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Jewar Airport Explainer: कितनी लागत से बना? कितनी फ्लाइट्स चलेंगी-कनेक्टिविटी? कितने टर्मिनल?-7 सवालों के जवाब

Noida Jewar Airport Explainer: नोएडा के जेवर में बनने वाला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर भारत के भविष्य की एक बड़ी तस्वीर बन चुका है। लंबे इंतजार के बाद 28 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब Narendra Modi इसका उद्घाटन कर रहे हैं। यह एयरपोर्ट सिर्फ दिल्ली-NCR का बोझ कम करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों को नई रफ्तार देने के लिए तैयार किया गया है।

अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर इस एयरपोर्ट में ऐसा क्या खास है, कितनी लागत आई, कितनी फ्लाइट्स चलेंगी, और इससे आपको क्या फायदा होगा, तो चलिए इसे पूरी तरह आपके हर सवाल का जवाब समझते हैं....

Noida International Airport Jewar Project

Q1. नोएडा जेवर एयरपोर्ट कितनी लागत से बना है? पूरी परियोजना की लागत क्या है और फेज-1 में कितना खर्च हुआ?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट है। यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित हो रहा है। फेज-1 की कुल निवेश लागत ₹11,200 करोड़ है। इसमें भूमि अधिग्रहण पर लगभग ₹5,000 करोड़ और निर्माण पर करीब ₹7,000 करोड़ खर्च हुए हैं। पुराने अनुमानों में फेज-1 की लागत ₹4,588 करोड़ बताई जाती थी, लेकिन अंतिम अपडेटेड फिगर ₹11,200 करोड़ है।

पूरी परियोजना (4-5 फेज में) की कुल अनुमानित लागत ₹29,650 करोड़ है। यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शुमार होगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 के बजट में अतिरिक्त ₹750 करोड़ जेवर एयरपोर्ट के विस्तार और भूमि अधिग्रहण के लिए आवंटित किए हैं। कुल 6,700 एकड़ भूमि अधिग्रहित हो चुकी है (पहले चरण में 3,300 एकड़), बाकी 5,100 एकड़ अगले कुछ महीनों में अधिग्रहण होगा। यह लागत सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि सस्टेनेबल, नेट-जीरो एमिशन एयरपोर्ट बनाने में भी लगी है - सोलर पैनल, एनर्जी एफिशिएंट सिस्टम और ग्रीन टेक्नोलॉजी शामिल हैं।

Q2. जेवर एयरपोर्ट में कितने टर्मिनल और रनवे होंगे? फेज-वाइज प्लान क्या है?

फेज-1 (28 मार्च 2026 को उद्घाटन):

  • - 1 टर्मिनल (T1)
  • - 1 रनवे (3,900 मीटर लंबा, CAT-I ILS सिस्टम के साथ)
  • - वार्षिक यात्री क्षमता: 1.2 करोड़ (12 मिलियन पासेंजर्स पर ईयर - MMPA)
  • - औसतन 150 फ्लाइट्स प्रतिदिन
  • - 10 एयरोब्रिज, 28 एयरक्राफ्ट पार्किंग स्टैंड्स, कार्गो टर्मिनल और MRO (मेन्टेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर

भविष्य के फेज (2027-2040 तक):

  • - कुल 4-5 टर्मिनल
  • - 5-6 रनवे (दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स जैसा)
  • - पूरी क्षमता: 7 करोड़ (70 मिलियन) यात्री प्रति वर्ष (कुछ प्लान्स में 16 करोड़ तक)
  • - 400से ज्यादा एयरक्राफ्ट गेट्स, हाई-स्पीड रेल और मेट्रो स्टेशन, होटल, शॉपिंग मॉल, लॉजिस्टिक्स हब

95% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 10 नवंबर 2025 तक फेज-1 पूरी तरह तैयार था। यात्रियों की संख्या 1 करोड़ पार करते ही दूसरा रनवे शुरू होगा। यह दिल्ली के IGI एयरपोर्ट का लोड कम करेगा और NCR को दूसरा बड़ा एविएशन हब देगा।

Q3. जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी कितनी बेहतरीन है? सड़क, रेल और एयर नेटवर्क की डिटेल बताएं।

जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी है। यह सिर्फ एयरपोर्ट नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट हब बनेगा:

सड़क कनेक्टिविटी:

Noida International Airport Jewar Project
  • यमुना एक्सप्रेसवे से सीधा लिंक (पहले से जुड़ा)
  • ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से क्लोवरलीफ इंटरचेंज (2019 में प्लान, अब पूरा होने वाला)
  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का 31 किमी लिंक रोड (₹3,631 करोड़ की लागत, NHAI प्रोजेक्ट) - दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना से जुड़ेगा। 7 किमी नोएडा खंड पहले से तैयार, बाकी 2027 तक।
  • जेवर टोल प्लाजा से नई सड़कें - माल परिवहन के लिए खास डिजाइन।

रेल कनेक्टिविटी:

Noida International Airport Jewar Project
  • प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (दिल्ली-वाराणसी)
  • मेट्रो और रीजनल रेल कनेक्शन (YEIDA क्षेत्र में)
  • भविष्य में हाई-स्पीड ट्रेन स्टेशन एयरपोर्ट परिसर में

एयर नेटवर्क:

Noida International Airport Jewar Project
  • - शुरुआत में डोमेस्टिक से ज्यादा कार्गो फ्लाइट्स
  • - जल्द ही इंटरनेशनल फ्लाइट्स (इंडिगो, अन्य एयरलाइंस ट्रायल रन कर चुकी हैं)
  • - कुल मिलाकर NCR, पश्चिमी UP, हरियाणा और राजस्थान को 2-3 घंटे में कनेक्ट करेगा।

