BJP सांसद निशिकांत दुबे का आरोप- महुआ मोइत्रा ने मुझे 'बिहारी गुंडा' कहा
नई दिल्ली, जुलाई 28: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को ट्वीट कर आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें "बिहारी गुंडा" कहा। निशिकांत दुबे का दावा है कि संसद की आईटी समिति की मीटिंग में सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें तीन बार बिहारी गुंडा कहकर अपमानित किया। निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर से भी इस मामले की शिकायत की है। इस संबंध में भाजपा सांसद ने कुछ ट्वीट किए हैं।

अपने पहले ट्वीट में निशिकांत दुबे ने लिखा कि, लोकसभा अध्यक्ष जी, अपने 13 साल के संसदीय जीवन में पहली बार गाली सुना, तृणमूल कांग्रेस की सदस्य महुआ मोइत्रा द्वारा बिहारी गुंडा आईटी कमिटी के मीटिंग में तीन बार बोला गया।ओम बिरला जी, शशि थरूर जी ने इस संसदीय परम्परा को खत्म करने की सुपारी ले रखी है। तृणमूल कांग्रेस ने बिहारी गुंडा शब्द का प्रयोग कर बिहार के साथ साथ पूरे हिन्दी भाषी लोगों को गाली दी है।

उन्होंने आगे लिखा कि, ममता बनर्जी आप की सांसद महुआ मोइत्रा की इस गाली ने उत्तर भारतीय व खासकर हिंदी भाषी लोगों के प्रति आपके पार्टी के नफरत को देश के सामने लाया है। निशिकांत दुबे के आरोप का जवाब देते हुए मोहुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया कि जब समिति की बैठक हुई ही नहीं तो वो किसी को कैसे गाली दे सकती हैं। मोइत्रा ने ट्वीट किया, आईटी की मीटिंग नहीं हुई क्योंकि कोरम पूरा नहीं हुआ। सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। मैं किसी को ऐसे नाम से कैसे बुला सकती हूं जो मौजूद ही नहीं था। अटेंडेंस शीट चेक करें।
सूत्रों का कहना है कि निशिकांत दुबे मीटिंग में गए थे लेकिन कमिटी के चेयरमैन शशि थरूर पर मनमाने तरीके से कमिटी को चलाने के विरोध में अटेंडेंस पर हस्ताक्षर नहीं किया। बैठक में समिति के बीजेपी सदस्य तो पहुंचे लेकिन उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। ऐसे में बैठक में शामिल कांग्रेस समेत गैर एनडीए सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि बिना रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए बैठक में शामिल नहीं हो सकते। इसके बाद शशि थरूर ने कोरम की कमी के नियम का हवाला देते हुए बैठक स्थगित कर दी।
बैठक स्थगित होने के बाद समिति के सदस्य और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम्बरम ने ट्वीट कर दावा किया कि बैठक में बुलाए गए आईटी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारी भी नहीं पहुंचे। बुधवार को इस कमिटी की मीटिंग थी जिसमें दोनों विभागों के अधिकारियों को पेगासस जासूसी कांड पर बुलाया गया था।












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