BJP President: भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा और कब तक होगा चुनाव? आ गया अपडेट, 4 नाम टॉप पर
BJP President Update News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। स्वतंत्रता दिवस के बाद पार्टी अपने नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कुछ राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने के बाद केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मति से एक नाम पर मुहर लगाई जाएगी। हालांकि, अध्यक्ष पद के चयन में हो रही देरी से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की भावना भी देखने को मिल रही है।
RSS ने दिया 'न्यूट्रल और अनुभवी' चेहरे का सुझाव
भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने सलाह दी है कि ऐसा व्यक्ति अध्यक्ष बने, जो संगठनात्मक रूप से अनुभवी हो और पार्टी के अंदर किसी गुट विशेष से न जुड़ा हो। इसी दिशा में पार्टी ने चार संभावित चेहरों को शॉर्टलिस्ट किया है।

BJP New Party President: ये हैं भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे के 4 नाम
- 1. भूपेंद्र यादव (केंद्रीय शिक्षा मंत्री)
- 2. धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पर्यावरण मंत्री)
- 3. शिवराज सिंह चौहान ( केंद्रीय कृषि मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश)
- 4. बीडी शर्मा (वरिष्ठ भाजपा नेता)
इन सभी नेताओं का संगठनात्मक अनुभव काफी मजबूत रहा है और पार्टी की जमीनी राजनीति में इनकी सक्रिय भूमिका रही है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि RSS ने भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान के लिए हामी नहीं भरी है।
जल्द होगी केंद्रीय परिषद की बैठक
भाजपा की केंद्रीय परिषद की बैठक जल्द बुलाई जाएगी, जिसमें इन नामों पर चर्चा कर सहमति बनाई जाएगी। एक वरिष्ठ नेता ने बताया, "अब लगभग तय माना जा रहा है कि 15 अगस्त के बाद ही पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम सामने आएगा।"
संगठनात्मक चुनाव भी अंतिम चरण में
इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव प्रभारी डॉ. के. लक्ष्मण ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित 10 राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अध्यक्ष पद के नाम की घोषणा के लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।
RSS से मतभेद के चलते BJP अब तक नहीं चुन पाई नया राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच पिछले एक वर्ष में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पार्टी आज तक अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है।
जनवरी 2020 में जेपी नड्डा को तीन साल के लिए पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया, लेकिन जनवरी 2023 में उन्हें जून 2024 तक के लिए विस्तार दिया गया। अब जून 2024 के भी एक साल बाद बीतने के बावजूद नड्डा अभी भी अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं।
RSS का बढ़ता हस्तक्षेप
मई 2024 में नड्डा द्वारा RSS को "सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन" कहे जाने से लेकर जुलाई 2025 में संघ द्वारा नड्डा के उत्तराधिकारी की नियुक्ति में सख्त रुख अपनाने तक, हालात तेजी से बदले हैं। खासकर तब से जब 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा को बहुमत नहीं मिला।
BJP के नए चीफ का नाम तय फिर भी नियुक्ति नहीं
पार्टी में लंबे समय से नड्डा के उत्तराधिकारी के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल खट्टर जैसे नेताओं के नाम चर्चा में रहे हैं। फिर भी अध्यक्ष की घोषणा न हो पाना यह दिखाता है कि 11 वर्षों बाद संघ दोबारा अपना प्रभाव स्थापित करने में जुट गया है।
2014 में जब मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने और भाजपा को बहुमत मिला, तब से सरकार और संगठन में मोदी-शाह की जोड़ी का वर्चस्व कायम हो गया। मुख्यमंत्री बदलना हो या वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करना - सब कुछ इस जोड़ी के निर्णय पर आधारित था।
2014 से 2024 तक के 10 वर्षों में पीएम नरेंद्र मोदी एक बार भी नागपुर स्थित संघ मुख्यालय नहीं गए। इस दौरान RSS की भूमिका भी लगातार सीमित होती गई। नड्डा का बयान कि "BJP अपने काम खुद संभाल सकती है", RSS के प्रभाव की गिरावट का संकेत था।
2024 का चुनाव परिणाम बना टर्निंग पॉइंट
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें घटकर 303 से 240 रह गईं। यह नतीजे संघ के लिए एक मौका बन गया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने चुनाव के तुरंत बाद एक सख्त संदेश देते हुए कहा कि "सच्चा सेवक अहंकारी नहीं होता" -इसे मोदी पर अप्रत्यक्ष निशाना माना गया।
अध्यक्ष पद पर RSS की शर्तें और बीजेपी का संकट
द वायर ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि मोदी और शाह चाहते हैं कि अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किसी उनके वफादार को मिले, जबकि संघ एक ऐसे नेता की मांग कर रहा है जिसकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत हो और जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
इस गतिरोध की वजह राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। मोहन भागवत के हालिया बयान -जिसमें उन्होंने 75 वर्ष की उम्र में सक्रिय राजनीति से हटने की बात कही -ने एक बार फिर सियासी हलकों में हलचल मचा दी। गौरतलब है कि सितंबर 2025 में मोदी और भागवत दोनों 75 वर्ष के हो जाएंगे।
वहीं जून-जुलाई 2025 में जिन नेताओं को राज्य इकाइयों का अध्यक्ष बनाया गया है, वे ज्यादातर संघ से नजदीकी रखने वाले हैं और राज्य के बड़े चेहरे नहीं हैं। यह भी संकेत देता है कि पार्टी में संघ का प्रभाव फिर से बढ़ रहा है।
मोदी-शाह की पसंद को RSS अब तक हरी झंडी नहीं दे सका है, जिससे राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति का मामला पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता जा रहा है। अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि 21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के पहले पार्टी नया अध्यक्ष नहीं चुन पाएगी।












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