाम पर सालाना 10% वृद्ध तय की गई थी।

'पेंगुइन देखकर लोगों को मजा आता है, राजनीति न हो'
7 पेंगुइन के लिए ठेके की मोटी रकम और उसके पीछे जारी राजनीतिक घमासान की वजह देश के कुछ राज्यों से ज्यादा बजट वाली बीएमसी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड है, जो कई वजहों से सवालों के घेरे में रहा है। तथ्य ये है कि इसकी ओर से कई ऐसी कंपनियों को पहले टेंडर दिया जा चुका है, जिसका रिकॉर्ड साफ नहीं रहा है। लेकिन, शिवसेना नेता और मेयर इन आरोपों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है, "डेढ़ साल पेंगुइन कक्ष बंद था। तो भी हम लोंगों ने उनका देखभाल किया है। उनकी फैमिली बढ़ रही है। पेंगुइन बहुत ही अच्छी तरह की ऐक्टिवटी करते हैं...यह देखकर लोगों को मजा आता है। तो मुझे लगता है कि इसके ऊपर राजनीति नहीं होनी चाहिए।"(पहली तस्वीर छोड़कर सारी फाइल)












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