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BJP President: नितिन नबीन कैसे बने BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष, हो गया खुलासा, स्कोर कार्ड ने खोल दिया राज

BJP President Nitin Nabin: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीति में जब भी कोई बड़ा फैसला होता है, उसके पीछे लंबी रणनीति और सटीक गणित छिपा होता है। भाजपा अध्यक्ष की रेस में शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, धर्मेंद्र प्रधान, बीएल संतोष जैसे बड़े नेताओं को पछाड़ कर नितिन नबीन भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें।

नितिन नबीन को BJP का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भी यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा गया कि इतने दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़कर आखिर उन्हें ही क्यों चुना गया। अब इस फैसले के पीछे का पूरा फॉर्मूला और स्कोर कार्ड सामने आ गया है, जिसने कई सियासी राज खोल दिए हैं।

BJP President Nitin Nabin

🟡 भाजपा के दिग्गजों को पछाड़कर नितिन नबीन का उदय

भाजपा अध्यक्ष की दौड़ में शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, धर्मेंद्र प्रधान और बीएल संतोष जैसे नाम शामिल थे। ऐसे में बिहार भाजपा के नेता नितिन नबीन का अचानक राष्ट्रीय स्तर पर उभरना कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा। लेकिन पार्टी नेतृत्व के नजरिए से देखें तो यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझकर उठाया गया कदम था।

नितिन नबीन फिलहाल राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके हैं और बिहार दौरे पर सक्रिय दिख रहे हैं। कार्यकर्ताओं से मुलाकात, धार्मिक स्थलों पर दर्शन और संगठन को साधने की कोशिशें इस बात का संकेत हैं कि पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मकर संक्रांति के बाद नितिन नबीन को स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

🟡 20 अंकों का स्कोर कार्ड और नितिन नबीन को अध्यक्ष बनने का फार्मूला

जी बिहार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए एक खास मूल्यांकन प्रणाली तैयार की थी। इसमें कुल 5 पैमाने तय किए गए थे और हर पैमाने के लिए 4 अंक रखे गए थे। यानी कुल स्कोर 20 अंकों का था। जो नेता सबसे ज्यादा अंक लाएगा, वही अध्यक्ष पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जाना था।

सूत्रों के मुताबिक नितिन नबीन को इस स्कोर कार्ड में 20 में से 17.5 अंक मिले। उनके आसपास भी कोई दूसरा नेता नहीं पहुंच पाया। दूसरे स्थान पर रहे नेता को 14 अंक और तीसरे पायदान पर मौजूद नेताओं को करीब 12 अंक ही मिल सके। इसी वजह से नितिन नबीन को 'डिस्टिंक्शन' के साथ शीर्ष पद के लिए चुना गया।

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🟡 ये थे वो 5 पैमाने, जिन पर हुआ फैसला

पहला पैमाना था कि नेता मूल रूप से हार्डकोर भाजपाई हो। दूसरा प्रशासनिक अनुभव से जुड़ा था। तीसरा राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए योगदान को देखता था। चौथा साफ-सुथरी छवि यानी किसी भी तरह के आरोप से मुक्त होना था। पांचवां पैमाना उम्र से जुड़ा था, जिसमें 40 से 50 साल के बीच की उम्र को आदर्श माना गया।

नितिन नबीन को पहले, चौथे और पांचवें पैमाने पर पूरे 4-4 अंक मिले। यानी इन तीन श्रेणियों से ही उन्होंने 12 अंक हासिल कर लिए। उनकी छवि बेदाग मानी जाती है, उम्र तय दायरे में है और वे किसी दूसरी पार्टी से आए नेता नहीं, बल्कि शुरू से भाजपा संगठन का हिस्सा रहे हैं।

🟡 कहां कटे नितिन नबीन के अंक?

प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय योगदान वाले पैमानों पर नितिन नबीन को पूरे अंक नहीं मिले। मंत्री पद पर उन्हें करीब 4 साल का ही अनुभव है, जबकि उनके कई प्रतिद्वंद्वियों के पास इससे कहीं ज्यादा लंबा प्रशासनिक रिकॉर्ड था। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर योगदान के मामले में उनके खाते में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सह प्रभारी के तौर पर मिली सफलता और मौजूदा प्रभारी की जिम्मेदारी रही। इसके बावजूद उन्हें इन दोनों पैमानों पर क्रमशः 2.5 और 3 अंक मिले और कुल स्कोर 17.5 तक पहुंच गया।

नितिन नबीन का भाजपा के शीर्ष पद तक पहुंचना महज किस्मत का खेल नहीं, बल्कि एक सटीक स्कोर कार्ड और रणनीतिक चयन का नतीजा है। यह फैसला आने वाले चुनावों और पार्टी की भविष्य की दिशा को भी तय करता दिख रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या नितिन नबीन स्थायी तौर पर भी भाजपा की कमान संभालते हैं और यह प्रयोग पार्टी को कितना फायदा पहुंचाता है।

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🟡 नितिन नबीन को भाजपा अध्यक्ष बनाकर बिहार को क्या संदेश दिया गया?

नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना सिर्फ एक संगठनात्मक फैसला नहीं है। यह बिहार को दिया गया एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि अब वह शहरी, पढ़े-लिखे और संगठन से तपकर निकले नेताओं को आगे बढ़ा रही है।

कायस्थ समाज में इस फैसले को खास तौर पर सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे इस वर्ग का आत्मविश्वास बढ़ेगा और युवा राजनीति की ओर आकर्षित होंगे। हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि पुराने और निष्क्रिय माने जाने वाले नेताओं के लिए यह खतरे की घंटी है। भाजपा ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ पहचान या जाति के नाम पर नहीं, बल्कि काम और नतीजों के आधार पर ही आगे बढ़ने का रास्ता खुलेगा।

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