कांग्रेस के बैन लगाने के प्रस्‍ताव पर BJP हुई आगबबूला, दी चेतावनी- 'RSS को छूते हैं तो हम दिखा देंगे क्या हैं'

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के मैदानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। इसके अलावा, उन्होंने सार्वजनिक पार्कों और मुजराई (धार्मिक ट्रस्ट द्वारा संचालित) मंदिरों में भी आरएसएस के आयोजनों पर रोक लगाने की अपील की है।

कांग्रेस पार्टी की सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे के इस प्रस्‍ताव पर भापजा भड़क उठी हे। भाजपा नेताओं ने इस प्रस्‍ताव की घोर निंदा करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा सीएम सिद्धारमैया को लिखे पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जमकर लताड़ लगाई है।

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प्रहलाद जोशी ने कहा कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी जैसे पूर्व कांग्रेस अध्यक्षों ने भी कोशिश की थी, लेकिन वे अपने कार्यों का बचाव करने में असमर्थ रहे।

RSS गुटबाजी और विभाजन से मुक्‍त है

जोशी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा करते हुए कहा, "मेरा मानना ​​है कि आरएसएस पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा संगठन है जो गुटबाजी और विभाजन से मुक्त है। यह इस स्तर तक बढ़ गया है कि कुछ स्थानों पर प्रवेश को प्रतिबंधित करने से बहुत कुछ नहीं बदलेगा।"

पीएम से लेकर सीएम तक आरएसएस के सक्रिय सदस्‍य हैं

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अधिकांश राज्यों में मंत्री, विधायक और सांसद इसी विचारधारा के हैं। जोशी ने आगे कहा, "मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक, कई लोग आरएसएस के सक्रिय सदस्य हैं।"

कांग्रेस मुस्लिम लीग के प्रति सहानुभूति रखती है

कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए जोशी ने कहा कि कांग्रेस नेता मुस्लिम लीग के प्रति सहानुभूति रखते हैं और पीएफआई तथा एसएफआई का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, "वे राष्ट्रवादी ताकतों का विरोध करते हैं क्योंकि कांग्रेस कभी भी राष्ट्रवादी विचारधारा में विश्वास नहीं करती है।"

कांग्रेस के मूर्ख सदस्य आरएसएस के बारे में नहीं जानते

वहीं कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक आर. अशोक ने कहा, "मुझे लगता है कि कांग्रेस के मूर्ख सदस्य आरएसएस के बारे में नहीं जानते। नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक, सभी ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की। कुछ नहीं हुआ। अब, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और हर कोई आरएसएस का सदस्य है। कांग्रेस के लोग कहां हैं? उनके पास कितने विधायक और सांसद हैं? कुछ भी नहीं। वे हर जगह शून्य हैं। मुझे लगता है कि यह बयान केवल मीडिया के उद्देश्य के लिए है। वे कुछ नहीं कर सकते। वे आरएसएस को छू भी नहीं सकते। अगर वे छूते हैं, तो हम उन्हें दिखा देंगे कि आरएसएस क्या है..."

प्रियांक खड़गे ने सरकार को क्‍या लिखा?

चार अक्टूबर को लिखे इस पत्र में प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया कि आरएसएस सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ सार्वजनिक पार्कों में अपनी शाखाएं चला रहा है। इन शाखाओं में नारे लगाए जाते हैं, और बच्चों व युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह पत्र रविवार को मीडिया के साथ साझा किया।

आरएसएस की विचारधारा पर उठाया सवाल?

कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा भारत की एकता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, "जब समाज में नफरत फैलाने वाली विभाजनकारी ताकतें सिर उठाती हैं, तो हमारा संविधान, जो ईमानदारी, समानता और एकता के सिद्धांतों पर आधारित है, ऐसी ताकतों को रोकने और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करने का अधिकार देता है।"

अनुमति के बिना लाठी लेकर आरएसएस आक्रामक प्रदर्शन कर रही

प्रियांक ने यह भी आरोप लगाया कि अनुमति के बिना लाठी लेकर आक्रामक प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जो बच्चों और युवाओं पर मानसिक रूप से बुरा असर डालते हैं। मंत्री ने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, "देश के बच्चों, युवाओं, जनता और पूरे समाज के हित में मैं विनम्र आग्रह करता हूं कि आरएसएस की ओर से किए जाने वाले सभी कार्यक्रमों, चाहे वह शाखा या बैठक के नाम पर हों, पर प्रतिबंध लगाया जाए।"

स्‍कूलों, पार्को में आरएसएस के कार्यक्रमों पर बैन लगाने की मांग

खरगे ने आगे कहा कि यह प्रतिबंध सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, सार्वजनिक खेल के मैदानों, पार्कों, मुजराई विभाग के मंदिरों, पुरातत्व विभाग की देखरेख वाली जगहों और अन्य सभी सरकारी परिसरों पर लागू होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान नागरिकों और राज्य दोनों को यह अधिकार देता है कि वे समाज में विभाजन फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करें और देश के धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें।

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