जब दहेज में 22 हजार रुपए लेने पर पिता से ही भिड़ गए थे नीतीश

नई दिल्ली। नीतीश कुमार का विवाह एक क्रांतिकारी उत्सव था। शादी के पहले नीतीश कुमार ने एक साहसिक फैसला लिया था। तात्कालीन सामाजिक व्यवस्था में इसकी खूब चर्चा हुई। इसके बाद मशहूर पत्रिका 'धर्मयुग' के लिए पत्रकार जुगनू शारदेय ने नीतीश कुमार का इंटरव्यू किया। धर्मयुग में नीतीश का इंटरव्यू प्रकाशित हुआ। इस इंटरव्यू में नीतीश ने तार्किक तरीके से सधे हुए अंदाज में दहेज प्रथा का विरोध किया था। प्रतिष्ठित साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु यह इंटरव्यू पढ़ कर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने जुगनू शारदेय को फोन कर कहा कि मैं नीतीश जैसा ही दामाद चाहता हूं।

शादी से पहले की पृष्ठभूमि

शादी से पहले की पृष्ठभूमि

ये 1973 से कुछ पहले की बात है। नीतीश इंजीनियिंग के आखिरी साल में थे। वे होस्टल नम्बर में एक में रहते थे। तब वे एक छात्र नेता के रूप में वे मशहूर होने लगे थे। नीतीश की राजनीतिक सक्रियता से उनके पिता वैद्यराज रामलखन सिंह थोड़े चिंतित रहने लगे। रामलखन सिंह ने राजनीति की पथरीली राह देखी थी। वे भी कांग्रेस के नेता थे। 1957 के दूसरे विधानसभा चुनाव में जोड़तोड़ की वजह से उनका टिकट कट गया था। अगर वे वैद्य न होते तो जीवन का निर्वाह मुश्किल हो जाता। रामलखन प्रसाद सिंह जब नीतीश से मिलने होस्टल जाते तो उनसे मुलाकात ही नहीं होती। नीतीश कहीं सभा या बैठक कर रहे होते। तब उन्होंने नीतीश को शादी के बंधन में बांधने का फैसला कर लिया।

 ऐसे तय हुई नीतीश की शादी

ऐसे तय हुई नीतीश की शादी

रामलखन सिंह ने नीतीश की शादी तय कर दी। वे नालंदा जिले के कल्याण बिगहा के रहने वाले थे लेकिन बख्तियारपुर में आयुर्वेदिक दवाखाना चलाते थे। उन्होंने नजदीक के गांव सियोदा के रहने वाले कृष्णनंदन सिन्हा की पु्त्री मंजू सिन्हा से नीतीश की शादी तय कर दी। कृष्णनंदन सिन्हा सरकारी स्कूल के हेडमास्टर थे। उनकी पुत्री मंजू सिन्हा उस समय पटना विश्वविद्यालय के मगध महिला कॉलेज नें स्नातक की पढ़ाई कर रहीं थीं। उस दौर में किसी गांव की लड़की का पटना में पढ़ना बहुत बड़ी बात थी। कृष्णनंदन सिन्हा प्रतिष्ठित शिक्षक थे। वे भी दामाद के रूप में इंजीनियर नीतीश को देख कर खुश थे। नीतीश शुरू में शादी के लिए राजी नहीं हुए। पिता ने बहुत दबाव बनाया तो वे मान गये।

 दहेज लेने पर भड़के नीतीश

दहेज लेने पर भड़के नीतीश

इस बीच नीतीश को कहीं से पता चला कि उनके पिता ने दहेज में 22 हजार रुपये लिये हैं, तो वे भड़क गये। पिता से बात करने के लिए उतावले हो गये। वे अपने पिता का बहुत लिहाज करते थे। उनसे सीधे बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। अपनी बात रखने के लिए उन्होंने अपने इंजीनियर दोस्त नरेन्द्र सिंह को साथ चलने के लिए कहा। रात में किराये पर एक टैक्सी लेकर पटना से बख्तियारपुर पहुंचे। नीतीश की जेब में टैक्सी का किराया देने के लिए पैसा नहीं था। पिता नीतीश को टैक्सी से आया देख कर हैरान हो गये। नीतीश ड्राइवर को पिता से पैसा लेने का इशारा कर के घर के अंदर दाखिल हो गये। नरेन्द्र सिंह, रामलखन सिंह के पास बैठ गये। नीतीश वहां नहीं थे। नरेन्द्र सिंह ने रामलखन सिंह को बताया कि नीतीश दहेज के खिलाफ हैं। न कोई उपहार लिया जाएगा, न कोई लेनदेन होगा। भोजभात, पूजापाठ कुछ नहीं होगा। बिना चमक दमक के कोर्ट मैरेज होगी। रामलखन सिंह नरेन्द्र सिंह की बातें सुन कर आवाक रहे गये। उन्होंने कहा कि लगन की रकम ले कर लौटाना शिष्टाचार के खिलाफ होगा। उन्होंने तो राजी खुशी ये पैसा दिया है। नरेन्द्र सिंह रामलखन सिंह की बात लेकर दूसरे कमरे में नीतीश के पास पहुंचे। नीतीश ने कहा कि अगर ऐसा है तो ये शादी नहीं होगी।

 नीतीश की क्रांतिकारी शादी

नीतीश की क्रांतिकारी शादी

अंत में पिता को झुकना पड़ा। रामलखन सिंह ने दहेज की रकम लौटा दी। नीतीश भी थोड़ा नरम हुए और कोर्ट मैरेज की जिद छोड़ दी। पटना में गांधी मैदान के पास लाला लाजपत राय कम्यूनिटी हॉल में नीतीश और मंजू सिन्हा की बेहद सादगी के साथ शादी हुई। न मंत्र पढ़े गये, न भोज हुआ। इंजीनियरिंग कॉलेज के बहुत से छात्र बसों में भर कर वहां पहुंचे थे। नीतीश ने सिर्फ उनके लिए अल्पाहार का इंतजाम किया था। इसके बाद नीतीश की छवि उसूल पर चलने वाले नौजवान की बन गयी। छात्र आंदोलन में भी नीतीश का कद बढ़ गया।

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