Q4. जेवर एयरपोर्ट से किस-किसको सुविधा मिलेगी? क्षेत्र और सेक्टर के अनुसार फायदे बताएं।

यह एयरपोर्ट उत्तर भारत का आर्थिक इंजन बनेगा। मुख्य लाभार्थी:-

क्षेत्रीय फायदा:

  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश (गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा आदि) - पहले दिल्ली जाना पड़ता था, अब लोकल हब।
  • दिल्ली-NCR (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद) - IGI का 30-40% ट्रैफिक शिफ्ट होगा।
  • हरियाणा और राजस्थान के बॉर्डर एरिया - आसान एक्सेस।
  • कुल 2 करोड़से ज्यादा लोगों को सीधी सुविधा।

सेक्टर-वाइज फायदा:

  • - उद्योग और लॉजिस्टिक्स: कार्गो टर्मिनल से निर्यात-आयात आसान। MRO सेंटर से एयरक्राफ्ट रिपेयर हब बनेगा।
  • - रियल एस्टेट: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी कीमतें 2-3 गुना बढ़ चुकी हैं। YEIDA सिटी में नई जॉब्स और हाउसिंग।
  • - रोजगार: हजारों डायरेक्ट से ज्यादा लाखों इनडायरेक्ट जॉब्स (कंस्ट्रक्शन, ऑपरेशन, टूरिज्म, होटल, रिटेल)।
  • - टूरिज्म और व्यापार: अयोध्या, वाराणसी, आगरा जैसे सर्किट से आसान कनेक्शन।
  • - कृषि और MSME: पश्चिमी UP के किसानों को फल-सब्जी एक्सपोर्ट आसान।
  • - अर्थव्यवस्था: UP को ₹1 लाख करोड़ का अतिरिक्त योगदान (CM योगी का अनुमान)।

Q5. उत्तर प्रदेश में कितने नेशनल (डोमेस्टिक) और इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं?

इंटरनेशनल एयरपोर्ट (कुल 5 - भारत में सबसे ज्यादा किसी राज्य में):

  • 1. चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लखनऊ
  • 2. लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, वाराणसी
  • 3. कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट
  • 4. मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एयरपोर्ट (अयोध्या) - अपग्रेडेड
  • 5. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) - नया

डोमेस्टिक/नेशनल एयरपोर्ट और अन्य (कुल 15-16 ऑपरेशनल से ज्यादा विकास में):

  • गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, बरेली, हिंदन (गाजियाबाद), झांसी, आगरा, अलीगढ़, अयोध्या (पुराना), श्रावस्ती, चित्रकूट आदि।
  • कुल मिलाकर UP में 21 एयरपोर्ट (ऑपरेशनल से ज्यादा प्रस्तावित/अंडर कंस्ट्रक्शन) - भारत का पहला राज्य।

Q6. PM मोदी (2014-2026) और CM योगी (2017-2026) के वक्त में UP में कितने एयरपोर्ट बने या अपग्रेड हुए?

2017 से पहले UP में सिर्फ 2-4 फंक्शनल एयरपोर्ट थे (मुख्यतः लखनऊ और वाराणसी)। मोदी-योगी सरकार में एविएशन क्रांति आई:

  • नए इंटरनेशनल: कुशीनगर, अयोध्या, जेवर (2026)
  • अपग्रेड: हिंदन सिविल टर्मिनल, अयोध्या को इंटरनेशनल दर्जा
  • UDAN स्कीम के तहत कई छोटे एयरपोर्ट: अलीगढ़, अयोध्या, चित्रकूट, आजमगढ़, मुरादाबाद आदि
  • कुल 16 डोमेस्टिक से ज्यादा 5 इंटरनेशनल (2017 में सिर्फ 4-5 कुल)।

CM योगी ने कहा - '2017 में 2.5 एयरपोर्ट थे, आज 16 डोमेस्टिक से ज्यादा 4 इंटरनेशनल (जेवर के बाद 5)।' भारत में कुल एयरपोर्ट 2014 के 74 से बढ़कर 140से ज्यादा हो गए। UP में एविएशन सेक्टर 10 गुना बढ़ा।

Q7. किसी एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा कब मिलता है? भारत में क्या शर्तें हैं?

भारत में DGCA (Directorate General of Civil Aviation) और गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार इंटरनेशनल दर्जा मिलता है जब:

  • 1. एरोड्रोम लाइसेंस DGCA से मिल जाए (जेवर को हाल ही में मिला)।
  • 2. कस्टम्स, इमिग्रेशन और सिक्योरिटी सुविधाएं पूरी हों (BCAS, CISF, इमिग्रेशन काउंटर)।
  • 3. ICAO/IATA स्टैंडर्ड - रनवे लंबाई, ILS, नेविगेशन सिस्टम, फायर सेफ्टी आदि।
  • 4. इंटरनेशनल फ्लाइट्स की अनुमति - विदेशी एयरलाइंस ऑपरेट कर सकें।
  • 5. सरकार की मंजूरी (MoCA)।

जब एयरपोर्ट से सीधी विदेशी उड़ानें शुरू हो जाती हैं और सभी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो, तब "इंटरनेशनल एयरपोर्ट" कहा जाता है। जेवर में फेज-1 में ही इंटरनेशनल ऑपरेशंस शुरू होंगे।

जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि उत्तर भारत का नया विकास इंजन है। यह दिल्ली का ट्रैफिक बोझ हल करेगा, पश्चिमी UP को एविएशन हब बनाएगा, लाखों रोजगार देगा और अर्थव्यवस्था को ₹1 लाख करोड़ का बूस्ट देगा। मोदी-योगी की दूरदर्शिता से UP आज भारत का एविएशन लीडर राज्य बन गया है।

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