RSS की शरण में BJP की वापसी? दूसरी बार मिल चुकी है सीख, विधानसभा चुनावों में नहीं दोहराएगी गलती!
BJP RSS Coordination meeting: लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान खूब चर्चित हुआ था। उन्होंने कहा था पार्टी अब खुद ही सक्षम है और उसे आरएसएस की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, चुनाव नतीजों ने भाजपा के अरमानों का पलीता लगा दिया।
शायद यही वजह है कि आने वाले तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी भूल सुधार करती दिख रही है। अक्टूबर-नवंबर में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड विधानसभा के चुनाव होने हैं। पार्टी ने इसके लिए अभी से संघ के साथ तालमेल बिठाना शुरू कर दिया है।

आरएसएस की शरण में भाजपा की वापसी?
लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में बीजेपी का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा है। हरियाणा में भी सीटें आधी रह गई हैं। झारखंड में भी पार्टी के लिए सत्ता में वापसी जरूरी है। ऐसे में भाजपा की ओर से अपने वैचारिक संगठन आरएसएस के साथ तालमेल बढ़ाने पर फिर से जोर दिया जा रहा है।
नड्डा के बयान ने संघ के स्वयंसेवकों को किया था निराश!
वैसे नड्डा के बयान को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर-संघचालक मोहन भागवत ने उनका व्यक्तिगत बयान बताकर ज्यादा तूल नहीं दिया था। लेकिन, जब लोकसभा चुनावों के नतीजे सामने आए तो लगा कि इस बार संघ के स्वयंसेवकों ने पार्टी के लिए हमेशा की तरह से सक्रिय योगदान नहीं दिया है। पार्टी और संघ के बीच तालमेल की कमी की भी बातें सामने आई।
संघ पहले कब हुआ था भाजपा से दूर?
संभवत: आरएसएस की शक्ति को आंकने में यह भाजपा नेताओं की पहली भूल नहीं थी! लोकसभा चुनाव के परिणामों ने अटल-आडवाणी के उस दौर की भी याद दिला दी, जब कहा जाता था कि संघ के शीर्ष नेतृत्व और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में वरिष्ठता की समानता की वजह से दोनों संगठनों में दूरी आने लगी थी। कहा जाता है कि पार्टी को तब भी इसका चुनावी नुकसान हुआ था।
हरियाणा चुनाव को लेकर संघ-भाजपा नेताओं की हुई मैराथन बैठक
दो दिन पहले ही हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा नेताओं की एक बड़ी बैठक हुई है। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, प्रदेश के प्रभारी-महासचिव बिप्लब देब और उप-प्रभारी सुरेंद्र सिंह नागर उपस्थित हुए।
इस मैराथन बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी से लग सकता है कि इसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी शामिल हुए। बीजेपी में यह पद आरएसएस के प्रतिनिधि के लिए ही निर्धारित रखने की परंपरा रही है। इनके अलावा इस बैठक में संघ की ओर से सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार भी मौजूद रहे।
झारखंड चुनाव को लेकर भी संघ के नेता से मिल चुके हैं हिमंत बिस्वा सरमा
अरुण कुमार बीजेपी से जुड़े मसलों पर संघ की ओर से एक कड़ी का कार्य करते रहे हैं। यही वजह है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी उनके साथ चर्चा कर चुके हैं। असम के सीएम सरमा झारखंड में भाजपा के प्रभारी भी हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को लेकर भी संघ के नेताओं से हो चुकी है चर्चा
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के सिलसिले में भी ऐसी है एक बैठक हो चुकी है, जो दिनों तक चली। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव के अलावा अरुण कुमार और अतुल लिमये जैसे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
बता दें कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों के परिणामों को लेकर संघ से जुड़े कुछ विचारक और एक मराठी पत्रिका बीजेपी की नीतियों पर सवाल भी उठा चुके हैं। इनकी आपत्ति अजित पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन को लेकर रहा है और कहा है कि इससे पार्टी की छवि को नुकसान हुआ है।












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