बगावती नेताओं के प्रति नरम रुख अपना रही है बीजेपी, झड़पिया को दी गई अहम जिम्मेदारी
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व ने हाल ही के दिनों में उन नेताओं के प्रति नरमी का रुख दिखाया है जो पूर्व में पार्टी के नेताओं या फिर पार्टी के लिए चुनौती बने हों। पूर्व में अगर ऐसे नेताओं को पार्टी में शामिल भी किया गया, तो उन्हें कोई महत्वपूर्ण काम नहीं दिया गया। लेकिन अब पार्टी के पुराने रुख में बदलाव होता दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहारण है गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री गोवर्धन झड़पिया को 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया जाना है।

गोवर्धन झड़पिया ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के नेतृत्व में भाजपा के खिलाफ 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन बुरी तरह असफल रहे। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी में वापसी करने वाले ऐसे नेता पार्टी की मुख्य धारा में वापस आने में विफल रहे हैं, लेकिन उनके जैसे लोगों को पार्टी में शामिल करना और उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की जिम्मेदारी देना पार्टी में एक बड़ा बदलाव है।
भाजपा के सूत्रों ने कहा कि अगर किसी के पार्टी नेतृत्व के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं, तो उसे इतना महत्वपूर्ण काम मिलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री गोवर्धन झड़पिया को सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाने से ऐसा प्रतीत होता है कि, पार्टी ने नई दिशा में कुछ कदम बढ़ाए हैं। गोवर्धन झड़पिया के साथ कई अन्य नेताओं को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए 17 राज्यों में पार्टी का प्रभारी नियुक्त किया है।
2002 में गुजरात दंगे हुए थे तो उस समय झड़पिया राज्य की तत्कालीन मोदी सरकार में गृह मंत्री थे। उसके बाद झड़पिया और मोदी के रिश्ते बिगड़ गए थे। गुजरात के गृहमंत्री रहे झड़पिया पर आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने हिंसा रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। इसके बाद तत्कालीन सीएम मोदी ने उनसे गृहमंत्री के पद से हटा दिया था। 2007 में अपनी अलग पार्टी बनाने के बाद उन्होंने बीजेपी के विरोधी केशुभाई पटेल की पार्टी में अपनी पार्टी का विलय कर लिया। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने फिर से बीजेपी का दामन थाम लिया। .
लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की जिम्मेदारी झड़पिया को देना पार्टी का बड़ा फैसला है। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए तीन प्रभारी-सह प्रभारी नियुक्त किए है। इनमें गोवर्धन झड़पिया, दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा का नाम शामिल है। यह भी एक बात बहुत स्पष्ट है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह राज्य की चीजों का ध्यान रखेंगे। इसी तरह यूपी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाकर नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी भी मध्य प्रदेश में शासन चला रहे हैं।












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