बिहार में 'फिर से नीतीशे कुमार' के संकेत, देखिए 47 साल पहले की तस्वीर

नई दिल्ली। बिहार में शुरुआती रुझानों में पिछड़ रहे एनडीए ने दिन चढ़ते ही बढ़त बना ली और अब रुझानों के मुताबिक एनडीए को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। रुझान ये संकेत दे रहे हैं कि बिहार में एक बार फिर से नीतीशे कुमार (Nitish Kumar) सरकार बना सकते हैं। अभी तक एनडीए को 130 सीट और राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन को 100 सीटे मिलती दिखाई दे रही हैं।

47 साल पहले की तस्वीर

47 साल पहले की तस्वीर

243 वाली बिहार विधानसभा में सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत होती है। यानि एनडीए गठबंधन के नेता के रूप में एख बार फिर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे। ऐसे में हम नीतीश कुमार की एक तस्वीर हम आपको दिखा रहे हैं जो 47 साल पहले की है। नीतीश की इस तस्वीर @IndiaHistorypic के पेज से पोस्ट किया गया है। ये तस्वीर उस समय की है जब नीतीश कुमार बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियर के छात्र संघ के अध्यक्ष थे।

नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पटना से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसे अब राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना के नाम से जाना जाता है। नीतीश कुमार छात्र जीवन से राजनीति में रहे हैं। वह 1973 में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्र संघ अध्यक्ष बने थे।

पहली जीत के लिए करना पड़ा था इंतजार

पहली जीत के लिए करना पड़ा था इंतजार

उसी दौर में जेपी का आंदोलन शुरू हुआ और लालू यादव, नीतीश कुमार, सुशील मोदी और राम विलास पासवान समेत कई नेता आंदोलन का हिस्सा बने। इस दौरान नीतीश जेपी, लोहिया, कर्पूरी ठाकुर जैसे दिग्गज नेताओं के साथ रहे।

नीतीश कुमार ने राजनीति की शुरुआत आंदोलन से की और उन्हें बड़े नेताओं के साथ रहने का मौका मिला लेकिन नीतीश कुमार को पहली बार जीत हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्हें पहली बार 1985 के बिहार विधानसभा चुनाव में सफलता मिली। लोकदल के टिकट पर नीतीश ने हरनौत विधानसभा सीट से जीत हासिल की। नीतीश ने कांग्रेस के ब्रजनंदन सिंह को 21 हजार से अधिक वोटों से हराया। इसके बाद नीतीश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2005 से सत्ता की कमान

2005 से सत्ता की कमान

समाजवादी राजनीति करते रहे नीतीश कुमार ने 1996 में बीजेपी के साथ गठबंधन किया। वे केंद्र की अटल बिहारी सरकार में मंत्री रहे। 2004 में केंद्र से एनडीए के सत्ता में बाहर होने के बाद उन्होंने पूरा ध्यान बिहार पर लगाया और 2005 में अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिला। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और तब से आज तक बिहार की सत्ता की कमान उनके हाथ ही रही। भले ही बीच में कुछ समय उन्होंने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन नियंत्रण उनके हाथ ही रहा।

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