BJP President: भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश से होगा! इन 2 नेताओं का नाम सबसे आगे, कौन हैं ये?
BJP NEXT president: भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर इस बार सियासत खूब गर्म है। बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी के भीतर नए अध्यक्ष के नाम को लेकर हलचल तेज हो गई है। अंदर की खबर यह है कि भाजपा दिसंबर 2025 से पहले कभी भी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक एक बात जोर पकड़ रही है - इस बार भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश से हो सकता है।
उत्तर प्रदेश से दो बड़े नाम लगातार चर्चा में हैं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और राज्यसभा सांसग व यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा। दोनों ही नेता संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं और दोनों की जाति-समीकरण राजनीति को खास दिशा देने में सक्षम मानी जा रही है। अगर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष यूपी से बनाती है तो ये चौथी बार होगा, जब इस राज्य का कोई नेता भाजपा का मुखिया बनेगा। ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिर भाजपा इस बार यूपी से क्यों अपना अगला चीफ चाहती है और केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा का नाम रेस में क्यों सबसे आगे है।

🔶 यूपी से क्यों चाहती है भाजपा अपना नया अध्यक्ष?
सूत्रों का कहना है कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से मजबूत करना चाहती है। यूपी भाजपा का सबसे बड़ा राजनीतिक गढ़ है और यहां से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर सीधे तौर पर संगठन की पकड़ और मजबूत हो जाती है। इसीलिए पार्टी इन दो दावेदारों - केशव मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा - पर गंभीरता से विचार कर रही है।
🔶 राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस: OBC और ब्राह्मण चेहरों में मुकाबला
राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए पिछड़े वर्ग से शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, मनोहर लाल खट्टर और सुनील बंसल जैसे नाम पहले से चर्चा में थे। लेकिन बिहार चुनाव जीतने के बाद अचानक समीकरण बदले और केशव प्रसाद मौर्य का नाम सबसे आगे निकल आया। केशव प्रसाद मौर्य OBC (कुशवाहा) जाति से हैं। वहीं उनके साथ ब्राह्मण समाज से आने वाले डॉ. दिनेश शर्मा का नाम भी तेजी से उभरा है। यह मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा की जाति-समीकरण रणनीति पर निर्भर दिख रहा है - OBC बनाम ब्राह्मण। हालांकि भाजपा का ज्यादा फोकस इन दिनों OBC पर है।

🔶 केशव प्रसाद मौर्य क्यों हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दावेदार? जानें उनका सफर
केशव प्रसाद मौर्य भाजपा-आरएसएस परिवार के बेहद पुराने कार्यकर्ताओं में से रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर बजरंग दल और आरएसएस से शुरू हुआ। वे विहिप के दिग्गज चेहरे डॉ. अशोक सिंघल के बेहद करीबी माने जाते हैं। यही वजह है कि संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया।
केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर
- 2012 में पहली बार सिराथू (कौशांबी) से विधायक चुने गए।
- 2014 में फूलपुर से सांसद बने।
- 2016 में भाजपा ने उन्हें यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया।
- 2017 में उनके नेतृत्व में भाजपा ने 312 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।
- इसके बाद उन्हें यूपी का डिप्टी सीएम और पीडब्ल्यूडी जैसा शक्तिशाली मंत्रालय दिया गया।
- भाजपा ने उन्हें पिछड़े वर्ग का सबसे बड़ा चेहरा बनाने की रणनीति अपनाई। 2018 में OBC समाज की सभी जातियों के सम्मेलन का नेतृत्व भी केशव ने ही किया था।
🔶 OBC कार्ड क्यों है केशव प्रसाद मौर्य ताकत?
केशव प्रसाद मौर्य कुशवाहा (ओबीसी) समुदाय से आते हैं। यह वही समुदाय है जो यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड जैसे राज्यों में बड़ी राजनीतिक ताकत रखता है। यही वजह है कि केंद्र और भाजपा संगठन में उन्हें मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
🔶 केशव प्रसाद मौर्य की हाल की मीटिंग्स और संकेत
केशव साद मौर्य ने हाल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। हर मुलाकात के बाद उनका नाम और तेजी से उभरा। यह भी अहम है कि 2022 में सिराथू सीट हारने के बाद भी उन्हें डिप्टी सीएम पद पर बनाए रखा गया। इससे उनका राजनीतिक वजन साफ झलकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर केशव साद मौर्य की जिम्मेदारियां भी बढ़ीं हैं। पीएम मोदी ने भगवान बुद्ध का अस्थि कलश लेकर रूस भेजने की जिम्मेदारी भी केशव प्रसाद मौर्य को दी। उन्हें बिहार चुनाव में सह-प्रभारी बनाया गया। बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में भी सह-प्रभारी थे। इन सभी संकेतों से साफ है कि भाजपा पिछड़े वर्ग को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश देना चाहती है और उसके लिए केशव सबसे उपयुक्त नाम हैं।

