अखिलेश यादव बोले- अस्तित्व बचाने बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं भाजपा नेता-कार्यकर्ता
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए रास्ते उत्तर प्रदेश से होकर गुजरते हैं, क्योंकि अकेले यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। ऐसे में यूपी में इन पार्टियों के बीच गठबंधन के बाद से आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को परेशानी झेलनी पड़ सकतीहै। शनिवार को गठबंधन के ऐलान के बाद रविवार को सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने एक ट्वीट किया है।
अखिलेश यादव बोले- मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर
अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में कहा है कि बसपा-सपा में गठबंधन से न केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं। अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर'। ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं।
अन्याय व अत्याचार से लड़ने के लिए बसपा-सपा एक साथ
बता दें कि शनिवार को गठबंधन के ऐलान के बाद अखिलेश यादव ने एक ट्वीट करते हुए कहा था कि आज का दिन हमारे देश के लिए ऐतिहासिक है जब भाजपा से देश के संविधान व सौहार्द की रक्षा तथा दलितों, वंचितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों पर हो रहे उनके अन्याय व अत्याचार से लड़ने के लिए बसपा-सपा दोनों एक साथ आ गये हैं। ये एकजुटता भारतीय राजनीति को एक नयी दिशा देगी और निर्णायक साबित होगी।

38-38 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव
शनिवार को सपा-बसपा गठबंधन के बाद सीटों के बंटवारे का भी ऐलान हो गया। दोनों पार्टी के नेता अखिलेश यादव और मायावती ने यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। जबकि दो सीटें आरएलडी और2 सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी है। हालांकि कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा नहीं लेकिन अखिलेश और मायावती ने यह साफ कर दिया है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी की सीट से वो उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।












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