Bindeshwar Pathak ने खुले में शौच की लड़ाई लड़ी और बने 'टॉयलेट मैन', सुलभ शौचालय की बदौलत लाखों को दिया रोजगार
Bindeshwar Pathak: सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना करके सुलभ शौचालय को इंटरनेशनल ब्रांड बनाने वाले बिंदेश्वर पाठक अब हमारे बीच नहीं रहे। बिहार का ये लाल जिसने दुनिया भर को सुलभ शौचालय क कॉन्सेप्ट दिया और भारत का नाम स्वच्छता के क्षेत्र में रौशन करवाया उस शख्स ने आज स्वतंत्रता दिवस के दिन अंतिम सांस ली। दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में झंडारोहड़ करने के बाद उनको अचानक दिल का दौरा पड़ा और दिल्ली एम्स में पहुंचने के कुछ समय बाद उन्होंने दुनिया को सदा के लिए अलविदा कर दिया।

खुले में शौच करने के खिलाफ लड़ाई लड़ी
बिंदेश्वर पाठक भले ही अब दुनिया में नहीं रहे लेकिन उन्होंने अपनी जवानी से लेकर 80 साल की उम्र तक जो काम किया वो भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। इसकी वजह है कि बिंदेश्वर पाठक खुले में शौच करने के खिलाफ लड़ाई लड़ी और मैला ढोने वालों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ा। वर्ष 1991 में पाठक को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। सुलभ शौचालय की वजह से उन्होंने लाखों लोगों को रोजगार दिया।
सुलभ शौचालय को बनाया इंटरनेशनल ब्रांड
बिहार के वैशाली जिले के रामपुर बाघेल गांव में एक ब्राह्मण परिवार में जन्में डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक ने 1970 में सुलभ इंटरनेशल सामाजिक संगठन की स्थापना कर अनोखे आंदोलन की शुरूआत की। पाठक ने दो गड्ढों वाला फ्लश टॉयलेट डेवलप किया। इसके अलावा डिस्पोजल कम्पोस्ट शौचालय का आविष्कार किया जिसे कम खर्च पर अपने आस-पास मौजूद समान से बनाया जा सकता था।
बिंदेश्वर पाठक ने किया ये अविष्कार
डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक ने सुलभ शौचालयों के द्वारा बिना दुर्गंध वाली बायोगैस के प्रयोग की खोज की। जिसका इस्तेमाल भारत समेत अन्य देशों में बृहद स्तर पर होता है। पाठक ने सुलभ शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट का खाद के तौर पर कैसे प्रयोग किया जाए ये कॉन्सेप्ट दिया।
बिंदेश्वर पाठक के संगठन से जुड़े हैं 50 हजार स्वयंसेवक
जिन्हें टॉयलेट मैन के नाम से प्रसिद्ध संगठन शिक्षा के जरिए ह्यूमन राइट, पर्यावरणीय स्वच्छता, ऊर्जा के गैर पारंपरिक स्रोतों और शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तन कई क्षेत्रों में कार्य करता है। इस संगठन से 50,000 स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। बिंदेश्वर पाठक के बनाए गए शौचालय संग्रहालय को टाइम पत्रिका ने दुनिया के 10 सर्वाधिक अनूठे संग्रहालय में स्थान दिया था।
मैला ढोने वाले सफाईकर्मियों को मुक्त करवाकर दिया रोजगार
डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक सुलभ इंटरनेशलन ने ना केवल सुलभ शौचालय बनवाए बल्कि कई सुलभ प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेन्टर स्थापित करवाए जहां पर मुक्त सफाईकर्मियों, उनके बेटे-बेटियों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के व्यक्तियों को कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं ताकि वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
इसके अलावा पाठक ने हाथ से मैला ढोने वालों के बच्चों के लिए दिल्ली में एक इग्लिश मीडियम शुरू किया। वृन्दावन में परित्यक्त विधवाओं को आर्थिक मदद करते रहे। बिंदेश्वर पाठक ने हमेशा हाशिये पर रहने वाले लोगों की मदद की। वो हमेशा दान पुण्य का काम में भी बहुत आगे रहे।
बिंदेश्वर पाठक को मिले ये अवार्ड
2003 में बिंदेश्वर पाठक का नाम दुनिया के 500 उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों की सूची में शामिल हुआ था।इंदिरा गांधी पुरस्कार, स्टाकहोम वाटर पुरस्कारपर्यावरण के क्षेत्र में काम करने के लिये प्रियदर्शिनी पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा संगठन (आईआरईओ) का अक्षय उर्जा पुरस्कार से बिंदेश्वर पाठक सम्मानित किए गए थे।












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