🔶 डॉ. दिनेश शर्मा क्यों हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दावेदार? जानें उनका सफर
डॉ. दिनेश शर्मा, एक ऐसा नाम जिसके पास संगठन, सरकार और संसद तीनों में लगभग तीन दशक का अनुभव है। डॉ. शर्मा एक ब्राह्मण परिवार से आते हैं। उनके पिता केदारनाथ शर्मा RSS और जनसंघ से जुड़े थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1964 को लखनऊ में हुआ था। लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में वहीं प्रोफेसर बन गए। डॉ. दिनेश शर्मा ने 20 से ज्यादा छात्रों को PhD कराई और 6 किताबें लिखीं हैं।
डॉ. दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर
- 1987: ABVP लखनऊ अध्यक्ष
- 1991: BJYM प्रदेश उपाध्यक्ष
- 1993-1998: BJYM प्रदेश अध्यक्ष
- राष्ट्रीय युवा आयोग के अध्यक्ष
- 2007-2017: लखनऊ के मेयर
- 2014: भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
- 2017-2022: यूपी के डिप्टी सीएम
- 2023: राज्यसभा सदस्य
- 2024: महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव प्रभारी
डॉ. दिनेश शर्मा भाजपा में ब्राह्मण चेहरे के रूप में बेहद प्रभावी माने जाते हैं। उनकी छवि शांत, संयमी और संगठन के विश्वसनीय नेता की है।

🔶 क्यों है दिनेश शर्मा की दावेदारी मजबूत?
दिनेश शर्मा की दावेदारी इसलिए मजबूत है क्योंकि वो उत्तर भारत में भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल हैं। योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी दोनों के भरोसेमंद हैं, संघ और भाजपा के बीच समन्वय की बेहतरीन समझ भी है। इतना ही नहीं संगठन चलाने का लंबा अनुभव और भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरी पकड़ भी है। हालांकि उनकी दावेदारी का एक बड़ा चैलेंज है अभी भाजपा का फोकस OBC पर ज्यादा है। यही वजह है कि अंतिम निर्णय में यह फैक्टर भारी पड़ सकता है।
🔶 किस पर टिकेगी भाजपा की नजर?
ओबीसी बनाम ब्राह्मण यह मुकाबला भाजपा के जातीय समीकरण को तय करेगा। अगर पार्टी 2027 के यूपी चुनाव और राष्ट्रव्यापी OBC संदेश पर जोर देना चाहती है, तो केशव प्रसाद मौर्य सबसे मजबूत दावेदार हैं। लेकिन अगर भाजपा उत्तर भारत और दक्षिण भारत में ब्राह्मणों को साधने की रणनीति अपनाती है, तो डॉ. दिनेश शर्मा भी उतना ही मजबूत विकल्प हैं। आखिरी फैसला अब दिल्ली की मीटिंग्स पर निर्भर है। सूत्रों के मुताबिक फैसला कभी भी हो सकता है और इस बार भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश से आना लगभग तय माना जा रहा है।












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