बिहार चुनाव: कौन बनेगा फुलवारी का मालिक?
पटना(मुकंद सिंह) वर्तमान विधायक : श्याम रजक - जदयू ,
कुल मतदाता- 281441
पुरुष मतदाता-153255
महिला मतदाता-128179
2010 उपविजेता: उदय कुमार, राजद, 2005(अक्टूबर)

फुलवारी विधानसभा क्षेत्र का बहुत सारा हिस्सा राज्य की राजधानी पटना में पड़ता है। 1995 से लेकर अब तक नितीश सरकार के मंत्री श्याम रजक जीतते हुए आ रहे है। कदावर मंत्री होने के बावजूद जैसा विकास फुलवारी का होना चाहिए वैसा नहीं हो सका है आज भी आपको यहां पिछले 10 सालों के जैसे हालात दिखेंगे।
बात राजनीति की करे तो इस बार जदयू को सीट बचाने में एड़ी-चोटी का पसीना बहना पड सकता है, हालांकि इस सीट को लेकर भाजपा गठबंधन में उहापोह कीस्थिति बनी थी यहाँ से भाजपा अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में थी लेकिन हम ने अपना उम्मीदवार उतार दिया।
महादलित आयोग से इस्तीफा देकर हाल में भाजपा में शामिल उदय मांझी को भाजापा ने उम्मीदवारी देने की पूरी मन बना चुकी थी अगर ऐसा होता तो जीत सुनिश्चित थी लेकिन हम ने राजेश्वर मांझी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया इससे लड़ाई कांटे की हो गई है।
पटना से सटा होने के कारण और सुरक्षित सीट होने की वजह से सभी दलों ने अपना उम्मीदवार खडा किया है, यहां मुस्लिम वोटरों की भी अच्छी तादात है तो यहांदलित वोट बटने वाले स्थिति है इस लिहाज गैर मुस्लिम गैर दलित वोटर की अहम रोल है जो फिलहाल भाजपा गठबंधन के साथ दिखाई पड रहा है इसलिए मुकाबला कांटे का है।
अब अगर बात आकड़ों की करे तो 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जदयू साथ में था और राजद लोजपा एक साथ जदयू को कुल मत 67390 मिले थेजबकि राजद गठबंधन को 46210 मत ही हासिल हुए थे जबबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी को राजद से 16000 ज्यादा मत मिले थे।
भाजपा को कुल 69021 मत हासिल हुए थे तो वहीं राजद के उम्मीदवार और लालू यादव की पुत्री मिसा भारती को 52921 मत ही मिले।
आगामी 28 नवम्बर को होने वाले चुनाव में कुल 13 प्रत्याशी इस विधान सभा से है। मुकाबला दिलचस्प और कांटे का है,महागठबंधन के लिए यहाँ कई और समस्या है एक साधू यादव की पार्टी के उम्मीदवार से। आपको बता दें कि साधू यादव लालू यादव के साले है और वर्तमान में उनके कट्टर राजनीतिक दुश्मन।
जिनका आवासीय क्षेत्र फुलवारी विधानसभा है और साधू जिस वोट को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे है वह मूलतः राजद का वोट है, वही माले भी इस
क्षेत्र में अपनी अच्छी जमीन तैयार की है और उसके वोटर भी कभी लालू के साथ हुआ करते थे इसके बाद वर्तमान बिहार के राजनीतिकी धरातल पर महागठबंधन को जो सबसे ज्यदा नुकसान पहुचा रहा है वह है पप्पू यादव।
पप्पू भी यहाँ से महागठबंधन के उमीदवार को हारने में कोई कोर कसार नहीं छोड़ने वाले है जो भाजपा गठबंधन के लिए इस चुनाव में संजीवनी का कम कर रहा है। इन परिस्थियों को देखते हुए कहा जा सकता है की इस बार श्याम रजक को अपनी ताज बचाने के लिए अब तक का सबसे कठिन रास्तों से गुजरना होगा ....












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