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BJP President: PM मोदी डिनर में जिस नेता के कंधे पर हाथ रखकर चले, वही बनने जा रहे BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष?

BJP President Next: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2025 को अपने सरकारी आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एनडीए सांसदों को डिनर पर बुलाया था। इस कार्यक्रम को मीडिया में "डिनर डिप्लोमेसी" और गठबंधन की एकता दिखाने वाला कदम बताया गया था, खासकर बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी विजय के बाद। लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक सवाल जोर पकड़ गया कि क्या इसी डिनर की बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने जिस नेता के कंधे पर हाथ रखा, वही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहा है?

असल में ये चर्चा इसलिए भी हो रही है कि क्योंकि उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर केंद्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम लगभग फाइनल माना जा रहा है और 14 दिसंबर तक यूपी भाजपा अध्यक्ष का फैसला हो जाएगा। यूपी भाजपा अध्यक्ष के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की चर्चा होना लाजमी है।

BJP President Next

PM मोदी की डिनर पार्टी में तय हुआ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम?

ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिनर पार्टी में भाजपा के नए चीफ को लेकर बड़ा संदेश दिया है। मीडिया सोर्स के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास पर हुए NDA सांसदों के डिनर में पीएम मोदी एक नेता के कंधे पर हाथ रखकर कुछ दूर चले। वह बीजेपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहा है? हालांकि वो सांसद कौन हैं? इसको लेकर कोई अधिकारिक जानकारी नहीं आई है।

असल में इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला कि डिनर पार्टी के दौरान नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन का इशारा कहीं किया गया हो या किसी नाम को फाइनल किया गया हो। अभी तक भाजपा नेतृत्व या RSS की तरफ से कोई घोषणा नहीं आई है कि किसी खास सांसद को आगामी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए सांसदों या पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने संकेत दिया गया हो। लेकिन इस बात की जरूर सुगबुगाहट है कि कोई भाजपा सांसद ही अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेगा।

हालांकि बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया संगठन के आंतरिक नियमों, RSS के सहमति, और पार्टी संसदीय बोर्ड की बातचीत के बाद तय होती है। इसलिए किसी एक तस्वीर या पल को लेकर फाइनल फैसला कहना फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन चलिए हम आपको बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष की रेस में अब तक किन 5 नेताओं का नाम सबसे टॉप पर है।

बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस - टॉप दावेदार

बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए अभी तक कई नाम चर्चा में हैं। इनमें से कुछ प्रमुख चेहरे ऐसी पोजिशनिंग रखते हैं कि वे पार्टी की अगली कमान संभाल सकते हैं।

🔹 1. बीएल संतोष: केंद्रीय संगठन महासचिव रह चुके हैं, RSS के साथ मजबूत बॉन्ड रखते हैं और पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में लंबा अनुभव है।

🔹 2. धर्मेंद्र प्रधान: केंद्रीय मंत्री और ओबीसी समुदाय के प्रमुख चेहरे, बिहार में पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभाई है और संगठनात्मक नियंत्रण की क्षमता रखते हैं।

🔹3. शिवराज सिंह चौहान: केंद्रीय मंत्री हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता - भारतीय राजनीति के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक। उनके पास संगठन चलाने का लंबा अनुभव है।

🔹 4. मनोहर लाल खट्टर: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, शांत और संतुलित नेतृत्व की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। संगठन के लिये मजबूत विकल्प माने जाते हैं।

🔹5. भूपेंद्र यादव: भाजपा के वरिष्ठ नेता और संगठन का अनुभवी चेहरा। वे पार्टी में 'ट्रबलशूटर' के तौर पर पहचाने जाते हैं और संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाते हैं।

इसके साथ ही चर्चाओं में कुछ और बड़े नाम भी लगातार उभर रहे हैं। इनमें प्रह्लाद जोशी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, विनोद तावड़े और सीआर पाटिल जैसे प्रभावशाली नेताओं को भी संभावित दावेदार माना जा रहा है।

महिला नेताओं की बात करें तो एक वक्त पर निर्मला सीतारमण, डी पुरंदेश्वरी और वनथी श्रीनिवासन के नाम भी प्रमुखता से लिए जा रहे थे, लेकिन फिलहाल राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए उनकी दावेदारी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक साल से अटका पड़ा

बीजेपी में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति पिछले एक साल से लंबित है। पार्टी के 29 राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश और कर्नाटक अभी भी लंबित हैं। बिहार में भी दिलीप जायसवाल के मंत्री बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। ऐसे माहौल में पार्टी शीर्ष नेतृत्व एक साथ कई अहम फैसले लेने की तैयारी में है।

जेपी नड्डा का कार्यकाल और बदलाव की जरूरत

जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही खत्म हो गया था, लेकिन चुनावी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें लगातार विस्तार दिया गया। पार्टी संविधान में संशोधन कर उन्हें पद पर बनाए रखा गया। संगठन और आरएसएस के बीच यह समझ बनी है कि अब पार्टी को एक नए चेहरे और नई ऊर्जा की जरूरत है। RSS की इच्छा है कि अगला अध्यक्ष केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक मजबूत संगठनात्मक कमांडर हो।

धर्मेंद्र प्रधान क्यों दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं?

बिहार विधानसभा चुनाव में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने जमीन पर रहकर बागी नेताओं को साधा, टिकट विवाद सुलझाए और बूथ प्रबंधन को मजबूत किया। उनकी यह रणनीति एनडीए की प्रचंड जीत की बड़ी वजह बनी। पार्टी स्रोतों का मानना है कि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

रिपोर्ट के मुताबिक पहले दक्षिण भारत से अध्यक्ष बनने की अटकलें थीं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद समीकरण पूर्वी भारत की ओर झुक गए हैं, जहां धर्मेंद्र प्रधान पूरी तरह फिट बैठते हैं।

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